1 जुलाई से बंद होंगी ‘महात्मा गांधी’ श्रृंखला की पुरानी नोटें?
2005 से पहले छपी ‘महात्मा गांधी’ श्रृंखला की मुद्रा को लेकर रिजर्व बैंक का बड़ा फैसला

* धीरे-धीरे चलन से बाहर होंगी महात्मा गांधी श्रृंखला की पूरानी नोटे,
– पुरानी महात्मा गांधी सिरीज की नोटे अभी भी वैध, चलन में बनी रहेंगी
* बैंकों में नही होगी नोटो की अदला-बदली,केवल आरबीआय कार्यालय में बदली जाएगी नोटे
* पुरानी नोटबंदी से बिल्कूल अलग है मामला, यह नई नोटबंदी नहीं
मुंबई/दि.27- भारतीय रिजर्व बैंक ने वर्ष 2005 से पहले छपी ‘महात्मा गांधी’ श्रृंखला की सभी मुद्रा नोटों को चरणबद्ध तरीके से प्रचलन से बाहर करने की प्रक्रिया तेज कर दी है. इस संबंध में रिजर्व बैंक ने 9 जून 2026 को देश के सभी बैंकों को जारी परिपत्र में स्पष्ट किया है कि ऐसी नोटों को स्वीकार करने अथवा बदलने की सुविधा सामान्य बैंकों में उपलब्ध नहीं होगी. अब यह सुविधा केवल रिजर्व बैंक के देशभर में स्थित 19 क्षेत्रीय कार्यालयों में ही मिलेगी. रिजर्व बैंक के निर्देशों के बाद विभिन्न बैंकों ने भी आवश्यक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं.
* ‘महात्मा गांधी’ श्रृंखला की पुरानी नोटें होंगी बाहर
रिजर्व बैंक ने वर्ष 1996 में पहली बार सभी मूल्यवर्ग की नोटों पर महात्मा गांधी का चित्र छापना शुरू किया था. इस श्रृंखला को आधिकारिक रूप से ‘महात्मा गांधी सीरीज’ नाम दिया गया था. वर्तमान में जिन नोटों को प्रचलन से हटाने की प्रक्रिया चल रही है, वे वर्ष 1996 से 2005 के बीच छपी इसी पहली श्रृंखला की नोटें हैं. हालांकि, वर्ष 2016 की नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक ने नई डिजाइन, रंग और आकार वाली जो नोटें जारी कीं, उन्हें ‘महात्मा गांधी (न्यू) सीरीज’ नाम दिया गया. 2005 के बाद छपी नोटों के पीछे की ओर मुद्रण वर्ष स्पष्ट रूप से अंकित होता है, जिससे दोनों श्रृंखलाओं की पहचान आसानी से की जा सकती है. रिजर्व बैंक ने अपने परिपत्र में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मुद्रा की सुरक्षा विशेषताओं को आधुनिक बनाने और नकली नोटों पर नियंत्रण के उद्देश्य से पुरानी नोटों को धीरे-धीरे चलन से हटाया जा रहा है. इसके लिए बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी परिस्थिति में 2005 से पहले की नोटों को एटीएम या काउंटर के माध्यम से दोबारा जनता के बीच जारी न करें. साथ ही, यदि ऐसी नोटें बैंकों में जमा होती हैं तो उन्हें अलग वर्गीकृत कर करेंसी चेस्ट में जमा किया जाए अथवा रिजर्व बैंक के निकटतम कार्यालय में भेजा जाए.
* अभी भी वैध हैं पुरानी नोटें
परिपत्र का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि 8 नवंबर 2016 की नोटबंदी के दौरान अमान्य घोषित किए गए पुराने 500 और 1000 रुपये के नोटों को छोड़कर, 2005 से पहले की अन्य सभी नोटें अभी भी वैधानिक मुद्रा (लीगल टेंडर) हैं. यानी उनका कानूनी मूल्य समाप्त नहीं हुआ है और वे अभी भी मान्य हैं.
* बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने सबसे पहले जारी किया परिपत्रक
इसी क्रम में बैंक ऑफ महाराष्ट्र के पुणे मुख्यालय ने 12 जून 2026 को अपनी सभी शाखाओं, क्षेत्रीय कार्यालयों और करेंसी चेस्ट को 2005 से पहले की नोटों के संबंध में विशेष निर्देश जारी किए हैं. जिसमें बैंक ऑफ महाराष्ट्र प्रबंधन व्दारा साफ तौर पर कहा गया है कि, रिझर्व बैंक ऑफ इंडिया के निर्देषानूसार 1 जुलाई 2026 से चलन में रहनेवाले वर्ष 2005 से पहले छपे 10, 20, 50 व 100 रूपए के करंसी नोटे को महाराष्ट्र बैंक की किसी भी शाखा में स्वीकार नहीं किया जाएगा. बल्कि 1 जुलाई के बाद से ऐसी नोटो को केवल रिझर्व बैेंक ऑफ इंडिया के कार्यालय में ही जमा करना होगा. जिसके चलते यदि किसी ग्राहक के पास सन 2005 से पहले की करंसी नोट है तो ऐसे करंसी नोटो को 30 जून से पहले ही अपने बैंक खाते में जमा कराया जाना चाहिए या बदलवाकर देना चाहिए.
इस बीच, रिजर्व बैंक के निर्देशों के अनुरूप बैंक ऑफ महाराष्ट्र द्वारा जारी आंतरिक परिपत्र को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी भी देखी जा रही है. बैंक कर्मचारियों का कहना है कि जब ग्राहक पुरानी नोटों को जमा करने या बदलवाने के संबंध में जानकारी मांगते हैं, तो उन्हें स्थिति स्पष्ट करने में कठिनाई होती है. बैंक ने अपने परिपत्र में यह भी उल्लेख किया है कि कुछ मामलों में ग्राहकों को उचित जानकारी और मार्गदर्शन नहीं मिलने की शिकायतें सामने आई हैं. हालांकि, रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह नई नोटबंदी नहीं है, बल्कि पुरानी श्रृंखला की नोटों को सुरक्षा कारणों से धीरे-धीरे प्रचलन से हटाने की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है.