महाराष्ट्र में अब तक 28 लाख किलो नकली पनीर जब्त
55 करोड रूपये मूल्य का माल बरामद

* एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने पत्रवार्ता में दी जानकारी
* 360 से अधिक छापे, हजारों किलो मिलावटी दुग्ध उत्पाद नष्ट
मुंबई/दि.6- महाराष्ट्र में खाद्य मिलावट के खिलाफ चलाए जा रहे व्यापक अभियान के तहत खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्यभर में करोड़ों रुपये मूल्य के नकली और संदिग्ध पनीर पर शिकंजा कसा है. पूरे राज्य में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान लगभग 55 करोड़ रुपये मूल्य के 28 लाख किलोग्राम संदिग्ध एवं नकली पनीर को जब्त किया गया है. इस कार्रवाई ने दुग्ध व्यवसाय और होटल उद्योग में हड़कंप मचा दिया है. इस आशय की जानकारी खुद एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने आज मुंबई में बुलाई गई एक पत्रवार्ता में दी.
इस पत्रवार्ता में एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने बताया कि, पिछले कुछ महीनों से राज्यभर में दूध और दुग्धजन्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इसी दौरान बड़ी मात्रा में नकली, मिलावटी और एनालॉग पनीर के उत्पादन एवं वितरण का नेटवर्क सामने आया. जांच में पाया गया कि कई स्थानों पर दूध से बनने वाले वास्तविक पनीर के बजाय वनस्पति तेल, स्टार्च, दूध पाउडर तथा अन्य सस्ते पदार्थों का उपयोग कर कृत्रिम पनीर तैयार किया जा रहा था.
* 40 प्रतिशत नमूने असुरक्षित पाए गए
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे के मुताबिक, राज्यभर से एकत्र किए गए एनालॉग पनीर के नमूनों में से लगभग 40 प्रतिशत नमूने असुरक्षित या मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए. इसके बाद विभाग ने निगरानी और जांच अभियान को और तेज कर दिया. साथ ही उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने एनालॉग अथवा कृत्रिम पनीर के उत्पादन, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर एक वर्ष का प्रतिबंध लगा दिया है. एफडीए द्वारा जारी आदेश के अनुसार दूध से प्राप्त वसा के स्थान पर वनस्पति तेल या अन्य गैर-दुग्धीय तत्वों से तैयार उत्पाद को पनीर के नाम से बेचना प्रतिबंधित रहेगा. नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जेल और आर्थिक दंड सहित कठोर कार्रवाई की जा सकती है.
* होटल और रेस्टोरेंट एफडीए के निशाने पर
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, अब एफडीए ने होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों, कैटरिंग प्रतिष्ठानों और क्लाउड किचनों की विशेष जांच शुरू कर दी है. विभाग का मानना है कि कम लागत और अधिक लाभ के कारण कुछ खाद्य व्यवसायों में एनालॉग पनीर का उपयोग किया जा रहा था. अब ऐसे प्रतिष्ठानों के स्टॉक, खरीद रिकॉर्ड और खाद्य सामग्री की जांच की जा रही है.
* शुद्ध पनीर की मांग में बढ़ोतरी
इस पत्रवार्ता में यह भी बताया गया कि, एफडीए की लगातार कार्रवाई और जागरूकता अभियान का असर बाजार में दिखाई देने लगा है. दुग्ध व्यवसाय से जुड़े संगठनों के अनुसार राज्य में शुद्ध पनीर की मांग में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है. उपभोक्ता अब असली और नकली पनीर के बीच अंतर को लेकर अधिक सतर्क हो रहे हैं.
* मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान जारी
इसके साथ ही एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने स्पष्ट किया है कि नकली दूध, मिलावटी पनीर, खवा, घी और अन्य दुग्ध उत्पादों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा. विभाग ने नागरिकों से भी अपील की है कि यदि किसी खाद्य प्रतिष्ठान में संदिग्ध खाद्य पदार्थों का उपयोग होता दिखाई दे तो उसकी सूचना तुरंत एफडीए को दें. हाल के महीनों में राज्यभर में सैकड़ों छापेमारी, दर्जनों गिरफ्तारियां और कई अवैध इकाइयों को सील किया जा चुका है.