7,800 खर्च के बावजूद छात्रों को घटिया भोजन क्यों?

सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट का हॉस्टल पर छापा

* भोजन, सफाई और ठेकेदारी व्यवस्था पर उठाए सवाल
* दोषियों पर कार्रवाई की चेतावनी
मुंबई /दि.12- सामाजिक न्याय विभाग के छात्रावासों में मिल रही सुविधाओं और भोजन की गुणवत्ता को लेकर उठ रही शिकायतों के बीच सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने बुधवार को मुंबई स्थित एक छात्रावास का औचक निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान छात्रों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता, छात्रावास की स्वच्छता, ठेकेदारों की कार्यप्रणाली तथा अनधिकृत रूप से रहने वाले लोगों को लेकर उन्होंने अधिकारियों से तीखे सवाल पूछे और लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी.
निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बातचीत में शिरसाट ने कहा कि सरकार प्रत्येक छात्र के भोजन पर प्रतिमाह लगभग 7,800 खर्च कर रही है, ऐसे में छात्रों को गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक भोजन मिलना ही चाहिए. यदि इतना खर्च होने के बावजूद छात्रों को खराब भोजन परोसा जा रहा है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है.
छात्रावास का निरीक्षण करते समय मंत्री ने पाया कि उनके दौरे की सूचना मिलने के बाद ही सफाई व्यवस्था में सुधार किया गया था. इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि केवल अधिकारियों या मंत्रियों के दौरे के समय सफाई करना पर्याप्त नहीं है. छात्रावासों की नियमित देखभाल और स्वच्छता बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है. उन्होंने छात्रों से सीधे बातचीत भी की. इस दौरान कई छात्रों ने भोजन और अन्य सुविधाओं को लेकर शिकायतें कीं. छात्रों ने बताया कि यदि वे किसी कारणवश भोजन के समय से एक-दो घंटे देर से पहुंचते हैं, तो उन्हें भोजन नहीं दिया जाता. कुछ छात्रों ने यह भी शिकायत की कि कई बार कच्चे फल वितरित किए जाते हैं.
मंत्री शिरसाट ने भोजन व्यवस्था के लिए अपनाई जा रही ठेका प्रणाली पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा टेंडर जारी कर मुख्य ठेकेदार को काम दिया जाता है, लेकिन बाद में कई मामलों में वही काम उपठेकेदारों के माध्यम से कराया जाता है. इससे लागत कम करने की कोशिश होती है और भोजन की गुणवत्ता प्रभावित होती है. उन्होंने संकेत दिए कि भविष्य में इस व्यवस्था में बदलाव कर भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नई नीति बनाई जा सकती है.
अपने निरीक्षण दौरे के समय मंत्री शिरसाट ने छात्रों से अपील की कि यदि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी हो तो वे सीधे संबंधित अधिकारियों, आयुक्त, प्रधान सचिव अथवा स्वयं उनसे संपर्क करें. उन्होंने कहा कि शिकायत मिलने के बाद भी यदि कार्रवाई नहीं हुई तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है. यदि इसके बावजूद सुविधाएं नहीं मिल रहीं, तो यह जांच का विषय है कि पैसा आखिर कहां खर्च हो रहा है.
मंत्री शिरसाट ने बताया कि संबंधित छात्रावास भवनों के पुनर्विकास की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. अगले एक से डेढ़ महीने में छात्रों को वैकल्पिक स्थानों पर स्थानांतरित किया जाएगा. इसके बाद पुरानी इमारतों को ध्वस्त कर आधुनिक सुविधाओं से युक्त नए छात्रावास बनाए जाएंगे. यह काम म्हाडा के माध्यम से किया जाएगा. मंत्री शिरसाट ने यह भी खुलासा किया कि कुछ छात्रावासों में ऐसे लोग रह रहे हैं जो छात्र ही नहीं हैं. चेंबूर, संभाजीनगर और अन्य स्थानों से ऐसी शिकायतें मिली हैं. कुछ लोग नौकरी या व्यवसाय करने के बावजूद छात्रावासों में रह रहे हैं. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राज्य के सभी छात्रावासों में रहने वाले लोगों का सत्यापन किया जाए. अनधिकृत रूप से रहने वालों को बाहर निकालने के साथ आवश्यक होने पर उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी.
निरीक्षण के बाद मंत्री शिरसाट ने दो टूक कहा कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वच्छ वातावरण और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है, कोई एहसान नहीं. यदि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद छात्रों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, तो जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा. मंत्री शिरसाट के इस औचक निरीक्षण के बाद सामाजिक न्याय विभाग के छात्रावासों में व्यवस्थाओं की व्यापक जांच और सुधारात्मक कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है.

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