हल्द्वानी के कथित शुद्धिकरण समारोह की निष्पक्ष जांच की मांग
आरक्षण उपवर्गीकरण विरोधी कृति समिति ने राष्ट्रपति के नाम जिलाधीश को सौंपा ज्ञापन

अमरावती/दि.17 – हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की बैठक के बाद कथित रूप से हुए ‘शुद्धिकरण समारोह’ को लेकर संविधान-प्रेमी नागरिकों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. आरक्षण उपवर्गीकरण विरोधी कृति समिति ने राष्ट्रपति के नाम जिलाधीश को इस बाबत ज्ञापन सौंपा.
ज्ञापन में समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच कराई जाए तथा कथित समारोह में शामिल लोगों और आयोजकों की भूमिका की भी जांच हो. यदि जांच में किसी प्रकार के कानून के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ लागू सभी कानूनी प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाए. उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से सार्वजनिक स्थानों पर जातिगत भेदभाव, छुआछूत अथवा समाज में सामाजिक दरार पैदा करने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है. साथ ही भारतीय संविधान में निहित समानता, भाईचारा, सामाजिक न्याय और छुआछूत के उन्मूलन के मूल्यों को प्रभावी रूप से लागू करने पर जोर दिया गया है.
समिति ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं. उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति या आयोजक की भूमिका कानून के विरुद्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए. संविधान-प्रेमी नागरिकों ने सरकार से मामले को तत्काल संज्ञान में लेकर संबंधित जांच एजेंसियों और प्रशासन को आवश्यक निर्देश देने का विनम्र अनुरोध किया है. ज्ञापन सौंपने वालों में प्रा. जगदीश गोवर्धन, रमेश कटके, रविकांत गवई, नयन मोंढे, प्राचार्य डॉ. गोपीचंद मेश्राम, डॉ. रवि जुमले, साहित्यिक शिवा प्रधान, प्रवीण मनोहर, डॉ. संजय खडसे, एड. खडसे, सुदाम सोनले, रमेश रामटेके, पंजाब मडावी, राजेश वानखडे, सुरेश तायडे सहित अन्यों का समावेश था.





