देश के 315 जिलों पर सूखे का संकट

‘अल नीनो’ बढ़ाएगा संकट, संयुक्त राष्ट्र ने भी चेताया

* महाराष्ट्र समेत 12 राज्यों में कमजोर मानसून की आशंका
* कृषि और जल संसाधनों पर मंडरा रहा खतरा
नई दिल्ली./दि.29- दुनिया भर में बढ़ती गर्मी और बदलते मौसम के बीच ‘अल नीनो’ का प्रभाव चिंता का विषय बनता जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र और विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने चेतावनी दी है कि अल नीनो के कारण वैश्विक तापमान में और वृद्धि होगी तथा इसके गंभीर प्रभाव भारत सहित कई देशों पर पड़ सकते हैं. भारत में भी इसके चलते सूखे जैसी परिस्थितियां बनने की आशंका व्यक्त की गई है.
कृषि मंत्रालय और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा किए गए संयुक्त अध्ययन के अनुसार देश के 315 जिलों में कम वर्षा और सिंचाई की कमी का खतरा मंडरा रहा है. इन जिलों में मानसून सामान्य से कमजोर रहने की संभावना जताई गई है, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है.
अध्ययन में बताया गया है कि प्रभावित जिलों में से 111 जिलों में सिंचाई सुविधा 25 प्रतिशत से भी कम है, जबकि 76 जिलों में सिंचाई का दायरा 25 से 50 प्रतिशत के बीच है. इन जिलों में वर्षा की कमी होने पर किसानों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है. महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा सहित 12 राज्यों के जिले इस संभावित संकट की जद में बताए गए हैं.
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अल नीनो को लेकर चेतावनी देते हुए कहा है कि आने वाले महीनों में इसके प्रभाव के बढ़ने की 90 प्रतिशत संभावना है. उन्होंने कहा कि पहले से गर्म हो रही दुनिया में अल नीनो आग में घी डालने का काम करेगा और इसके प्रभाव दूरगामी तथा अधिक गंभीर होंगे. विश्व मौसम विज्ञान संगठन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों का समुद्री जल असामान्य रूप से गर्म होने के कारण अल नीनो की स्थिति विकसित हो रही है. संगठन का अनुमान है कि जून से अगस्त 2026 के बीच अल नीनो की स्थिति बनने की संभावना 80 प्रतिशत तक है, जबकि इसके नवंबर तक बने रहने की संभावना 90 प्रतिशत या उससे अधिक है.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून कमजोर रहा तो देश के कई हिस्सों में जल संकट, कृषि उत्पादन में गिरावट और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. ऐसे में राज्यों को जल प्रबंधन, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और वैकल्पिक फसल योजनाओं पर अभी से काम शुरू करने की आवश्यकता है. दूसरी ओर यूरोप के कई देशों में भी भीषण गर्मी का असर दिखाई दे रहा है. फ्रांस में गर्मी से एक हजार से अधिक लोगों की मौत होने की खबर है, जबकि जर्मनी, स्पेन और ब्रिटेन में रिकॉर्ड तापमान दर्ज किया जा रहा है.

Back to top button