राज्यसभा में डॉ. अनिल बोंडे के बयान पर मचा सियासी तूफान

कांग्रेस पर तीखे हमले के बाद सत्ता पक्ष के सांसदों की नारेबाजी, सदन में हुआ जोरदार हंगामा

नई दिल्ली/दि.7 – राज्यसभा में गुरुवार को उस समय राजनीतिक माहौल अचानक गर्मा गया, जब महाराष्ट्र से भाजपा सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. उनके भाषण के दौरान सत्ता पक्ष के सांसदों द्वारा कांग्रेस के खिलाफ नारे लगाए जाने से सदन में जोरदार हंगामा खड़ा हो गया और विपक्ष ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई. सदन में चर्चा के दौरान बोलते हुए डॉ. अनिल बोंडे ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले देश में भ्रष्टाचार, कोयला घोटालों और आतंकवाद को लेकर गंभीर चिंताएं थीं. इसी संदर्भ में उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि कोयला चोर, भ्रष्टाचारी और आतंकवादी कहां मिलेंगे? इसके बाद सत्ता पक्ष के कई सांसदों ने एक स्वर में जवाब दिया, कांग्रेस के दफ्तर में.
सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने इसके बाद अपने भाषण को आगे बढ़ाते हुए देशद्रोही कहां मिलेंगे, सैन्य विरोधी कहां मिलेंगे और किसान विरोधी कहां मिलेंगे जैसे प्रश्न उठाए. इन सवालों पर भी सत्ता पक्ष की ओर से कांग्रेस के दफ्तर में के नारे लगाए गए. नारेबाजी के चलते सदन का वातावरण कुछ समय के लिए बेहद तनावपूर्ण हो गया.
* उपसभापति ने किया हस्तक्षेप
स्थिति को बिगड़ता देख राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने तत्काल हस्तक्षेप किया. उन्होंने सांसदों से शांति बनाए रखने का आग्रह करते हुए कहा कि सदन की कार्यवाही नियमों के अनुसार संचालित होनी चाहिए और रिकॉर्ड पर केवल सदस्य द्वारा दिए गए आधिकारिक वक्तव्य ही जाएंगे. उन्होंने डॉ. बोंडे को भी मूल विषय पर केंद्रित रहने की सलाह दी.
* कांग्रेस ने जताई कड़ी आपत्ति
भाजपा सांसदों की नारेबाजी पर कांग्रेस सदस्यों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की. विपक्षी सांसदों ने इसे संसदीय परंपराओं के विपरीत बताते हुए विरोध दर्ज कराया. कांग्रेस का कहना था कि किसी राष्ट्रीय राजनीतिक दल के खिलाफ इस प्रकार की टिप्पणियां और नारे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के अनुरूप नहीं हैं.
* सांसद डॉ. बोंडे की टिप्पणी बनी चर्चा का विषय
राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान सांसद डॉ. अनिल बोंडे की टिप्पणियां और उसके बाद हुई नारेबाजी पूरे दिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी रहीं. भाजपा सांसदों ने कांग्रेस की नीतियों और पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए अपने आरोपों को दोहराया, जबकि विपक्ष ने इसे राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की पराकाष्ठा बताया. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संसद के मानसून सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी तीखे टकराव के बीच यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में भी राजनीतिक बहस का केंद्र बना रह सकता है.

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