डीपफेक वीडियो मामले में हाईकोर्ट पहुंचे नितिन गडकरी

मेटा और गूगल समेत कई प्लेटफॉर्मों के खिलाफ याचिका, 5 अगस्त को होगी सुनवाई

* एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर कथित फर्जी और भ्रामक सामग्री हटाने की मांग, कहा- छवि धूमिल करने की साजिश
मुंबई/दि.28- केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे कथित डीपफेक वीडियो और भ्रामक डिजिटल सामग्री के खिलाफ मुंबई उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है. गडकरी ने मेटा (फेसबुक-इंस्टाग्राम), गूगल एलएलसी, एक्स (पूर्व ट्विटर) सहित अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ याचिका दायर कर आपत्तिजनक और कथित रूप से फर्जी सामग्री को हटाने की मांग की है. इस मामले पर मुंबई हाईकोर्ट में 5 अगस्त को विस्तृत सुनवाई होगी. न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की एकल पीठ के समक्ष होने वाली सुनवाई को लेकर राजनीतिक और कानूनी हलकों में विशेष रुचि बनी हुई है.
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की ओर से दायर याचिका में दावा किया गया है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल और ई-20 ईंधन कार्यक्रम को लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो, पोस्ट और डिजिटल सामग्री कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआय) की सहायता से तैयार किए गए डीपफेक हैं, जिनका उद्देश्य उनकी छवि को नुकसान पहुंचाना है.
बता दे कि, देश में नीट पेपर लीक विवाद और उससे जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद सोशल मीडिया पर एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर भी बहस तेज हो गई है. इसी दौरान कुछ वीडियो और पोस्ट वायरल हुए, जिनमें केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और उनके परिवार को एथेनॉल परियोजना से कथित आर्थिक लाभ मिलने के आरोपों से जोड़ा गया. गडकरी की याचिका में कहा गया है कि ये आरोप पूरी तरह निराधार, भ्रामक और दुर्भावनापूर्ण हैं. याचिकाकर्ता के अनुसार, एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल तथा ई-20 कार्यक्रम का संचालन केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में होता है और इन योजनाओं का प्रत्यक्ष प्रशासनिक संबंध सड़क परिवहन मंत्रालय से नहीं है.
याचिका में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और सामग्री प्रथम दृष्टया फर्जी, छेड़छाड़युक्त, भ्रामक तथा मानहानिकारक प्रतीत होती है. इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक का उपयोग कर गडकरी की छवि, आवाज अथवा व्यक्तित्व का कथित तौर पर अनधिकृत उपयोग किया गया है. याचिका में यह भी कहा गया है कि ऐसे वीडियो और पोस्ट न केवल व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि जनता के बीच भ्रम और गलत सूचना भी फैलाते हैं. इसलिए संबंधित सामग्री को तत्काल हटाने तथा भविष्य में ऐसे प्रसारणों पर रोक लगाने के लिए न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता है.
* हाईकोर्ट ने पहले दी थी दीवानी दावा दायर करने की सलाह
मामले की पूर्व सुनवाई के दौरान मुंबई उच्च न्यायालय ने गडकरी को इस संबंध में दीवानी दावा दायर करने की स्वतंत्रता होने की बात स्पष्ट की थी. इसके बाद गडकरी ने विस्तृत याचिका दाखिल कर विभिन्न सोशल मीडिया मंचों और संबंधित पक्षों को प्रतिवादी बनाया है.
* ‘आलोचना नहीं, झूठे प्रचार पर आपत्ति’
याचिका में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इसका उद्देश्य सरकार, मंत्री या उनके मंत्रालय के निर्णयों पर सार्वजनिक चर्चा, आलोचना, विश्लेषण या लोकतांत्रिक बहस को रोकना नहीं है. गडकरी की ओर से कहा गया है कि स्वस्थ आलोचना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन फर्जी सामग्री, डीपफेक वीडियो और झूठे आरोपों के माध्यम से किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना स्वीकार्य नहीं हो सकता.
* 5 अगस्त की सुनवाई पर टिकी निगाहें
अब इस मामले में 5 अगस्त को होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है. डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर बढ़ते डीपफेक मामलों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के दुरुपयोग के संदर्भ में यह प्रकरण एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल बन सकता है. अदालत के आगामी आदेश पर राजनीतिक दलों, सोशल मीडिया कंपनियों और साइबर कानून विशेषज्ञों की निगाहें टिकी हुई हैं.

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