महाराष्ट्र में सीजेपी आंदोलनकारियों पर दर्ज मामले होंगे वापिस
मुख्यमंत्री फडणवीस ने पुलिस को दिए तत्काल निर्देश

* राज्य में छात्र आंदोलन के दौरान दर्ज मामले रद्द करने का फैसला, युवाओं को बड़ी राहत
मुंबई/दि.28- नीट पेपर लीक के विरोध में देशभर में हुए सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) समर्थित छात्र आंदोलन के दौरान महाराष्ट्र में दर्ज मामलों को वापस लेने का निर्णय राज्य सरकार ने लिया है. मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुलिस विभाग को इस संबंध में तत्काल निर्देश जारी किए हैं. सरकार के इस फैसले को आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है.
बता दे कि, दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुए सीजेपी आंदोलन ने पूरे देश में व्यापक प्रभाव डाला था. नीट पेपर लीक प्रकरण को लेकर शुरू हुए इस आंदोलन के दबाव में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा था. आंदोलन को समर्थन देने के लिए महाराष्ट्र सहित देश के कई राज्यों में छात्रों और युवाओं ने प्रदर्शन किए थे. कुछ स्थानों पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था, जबकि कई जगह उनके खिलाफ मामले भी दर्ज किए गए थे. हाल ही में सीजेपी नेतृत्व ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया था कि आंदोलन समाप्त होने के बावजूद कई भाजपा शासित राज्यों में आंदोलनकारियों और समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई जारी है. संगठन ने चेतावनी दी थी कि यदि दर्ज मामले वापस नहीं लिए गए और पुलिस कार्रवाई नहीं रुकी, तो आंदोलन फिर से शुरू किया जाएगा. सीजेपी नेताओं का कहना था कि केंद्र सरकार की ओर से आंदोलन समाप्त कराने के दौरान यह आश्वासन दिया गया था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल किसी भी छात्र या युवा के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. इसी मुद्दे को लेकर संगठन लगातार सरकार पर दबाव बना रहा था.
* महाराष्ट्र के कई शहरों में हुए थे प्रदर्शन
मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक, औरंगाबाद सहित राज्य के विभिन्न शहरों में छात्रों ने सीजेपी के समर्थन में रैलियां, धरने और प्रदर्शन आयोजित किए थे. कुछ स्थानों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी थी. इसके बाद कई युवाओं को हिरासत में लिया गया और कुछ मामलों में प्रकरण दर्ज किए गए थे. सरकारी सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने समीक्षा के बाद ऐसे मामलों को वापस लेने के निर्देश दिए हैं, जो आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए थे और जिनमें गंभीर आपराधिक आरोप नहीं हैं. पुलिस विभाग को संबंधित प्रकरणों की सूची तैयार कर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया है.
* राजनीतिक और छात्र संगठनों ने किया स्वागत
सरकार के इस निर्णय का छात्र संगठनों और विभिन्न सामाजिक समूहों ने स्वागत किया है. उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है और छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना सकारात्मक कदम है. वहीं राजनीतिक हलकों में भी इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. माना जा रहा है कि इससे राज्य में आंदोलन को लेकर उत्पन्न तनाव कम होगा और सरकार तथा छात्र संगठनों के बीच संवाद की प्रक्रिया मजबूत होगी. अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि पुलिस विभाग कितनी तेजी से मामलों की समीक्षा कर उन्हें वापस लेने की प्रक्रिया पूरी करता है. राज्य सरकार के इस फैसले के बाद हजारों छात्रों और उनके परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.





