ऑपरेशन टाइगर के बाद ठाकरे गुट पर संकट

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मांगा पक्ष

मुंबई/दि. 24- उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के कथित ऑपरेशन टाइगर के बाद शिवसेना उबाठा गुट को लोकसभा में बड़ा झटका लगा है. पार्टी के 9 में से 6 सांसदों के शिंदे गुट के साथ जाने के बाद अब मामला संसद तक पहुंच गया है. इसी पृष्ठभूमि में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने ठाकरे गुट को अपना पक्ष रखने के लिए तलब किया है.
सूत्रों के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष ने ठाकरे गुट से कहा है कि वह अपना पक्ष स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करे. इसके लिए पार्टी के वरिष्ठ सांसद अरविंद सावंत और अनिल देसाई आज शाम 5 बजे लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर पार्टी की दलीलें पेश करेंगे.

* अयोग्यता से बचने की कोशिश
राजनीतिक घटनाक्रम के बीच बागी सांसदों ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत आवश्यक दो-तिहाई बहुमत का दावा किया है. इसी आधार पर वे अयोग्यता की कार्रवाई से बचने का प्रयास कर रहे हैं. दूसरी ओर ठाकरे गुट का कहना है कि इन सांसदों को अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता नहीं दी जानी चाहिए और उन्होंने पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया है.

* ठाकरे गुट की प्रमुख दलीलें
* बैठक में ठाकरे गुट निम्नलिखित मुद्दे उठाने वाला है
– बागी 6 सांसदों को स्वतंत्र संसदीय गुट के रूप में मान्यता न दी जाए.
– पार्टी व्हिप का उल्लंघन करने वाले सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.
– लोकसभा में पार्टी की मूल पहचान और अधिकार बरकरार रखे जाएं.
– दल-बदल कानून के प्रावधानों के तहत कानूनी आपत्तियां दर्ज की जाएं.

* घटनाक्रम की टाइमलाइन
– 16 जून : ठाकरे गुट के 6 सांसद दिल्ली पहुंचे और पार्टी नेतृत्व से दूरी बना ली.
– 17 जून : सांसदों ने शिंदे गुट के नेताओं के साथ बैठक की और रणनीति तैयार की.
– 17 जून : सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर हस्ताक्षरयुक्त पत्र सौंपा.
– 17 जून से 22 जून : संभावित कानूनी और राजनीतिक दबाव से बचने के लिए सांसदों को अलग-अलग स्थानों पर रखा गया.
– 22 जून : मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में सांसदों ने औपचारिक रूप से शिंदे गुट के साथ जाने की घोषणा की.

महाराष्ट्र की राजनीति पर असर
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट के लिए यह घटनाक्रम बड़ा राजनीतिक और कानूनी झटका माना जा रहा है. विधानसभा में विभाजन के बाद अब लोकसभा में भी सांसदों की संख्या घटने से पार्टी की स्थिति कमजोर हुई है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष आज होने वाली सुनवाई और चर्चा आगे की संसदीय स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है. पूरे महाराष्ट्र की नजर इस बात पर टिकी है कि ठाकरे गुट संसद में अपनी पहचान और राजनीतिक अस्तित्व को किस हद तक बनाए रख पाता है.

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