वैभव सूर्यवंशी ने टेस्ट क्रिकेट की तैयारी के बीच लिया जंगल सफारी का रोमांच
बाघ देखने की जिद ने बढ़ाई उत्सुकता, वैभव सूर्यवंशी का बोर टाइगर रिजर्व दौरा चर्चा में

* तलेगांव एचपीसी में कर रहे दुलीप ट्रॉफी की तैयारी, मैदान पर जमकर बहा रहे पसीना
* फुर्सत मिलते ही निसर्ग के सानिध्य में रहने पहुंचे व्याघ्र अभयारण्य में
अमरावती/वर्धा/दि.8 – टी-20 क्रिकेट में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से देशभर में पहचान बना चुके 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी इन दिनों अपने क्रिकेट करियर के अगले बड़े लक्ष्य की तैयारी में जुटे हैं. जिम्बाब्वे दौरे से लौटने के बाद उन्होंने अमरावती-नागपुर मार्ग पर तलेगांव स्थित राजस्थान रॉयल्स हाई परफॉर्मेंस सेंटर (एचपीसी) में लाल गेंद से अभ्यास शुरू कर दिया है. आगामी घरेलू सत्र और संभावित दलीप ट्रॉफी को ध्यान में रखते हुए वैभव टेस्ट क्रिकेट की बारीकियों पर मेहनत कर रहे हैं. इसी बीच उन्होंने वर्धा जिले के बोर टाइगर रिजर्व में रोमांचक सफारी का आनंद लेकर सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया.
राजस्थान रॉयल्स के प्रशिक्षण शिविर के दौरान वैभव सूर्यवंशी अपने साथी खिलाड़ियों शुभम दुबे, रवि सिंह और सुशांत मिश्रा तथा टीम प्रबंधन के सदस्यों के साथ बोर टाइगर रिजर्व पहुंचे. वन विभाग के अधिकारियों ने खिलाड़ियों का स्वागत किया और उन्हें जंगल भ्रमण कराया. सफारी के दौरान खिलाड़ियों ने जंगल की प्राकृतिक सुंदरता का भरपूर आनंद लिया, लेकिन वैभव की निगाहें लगातार एक ही चीज तलाश रही थीं-जंगल के राजा बाघ का दीदार.
* बाघ की तलाश में रोमांचक सफारी
सफारी के दौरान खिलाड़ियों को विशाल तेंदुआ, भालू, सांभर, चीतल, मोर और कई अन्य वन्यजीव दिखाई दिए. मानसून की हरियाली, जलाशयों की मनमोहक छटा और पक्षियों की चहचहाहट ने पूरे दल को मंत्रमुग्ध कर दिया. खिलाड़ियों ने वन्यजीवों और प्रकृति की तस्वीरें भी जमकर कैमरे में कैद कीं. हालांकि, जिस बाघ को देखने की उत्सुकता लेकर वैभव जंगल पहुंचे थे, वह कहीं नजर नहीं आया. सफारी समाप्ति की ओर बढ़ रही थी, लेकिन बाघ के दर्शन नहीं हुए. ऐसे में वैभव ने मजाकिया अंदाज में कहा कि बाघ देखे बिना वापस नहीं जाएंगे. उनकी यह जिद कुछ समय के लिए वन अधिकारियों के लिए चुनौती बन गई.
* वन अधिकारियों ने समझाई नियमों की अहमियत
शाम ढलने लगी थी और सफारी का निर्धारित समय भी समाप्त होने वाला था. वन अधिकारियों ने खिलाड़ियों को समझाया कि अंधेरा होने के बाद जंगल में रुकना सुरक्षा और नियमों की दृष्टि से उचित नहीं है. अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि अगली बार सुबह की सफारी में आने पर बाघ दिखाई देने की संभावना अधिक रहेगी. काफी समझाइश के बाद वैभव और उनके साथी लौटने के लिए तैयार हुए. दिलचस्प बात यह रही कि खिलाड़ियों का काफिला जंगल से बाहर निकलने के लगभग 15 मिनट बाद उसी क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी दर्ज की गई. यदि वे थोड़ी देर और रुक पाते तो संभवतः उनका सपना पूरा हो जाता. हालांकि वन नियमों के कारण ऐसा संभव नहीं था.
* तलेगांव में लाल गेंद से जमकर बहा रहे पसीना
दूसरी ओर, क्रिकेट के मोर्चे पर वैभव पूरी गंभीरता से तैयारी में जुटे हुए हैं. राजस्थान रॉयल्स के तलेगांव स्थित हाई परफॉर्मेंस सेंटर में चल रहे 10 दिवसीय विशेष शिविर में वे लाल गेंद से बल्लेबाजी का अभ्यास कर रहे हैं. क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि वैभव अब केवल सीमित ओवरों के क्रिकेट तक खुद को सीमित नहीं रखना चाहते, बल्कि उनकी नजर भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाने पर भी है. इस शिविर में वैभव के साथ तुषार देशपांडे, संदीप शर्मा, शुभम दुबे, रवि सिंह और सुशांत मिश्रा भी अभ्यास कर रहे हैं. भारतीय टीम के पूर्व बल्लेबाजी कोच और राजस्थान रॉयल्स के सहायक प्रशिक्षक विक्रम राठौड़ खिलाड़ियों को तकनीकी प्रशिक्षण दे रहे हैं.
राजस्थान रॉयल्स के संचालक रोमी भिंडर के अनुसार, अकादमी में खिलाड़ियों की तकनीकी दक्षता, फिटनेस, कार्यभार प्रबंधन, प्रदर्शन विश्लेषण और रिकवरी पर विशेष ध्यान दिया जाता है, ताकि वे घरेलू क्रिकेट सत्र के लिए पूरी तरह तैयार होकर मैदान पर उतर सकें.
* क्रिकेट और प्रकृति-दोनों के प्रति लगाव
क्रिकेट मैदान पर चौके-छक्कों की बरसात करने वाले वैभव सूर्यवंशी का यह दूसरा रूप भी सामने आया, जहां उन्होंने प्रकृति और वन्यजीवन के प्रति अपना लगाव दिखाया. बाघ भले ही उनकी आंखों के सामने नहीं आया, लेकिन बोर टाइगर रिजर्व की हरियाली, वन्यजीवों की दुनिया और रोमांचक सफारी ने उनकी इस यात्रा को यादगार बना दिया. अब एक ओर जहां वैभव लाल गेंद के साथ अपने क्रिकेट भविष्य को संवारने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर बोर टाइगर रिजर्व की यह रोमांचक यात्रा भी उनके प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है.





