युवा डॉक्टर डॉ. खुशी मुंदड़ा का सड़क हादसे में निधन
अमरावती निवासी पुरूषोत्तम मुंदडा की पोती

* देर रात नाश्ते की तलाश में निकली थीं पीजी छात्रा डॉ. खुशी
* तेज रफ्तार कार ने मोपेड को मारी टक्कर, सेवा का सपना रह गया अधूरा
* अमरावती से लेकर नागपुर से सांगली तक शोक की लहर
नागपुर/सांगली/ दि. 7 – सफेद एप्रन पहनकर मरीजों के चेहरे पर मुस्कान लौटाने, चिकित्सा सेवा के माध्यम से समाज में बदलाव लाने और अपने परिवार का नाम रोशन करने का सपना देखने वाली 24 वर्षीय युवा डॉक्टर डॉ. खुशी पवन मुंदड़ा का जीवन एक दर्दनाक सड़क हादसे में असमय समाप्त हो गया. सांगली में बुधवार देर रात हुए भीषण सड़क दुर्घटना में उनकी मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद सहकर्मी डॉक्टर घायल हो गए. इस घटना ने न केवल एक परिवार की उम्मीदों को तोड़ दिया, बल्कि चिकित्सा क्षेत्र ने भी एक प्रतिभाशाली, संवेदनशील और समर्पित डॉक्टर को खो दिया है.
* ड्यूटी खत्म होने के बाद निकली थीं बाहर
जानकारी के अनुसार डॉ. खुशी मुंदड़ा इन दिनों मिरज स्थित मेडिकल कॉलेज में स्नातकोत्तर (पीजी) चिकित्सा शिक्षा के प्रथम वर्ष की छात्रा थीं. बुधवार रात उनकी अस्पताल ड्यूटी समाप्त हुई थी. लंबे समय तक काम करने के बाद उन्हें भूख लगी और वे अपने सहकर्मी डॉ. योगेश संतोष लढ्ढा (27), निवासी वाशिम, के साथ नाश्ता केंद्र तलाशने के लिए मोपेड से निकली थीं. रात करीब पौने दो बजे जब दोनों विश्रामबाग स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने बने पुल से गुजर रहे थे, तभी सामने से तेज रफ्तार में आ रही एक कार ने उनकी मोपेड को जोरदार टक्कर मार दी. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों सड़क पर दूर जा गिरे. गंभीर रूप से घायल डॉ. खुशी को बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने दम तोड़ दिया. वहीं डॉ. योगेश लढ्ढा घायल हो गए और उनका उपचार जारी है.
* परिवार की पहली डॉक्टर थीं खुशी
नागपुर के शिवाजीनगर स्थित दिग्विजय अपार्टमेंट में रहने वाली डॉ. खुशी, व्यवसायी पवन मुंदड़ा और राखी मुंदड़ा की पुत्री थीं. परिवार में वे पहली सदस्य थीं जिन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में प्रवेश कर डॉक्टर बनने का गौरव हासिल किया था. उनके पिता व्यवसाय के साथ-साथ सामाजिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहते हैं, जबकि उनकी माता मनोविज्ञान विषय की जानकार होने के साथ परिवार की जिम्मेदारियां संभालती हैं. परिवार में एक छोटा भाई है जो दसवीं कक्षा में अध्ययनरत है तथा बड़ी बहन मुंबई में फिजियोथेरेपी की पढ़ाई कर रही हैं. पूरे परिवार की उम्मीदें और सपने खुशी से जुड़े थे. उनके डॉक्टर बनने पर परिवार को गर्व था और आगे विशेषज्ञ चिकित्सक के रूप में उन्हें स्थापित होते देखने की सभी की इच्छा थी.
* पढ़ाई में हमेशा रहीं अव्वल
डॉ. खुशी शुरू से ही मेधावी छात्रा थीं. उन्होंने कठिन प्रतिस्पर्धा के बीच चिकित्सा शिक्षा में प्रवेश प्राप्त किया और अकोला शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय से एमबीबीएस की डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्होंने स्नातकोत्तर शिक्षा के लिए मिरज मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लिया था. सहपाठियों और शिक्षकों के अनुसार वे पढ़ाई के साथ-साथ मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार के लिए भी जानी जाती थीं. उनका लक्ष्य केवल डॉक्टर बनना नहीं था, बल्कि ग्रामीण और जरूरतमंद लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना था.
* मिलनसार और मददगार स्वभाव की थीं
परिवार के मित्र योगेशबाबू मालपाणी ने बताया कि खुशी बेहद सरल, विनम्र और मददगार स्वभाव की थीं. किसी को भी सहायता की आवश्यकता होती तो वे बिना किसी संकोच के आगे बढ़कर मदद करती थीं. उन्होंने कहा कि खुशी का सपना एक कुशल डॉक्टर बनकर समाज के लिए कुछ बड़ा करने का था. मालपाणी ने भावुक होते हुए कहा, खुशी केवल अपने परिवार की बेटी नहीं थी, बल्कि हर मिलने वाले के लिए स्नेह और सकारात्मकता का स्रोत थी. उसकी मुस्कान और व्यवहार लोगों को तुरंत अपना बना लेते थे. उसके जाने से हम सभी ने एक उज्ज्वल भविष्य वाली प्रतिभाशाली बेटी खो दी है.
* चिकित्सा जगत में शोक की लहर
घटना की खबर मिलते ही मिरज मेडिकल कॉलेज, अकोला मेडिकल कॉलेज और नागपुर के चिकित्सा क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई. साथी डॉक्टरों, विद्यार्थियों और शिक्षकों ने सोशल मीडिया के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की. कई चिकित्सकों ने कहा कि डॉ. खुशी में एक सफल विशेषज्ञ चिकित्सक बनने की सभी योग्यताएं थीं और उनका असमय जाना चिकित्सा जगत की बड़ी क्षति है.
* सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर तेज रफ्तार वाहनों और सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. देर रात होने वाली दुर्घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी चिंता का विषय बनी हुई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर के कई प्रमुख मार्गों पर वाहन चालक गति सीमा का पालन नहीं करते, जिससे गंभीर दुर्घटनाएं हो रही हैं.
* शोकाकुल माहौल में हुआ अंतिम संस्कार
डॉ. खुशी मुंदड़ा का पार्थिव शरीर कल देर रात नागपुर लाया गया और उनका अंतिम संस्कार आज शुक्रवार, 7 अगस्त को सुबह 9 बजे अंबाझरी घाट पर किया गया. अंतिम दर्शन व अंतिम संस्कार के लिए बड़ी संख्या में परिजन, मित्र, चिकित्सक और सामाजिक क्षेत्र के लोग पहुंचे. एक साधारण परिवार की असाधारण बेटी, जिसने अपने ज्ञान और सेवा भाव से समाज में पहचान बनाने का सपना देखा था, वह सपना अब अधूरा रह गया है. डॉ. खुशी मुंदड़ा का असमय निधन न केवल उनके परिवार बल्कि उन सभी लोगों के लिए गहरा आघात है, जिन्होंने उनके उज्ज्वल भविष्य की कल्पना की थी.
* मूलत: अमरावती से रहा वास्ता
बता दें कि डॉ. खुशी मुंधडा का परिवार मूलत: अमरावती निवासी है. उनके दादा पुरूषोत्तम मुंधडा कांग्रेसी विचारधारा के प्रति समर्पित समाजसेवी रहे. जिनकी राजनैतिक, सामाजिक व व्यापारिक क्षेत्र में अच्छी खासी प्रतिष्ठा रही. पुरूषोत्तम मुंधडा के सुपुत्र पवन मुंधडा आगे चलकर अपने व्यवसायिक कामकाज के चलते नागपुर शिफ्ट हो गये. जिनकी बेटी खुशी मुंधडा ने अपने परिवार को पहली डॉक्टर बनकर परिवार का नाम रोशन किया था. ऐसे में खुशी मुंधडा के असमय हुए निधन के चलते अमरावती में भी शोक की लहर देखी जा रही है.