हार पहनाकर साथ रह रहे थे नाबालिग लड़का-लड़की

अकोला में बाल विवाह का मामला उजागर

अकोला /दि.6 – अकोला जिले में एक गृह जांच के दौरान बाल विवाह का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जांच में पता चला कि एक नाबालिग लड़का और नाबालिग लड़की एक-दूसरे को माला पहनाकर स्वयं को विवाहित मानते हुए साथ रह रहे थे. मामले का खुलासा होने के बाद प्रशासन ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है.
जानकारी के मुताबिक महिला एवं बाल विकास विभाग की क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले बाल संगोपन योजना के लाभार्थियों की गृह जांच का कार्य कर रही एंकरेज फाउंडेशन के प्रतिनिधियों को एक घर में नाबालिग बालिका के विवाह कर साथ रहने की जानकारी मिली. प्राथमिक जांच में सामने आया कि दोनों किशोरों ने एक-दूसरे को हार पहनाकर विवाह करने का दावा किया था. इसके बाद मामले की सूचना बाल कल्याण समिति को दी गई. समिति के निर्देश पर बाल संरक्षण कक्ष और संबंधित अधिकारियों की टीम ने मौके का दौरा किया.
जांच के दौरान दोनों के आयु संबंधी दस्तावेजों की जांच की गई, जिसमें लड़का और लड़की दोनों ही कानूनी विवाह आयु से कम पाए गए. इसके बाद उन्हें बाल कल्याण समिति के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं. साथ ही ग्राम पंचायत अधिकारियों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं. इस कार्रवाई के दौरान अनिता गुरव सहित समिति के अन्य सदस्य और बाल संरक्षण विभाग के अधिकारी उपस्थित थे.
जिला महिला एवं बाल विकास विभाग ने कहा है कि बाल विवाह केवल सामाजिक कुरीति ही नहीं, बल्कि कानूनन दंडनीय अपराध भी है. कानून के अनुसार लड़की की न्यूनतम विवाह आयु 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष निर्धारित है. इससे कम आयु में विवाह कराना या करवाना अपराध की श्रेणी में आता है. विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिले तो तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या आपातकालीन सेवा 112 पर सूचना दें. सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाएगी.

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