हिंगोली में बार-बार क्यों आता है भूकंप, क्या है खास वजह

हिंगोली/दि.26- महाराष्ट्र के हिंगोली परिसर में अक्सर ही भूगर्भीय हलचलों की वजह से भूकंप महसूस होता है. जिसे लेकर छत्रपति संभाजी नगर स्थित एमजीएम एपीजे अब्दुल कलाम खगोल-अंतरिक्ष विज्ञान केन्द्र के संचालक श्रीनिवास औंधकर द्बारा जानकारी देते हुए बताया गया कि हिंगोली परिसर अंतरपट्टीय विवर्तनिक तनाव व प्राचीन भूभंग रेखाओं पुनसिक्रियीकरण तथा स्थानीय भूवैज्ञानिक बदलावों की वजह से भूगर्भीय हलचलें होती रहती है तथा पृथ्वी के भीतर लंबे समय तक जमा होनेवाला तनाव समय-समय पर मुक्त होते रहने की वजह से इस क्षेत्र में सौम्य भूकंप के समूह का अनुभव होता रहता है.

* भुवैज्ञानिक पार्श्वभूमि
हिंगोली परिसर का समावेश दख्खन के पठार वाले अंतर्पट्टीय भूकंप क्षेत्र में होता है. इस क्षेत्र में प्राचीन भूभंग रेखा समय-समय पर बार-बार सक्रिय होती है. इस भूकंप का केन्द्र बिंदू किन्हेरसानी-गोदावरी भूभंग रेखा के पास दिखाई देता है. वायव्य-अग्नेय दिशा की ओर व्याप्त इस विवर्तनीक रचना के चलते मध्यम तीव्रता वाला भूकंप होने की संभावना काफी अधिक रहती है.

– दख्खन के पठार में प्रागैतिहासिक काल के दौरान निर्माण हुई बेहद गहरी भूभंग रेखाएं है. प्रादेशिक विवर्तनिक तनाव की वजह से ये रेखाएं दोबारा सक्रिय होती है और अचानक ही उर्जामुक्त होने की वजह से भूकंप के झटके महसूस होते है.
– भारतीय व यूरेशियन विवर्तनिक पट्टियों के बीच लगातार होनेवाले टकराव की वजह से निर्माण होनेवाला तनाव भारत के अंतर्गत क्षेत्र में भी पहुंचता है. इसकी वजह से मराठवाडा जैसे स्थित माने जानेवाले परिसर में भी अक्सर ही भूकंप का अनुभव होता है.
– मानसून में बारिश का पानी जमीन के भीतर रहनेवाली दरारों तथा ज्वालामुखीय बेसाल्ट के पत्थरों तक पहुंचता है. जिसके चलते छिद्र दाब बढ जाता है. जो प्राचीन भूभंग रेखाओं को दुबारा सक्रिय करने की वजह बन सकता है.
– हिंगोली परिसर में अधिकांश भूकंप जमीनी सतह से करीब 10 किमी की गहराई पर होते है. जिसकी वजह से भूकंप की तीव्रता साफ तौर पर महसूस होती है.

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