दो साल में 22 बाघ लापता!

देश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व में हड़कंप

* एनटीसीए ने जारी किया हाई अलर्ट
* वाघों की तस्करी की आशंका से देशभर के टाइगर रिजर्व सतर्क
* नागार्जुनसागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व से जुड़े मामले ने वन्यजीव संरक्षण तंत्र की बढ़ाई चिंता
वर्धा/नई दिल्ली/दि.7- देश में बाघ संरक्षण को लेकर एक बेहद चिंताजनक और सनसनीखेज मामला सामने आया है. आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध नागार्जुनसागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व से पिछले दो वर्षों में 22 बाघों के रहस्यमय ढंग से लापता होने की जानकारी ने वन्यजीव संरक्षण एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने देशभर के टाइगर रिजर्वों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश जारी किए हैं.
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इतने बड़े पैमाने पर बाघ गायब हुए हैं, तो इसके पीछे शिकार, अवैध तस्करी अथवा निगरानी तंत्र की गंभीर खामियां हो सकती हैं. इसी आशंका के चलते एनटीसीए ने पूरे देश में सतर्कता बढ़ाने का फैसला किया है.
* देश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व में रहस्यमय घटनाक्रम
नागार्जुनसागर-श्रीशैलम टाइगर रिजर्व भारत के सबसे बड़े बाघ अभयारण्यों में गिना जाता है. यह आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के विशाल वन क्षेत्र में फैला हुआ है और यहां बड़ी संख्या में बाघों का प्राकृतिक आवास है. हाल ही में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार पिछले दो वर्षों के दौरान इस रिजर्व से 22 बाघों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिल पाया है. उनकी मौजूदगी के संकेत अचानक समाप्त हो गए, जिससे वन विभाग और संरक्षण एजेंसियों में चिंता बढ़ गई है. बताया जा रहा है कि बाघों की संख्या में असामान्य गिरावट के संकेत मिलने के बाद इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू की गई है.
* अंतरराष्ट्रीय तस्करी के एंगल की जांच
एनटीसीए को आशंका है कि इस मामले का संबंध अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी गिरोहों से हो सकता है. बाघों की खाल, हड्डियों, दांतों और अन्य अंगों की चीन, म्यांमार, कंबोडिया सहित दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में अवैध बाजारों में भारी मांग है. वन्यजीव अपराध नियंत्रण एजेंसियों का मानना है कि संगठित तस्कर गिरोह भारतीय जंगलों को निशाना बना सकते हैं. यही कारण है कि इस मामले को केवल स्थानीय घटना नहीं, बल्कि संभावित अंतरराष्ट्रीय अपराध के रूप में भी देखा जा रहा है.
* एनटीसीए ने जारी किए सख्त निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए एनटीसीए के अधिकारियों ने देश के सभी राज्यों के मुख्य वन्यजीव संरक्षकों और टाइगर रिजर्व निदेशकों को विशेष निर्देश जारी किए हैं. निर्देशों के अनुसार, संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई जाए. संभावित तस्करी मार्गों पर 24 घंटे निगरानी रखी जाए. सीमावर्ती क्षेत्रों के चेकपोस्ट मजबूत किए जाएं. संदिग्ध गतिविधियों की तत्काल सूचना साझा की जाए. अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क पर विशेष नजर रखी जाए. वन्यजीव अपराधों में शामिल आरोपियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए.
* महाराष्ट्र समेत सभी राज्यों को सतर्कता के आदेश
महाराष्ट्र के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एम. श्रीनिवास रेड्डी ने इस मामले पर विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार किया, लेकिन यह स्वीकार किया कि एनटीसीए की ओर से सतर्कता बढ़ाने संबंधी निर्देश प्राप्त हुए हैं. सूत्रों के अनुसार महाराष्ट्र के मेलघाट, ताडोबा-अंधारी, पेंच, नवेगांव-नागझिरा और बोर जैसे प्रमुख टाइगर रिजर्वों में भी निगरानी व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी गई है.
* हर बाघ की मौत को माना जाएगा संदिग्ध
एनटीसीए ने स्पष्ट किया है कि अब किसी भी बाघ की मृत्यु को प्रारंभिक स्तर पर संदिग्ध माना जाएगा और उसकी जांच शिकार की आशंका के दृष्टिकोण से की जाएगी. मृत बाघ मिलने पर तत्काल पोस्टमार्टम कराया जाएगा. 24 घंटे के भीतर प्राथमिक रिपोर्ट एनटीसीए को भेजनी होगी. वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो को सूचना दी जाएगी. आवश्यकता पड़ने पर फॉरेंसिक विशेषज्ञों, साइबर जांच टीमों और स्निफर डॉग्स की सहायता ली जाएगी.
* बढ़ेगी तकनीकी निगरानी
वन विभाग को संवेदनशील क्षेत्रों की मैपिंग करने, जलस्रोतों, बिजली लाइनों, वन सीमाओं और संभावित शिकार स्थलों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं. जीपीएस आधारित गश्त, कैमरा ट्रैप, ड्रोन सर्विलांस और डिजिटल ट्रैकिंग जैसी तकनीकों का उपयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है.
* मासिक समीक्षा होगी अनिवार्य
बाघ संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए जिला स्तर पर टाइगर सेल की मासिक बैठक तथा विभागीय स्तर पर प्रत्येक तीन माह में समीक्षा बैठक आयोजित करना अनिवार्य किया गया है. इन बैठकों में संदिग्ध गतिविधियों, तस्करी मार्गों, वन्यजीव अपराधों और संरक्षण उपायों की समीक्षा की जाएगी. साथ ही पड़ोसी राज्यों के साथ खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान भी बढ़ाया जाएगा.
* संरक्षण तंत्र के सामने बड़ी चुनौती
भारत में विश्व के लगभग 70 प्रतिशत जंगली बाघ पाए जाते हैं. ऐसे में किसी भी बड़े टाइगर रिजर्व से 22 बाघों के गायब होने की खबर न केवल वन विभाग बल्कि पूरे संरक्षण तंत्र के लिए गंभीर चेतावनी मानी जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में शिकार या तस्करी की पुष्टि होती है, तो यह देश की वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित होगा. फिलहाल एनटीसीए की टीम मामले की गहन जांच में जुटी है और पूरे देश के टाइगर रिजर्वों में निगरानी बढ़ा दी गई है.
बाघों की रहस्यमय गुमशुदगी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि देश की जैव विविधता और वन्यजीव संपदा को संगठित अपराधों से बचाने के लिए संरक्षण तंत्र को और कितना मजबूत करने की आवश्यकता है.

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