किसानों को परेशानी हो तो सह लेंगे, लेकिन उद्योगपतियों को नहीं
मंत्री गुलाबराव पाटिल के बयान पर मचा राजनीतिक तूफान

* बिजली आपूर्ति को लेकर दिया विवादित बयान, विपक्ष ने साधा निशाना, किसान संगठनों में नाराजगी
जलगांव/दि.28- महाराष्ट्र के जलापूर्ति मंत्री और शिवसेना (शिंदे गुट) के वरिष्ठ नेता गुलाबराव पाटिल का एक बयान राज्य की राजनीति में नए विवाद का कारण बन गया है. जलगांव में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि किसानों को थोड़ी परेशानी हुई तो हम सहन कर लेंगे, लेकिन उद्योगपतियों को परेशानी नहीं होनी चाहिए. उनके इस बयान के बाद विपक्षी दलों और किसान संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.
चिंचोली स्थित विद्युत उपकेंद्र के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए मंत्री पाटिल ने बिजली आपूर्ति के महत्व पर चर्चा की. इसी दौरान उन्होंने कहा कि यदि कुछ समय के लिए बिजली नहीं रहे तो किसान किसी तरह स्थिति संभाल सकते हैं, लेकिन उद्योगों में बिजली बाधित होने पर भारी आर्थिक नुकसान होता है. उन्होंने कहा कि उद्योग बंद होने पर उत्पादन रुक जाता है, जबकि मजदूरों का वेतन और अन्य खर्च जारी रहते हैं. यही कारण है कि उद्योगों को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलना जरूरी है.
हालांकि, मंत्री का यह बयान सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई. विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है और उद्योगपतियों को प्राथमिकता दे रही है. किसान संगठनों का कहना है कि खेती पूरी तरह बिजली पर निर्भर है. सिंचाई, पंप, कृषि उपकरण और फसलों की सुरक्षा के लिए बिजली आवश्यक है. ऐसे में किसानों की परेशानी को हल्के में लेना उनकी मेहनत और संघर्ष का अपमान है.
इसी बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की नेता रोहिणी खडसे ने मंत्री पाटिल के बयान की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि यदि सरकार किसानों को कोई विशेष राहत नहीं दे सकती, तो कम से कम उनका अपमान भी नहीं करना चाहिए. खडसे ने कहा कि किसानों और उद्योगों के बीच तुलना करना ही गलत है. किसानों को बिजली की समस्या होने पर फसलों का नुकसान होता है, जिससे उनकी पूरी आजीविका प्रभावित होती है. उन्होंने मांग की कि सरकार के वरिष्ठ नेताओं को मंत्री पाटिल को इस प्रकार के बयान देने से बचने की सलाह देनी चाहिए. उधर, सत्तारूढ़ गठबंधन के कुछ नेताओं ने मंत्री के बयान का बचाव करते हुए कहा कि उनके वक्तव्य का आशय उद्योगों को होने वाले आर्थिक नुकसान की ओर ध्यान आकर्षित करना था, न कि किसानों को कमतर आंकना. हालांकि, बयान की भाषा को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है.
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब राज्य में किसानों के मुद्दे, बिजली आपूर्ति, सिंचाई और कृषि संकट को लेकर पहले से ही राजनीतिक माहौल गर्म है. विपक्ष ने सरकार से मंत्री के बयान पर स्पष्टीकरण देने और किसानों से माफी मांगने की मांग की है. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मंत्री गुलाबराव पाटिल अपने बयान पर कोई सफाई देते हैं या नहीं, और सरकार इस विवाद को शांत करने के लिए क्या कदम उठाती है.





