विधायक बच्चू कडू के संघर्ष को मिली डबल सफलता
किसानों को मिली दोहरी राहत : दुबारा बुआई के लिए बीज और 12 गांवों की खेती के लिए सिंचाई का पानी

* प्रहार के आंदोलन और लगातार फॉलोअप के आगे झुका शासन, हजारों किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
अमरावती/दि.15- किसानों के सवालों पर लगातार आक्रामक भूमिका निभाने वाले पूर्व मंत्री व विधायक बच्चू कडू के संघर्ष को एक साथ दो बड़ी सफलताएं मिली हैं. बोगस और निकृष्ट बीजों के कारण संकट में फंसे किसानों को दुबारा बुआई के लिए डीपीडीसी के माध्यम से बीज उपलब्ध कराने का निर्णय राज्य शासन ने लिया है, वहीं वर्षों से सिंचाई के पानी की मांग कर रहे 12 कोरडवाहू गांवों के लिए स्वतंत्र उपसा जलसिंचन योजना को भी मंजूरी मिल गई है. इन दोनों निर्णयों को बच्चू कडू और प्रहार संगठन के लंबे संघर्ष, आंदोलनों और शासन स्तर पर किए गए निरंतर प्रयासों की बड़ी जीत माना जा रहा है. जिसके चलते राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दोनों फैसलों से खुशी का माहौल है. किसानों का कहना है कि एक निर्णय वर्तमान खरीफ सीजन को बचाने वाला है, जबकि दूसरा आने वाली पीढ़ियों के कृषि भविष्य को बदलने वाला साबित होगा.
* बोगस बीजों ने उजाड़ दी किसानों की उम्मीदें
इस वर्ष खरीफ हंगाम की शुरुआत में राज्यभर से बोगस और निकृष्ट दर्जे के बीजों की शिकायतें सामने आईं. हजारों किसानों द्वारा खरीदे गए बीज खेतों में उगे ही नहीं. परिणामस्वरूप किसानों की पहली बुआई पूरी तरह विफल हो गई. किसानों का केवल बीज ही बर्बाद नहीं हुआ, बल्कि खेत की तैयारी, ट्रैक्टर जुताई, खाद, मजदूरी, बुआई और अन्य कृषि कार्यों पर खर्च किए गए हजारों रुपये भी डूब गए. पहले से आर्थिक संकट और कर्ज के बोझ से दबे किसानों के सामने दुबारा बुआई का गंभीर प्रश्न खड़ा हो गया.
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विधायक बच्चू कडू ने सीधे कृषि आयुक्त सुहास मांढरे से संपर्क किया और स्पष्ट शब्दों में कहा कि केवल पंचनामा कर देने से किसानों की समस्या हल नहीं होगी. दुबारा बुआई का समय तेजी से निकल रहा है और यदि तत्काल मदद नहीं मिली तो हजारों किसानों का पूरा वर्ष बर्बाद हो जाएगा. उन्होंने कृषि विभाग को शासन के समक्ष तत्काल प्रस्ताव भेजने का सुझाव दिया ताकि प्रभावित किसानों को बीज उपलब्ध कराए जा सकें.
* शासन ने स्वीकार की बच्चू कडू की मांग
विधायक बच्चू कडू की पहल के बाद कृषि विभाग ने स्थिति का आकलन कर शासन को प्रस्ताव भेजा. प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करते हुए राज्य शासन ने दुबारा बुआई के लिए डीपीडीसी निधि के माध्यम से बीज उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया. इस निर्णय से उन किसानों को सीधा लाभ मिलेगा जिनकी पहली बुआई बोगस बीजों के कारण विफल हुई है. कृषि क्षेत्र में इस फैसले को तात्कालिक राहत के रूप में देखा जा रहा है.
* बोगस कंपनियों के खिलाफ जारी रहेगा संघर्ष
पूर्व मंत्री व विधायक बच्चू कडू ने कहा है कि बीज उपलब्ध कराना केवल पहला कदम है. असली लड़ाई उन कंपनियों के खिलाफ है जिन्होंने किसानों को निकृष्ट बीज बेचकर करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने मांग की है कि दोषी कंपनियों से किसानों के पूरे नुकसान की वसूली की जाए, प्रति एकड़ कम से कम दो लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए, उनके लाइसेंस रद्द किए जाएं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाएं. विधायक बच्चू कडू ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि किसानों को न्याय नहीं मिला तो राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा. उनके आंदोलन के बाद विभिन्न जिलों में कई कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू हुई है.
* प्रहार की दूसरी बड़ी जीत : 12 गांवों की खेती तक पहुंचेगा पानी
किसानों के लिए राहत का दूसरा बड़ा फैसला तिवसा क्षेत्र के उन 12 गांवों से जुड़ा है जो वर्षों से सिंचाई सुविधा से वंचित थे. गुरुकुंज उपसा जलसिंचन योजना के पहले चरण में वर्हा, मालधुर, धोत्रा, मालेगांव, सालोरा, शेंदोला बुद्रुक, शिवणगाव और आसपास के कई गांव शामिल नहीं किए गए थे. परिणामस्वरूप इस पूरे क्षेत्र की खेती केवल बारिश पर निर्भर थी. सूखे और अनिश्चित वर्षा के कारण यहां के किसानों को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा था. खेती लाभकारी न रहने के कारण अनेक किसान आर्थिक संकट में फंस गए थे.
* आमरण अनशन से शुरू हुआ संघर्ष
इस समस्या को लेकर प्रहार के नेता संजय देशमुख, भूमिहीन किसान मुरली मदणकर और रवी पाथरे ने आमरण अनशन किया था. उस समय राज्यमंत्री रहे बच्चू कडू ने आंदोलन की गंभीरता को समझते हुए संबंधित अधिकारियों को स्वतंत्र सिंचाई योजना तैयार करने के निर्देश दिए थे. इसके बाद योजना का प्रारूप तैयार हुआ, लेकिन बाद में इन गांवों को नदी जोड़ परियोजना में शामिल करने का प्रस्ताव सामने आया. प्रहार ने इसका विरोध करते हुए कहा कि नदी जोड़ परियोजना पूरी होने में वर्षों लग सकते हैं और तब तक किसान पानी के लिए तरसते रहेंगे.
* विधायक द्वय बच्चू कडू और राजेश वानखड़े के प्रयास रंग लाए
किसानों को सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध कराने के संदर्भ में प्रहार जनशक्ति संगठन की ओर से लगातार पत्राचार किया गया. साथ ही विधायक बच्चू कडू और विधायक राजेश वानखड़े ने भी शासन स्तर पर इस मांग को मजबूती से उठाया. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी इस संबंध में निवेदन सौंपा गया. लगातार फॉलोअप और राजनीतिक प्रयासों के बाद अंततः स्वतंत्र उपसा जलसिंचन योजना को मंजूरी मिल गई. योजना मंजूर होने से 12 गांवों की हजारों एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलेगा.
* किसानों में खुशी की लहर
योजना की मंजूरी के बाद पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है. किसानों का कहना है कि वर्षों बाद उनकी मांग पूरी हुई है. कई बुजुर्ग किसानों ने भावुक शब्दों में कहा कि शायद उन्हें अपने जीवनकाल में इसका पूरा लाभ न मिले, लेकिन उनके बच्चों और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य अब निश्चित रूप से बेहतर होगा.
* किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण
एक ओर बोगस बीजों से प्रभावित किसानों को दुबारा बुआई के लिए बीज उपलब्ध कराने का निर्णय और दूसरी ओर 12 गांवों के लिए सिंचाई परियोजना की मंजूरी-इन दोनों फैसलों ने ग्रामीण क्षेत्र में नई उम्मीद जगा दी है. कृषि क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि इन निर्णयों का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ तो हजारों किसान परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्राप्त होगी. ग्रामीण क्षेत्रों में यह चर्चा है कि किसानों के मुद्दों पर लगातार संघर्ष, आंदोलन और शासन के दरवाजे खटखटाने की नीति के कारण ही ये दोनों महत्वपूर्ण फैसले संभव हो सके हैं. इसी वजह से प्रहार कार्यकर्ता और किसान इन दोनों निर्णयों को किसानों के लिए दोहरी जीत और बच्चू कडू के संघर्ष की बड़ी सफलता के रूप में देख रहे हैं.





