डेढ माह में आरटीई फीस प्रतिपूर्ति बकाया अदा करें

उच्च न्यायालय के राज्य सरकार को आदेश

* अमरावती की शाला संस्था की याचिका पर निर्देश
नागपुर /दि.22- बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया कि वह निजी स्कूलों के आरटीई अधिनियम के तहत लंबे समय से लंबित फीस प्रतिपूर्ति दावों की जांच करे. 4 हफ्ते में प्रत्येक स्कूल के दावे की जांच कर पात्रता तय करें और देय राशि की गणना करें. यह निर्देश जस्टिस अनिल एस. किलोर और जस्टिस राज डी. वाकोडे की डिवीजन बेंच ने शांताई इंग्लिश स्कूल, शिरजगांव (मोझरी) और अन्य स्कूलों द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया. निर्देश के अनुसार अगले 2 हफ्ते में पात्र राशि जारी करें. यानी कुल 6 हफ्ते में पूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी.
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि, वे शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत मान्यता प्राप्त स्कूल हैं और 25% आरटीई कोटा के तहत प्रवेशित छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति के हकदार हैं. 2018-19 शैक्षणिक वर्ष से राज्य सरकार ने उन्हें फीस का भुगतान नहीं किया है. स्कूलों ने यह भी बताया कि बॉम्बे हाईकोर्ट की प्रिंसिपल सीट और औरंगाबाद खंडपीठ पहले ही इसी तरह के मामलों में राज्य को दावों की जांच कर भुगतान करने का निर्देश दे चुके हैं.
* कोर्ट के अन्य निर्देश
– यदि किसी स्कूल को अयोग्य पाया जाता है तो अधिकारियों को कारण सहित आदेश जारी करना होगा.
– यदि कोई याचिकाकर्ता आंशिक या पूर्ण अस्वीकृति से असंतुष्ट है तो वह कानून के अनुसार उचित कानूनी उपाय अपना सकता है.

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