मनपा का मनुष्यबल ठेका फिर अधर में लटका!

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार की सुनवाई टली

* अब 21 सितंबर को होगी अंतिम सुनवाई
* 650 कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़ा मामला
* करोड़ों के ठेके पर कई महीनों से जारी कानूनी खींचतान
अमरावती/दि.2 – अमरावती महानगरपालिका में मनुष्यबल उपलब्ध कराने को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर न्यायालय में अटक गया है. करोड़ों रुपये के इस ठेके को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जारी सुनवाई मंगलवार को नहीं हो सकी. अब मामले की अंतिम सुनवाई 21 सितंबर को निर्धारित की गई है. इसके चलते मनपा प्रशासन के सामने फिलहाल मनुष्यबल की व्यवस्था को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और पुराने ठेकेदार के माध्यम से ही सेवाएं जारी रखने की संभावना बढ़ गई है.
मनपा के विभिन्न विभागों में आवश्यक मनुष्यबल उपलब्ध कराने के लिए निकाली गई निविदा को लेकर कई महीनों से विवाद चल रहा है. पहले निविदा प्रक्रिया, दरों और पात्रता को लेकर सवाल उठे और मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा. हाईकोर्ट के निर्णय के बाद भी विवाद समाप्त नहीं हुआ और अब मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच चुका है.
बता दे कि, मनपा ने कुछ समय पहले करीब 650 मनुष्यबल कर्मचारियों की सेवा उपलब्ध कराने के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू की थी. इस ठेके की अनुमानित कीमत लगभग 61.17 करोड़ रुपये, जीएसटी सहित बताई गई थी. मनपा के लिए यह ठेका इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि विभिन्न विभागों में बड़ी संख्या में कर्मचारी ठेका पद्धति पर कार्यरत हैं और नियमित प्रशासनिक कामकाज इन सेवाओं पर निर्भर है. निविदा प्रक्रिया के दौरान प्राप्त दरों को लेकर विवाद पैदा हुआ. सरकारी निर्देशों के अनुसार लगभग 3.85 करोड़ रुपये के कोटेशन की दर का संदर्भ होने के बावजूद तत्कालीन आयुक्त ने सबसे कम दर वाले प्रस्ताव के बजाय 4 रुपये की दर रखने वाली कंपनी को ठेका देने का निर्णय लिया था. इस निर्णय को लेकर भी सवाल उठे थे. ठेका प्रक्रिया को लेकर उठे विवाद के बाद मामला उच्च न्यायालय में पहुंचा था. वहां संबंधित ठेका प्रक्रिया को लेकर निर्णय हुआ और मनपा की ओर से आगे की प्रक्रिया का रास्ता साफ होने की उम्मीद थी. लेकिन विवाद यहीं समाप्त नहीं हुआ. पिछले सप्ताह संबंधित पक्ष द्वारा सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाए जाने के बाद मामला फिर कानूनी पेंच में फंस गया. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू होने के कारण मनपा प्रशासन को अंतिम निर्णय का इंतजार करना पड़ रहा है.
सभी की नजर मंगलवार को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर थी. उम्मीद थी कि सुनवाई के दौरान मनुष्यबल ठेके को लेकर स्थिति कुछ हद तक स्पष्ट होगी. लेकिन सुनवाई टल जाने के कारण मनपा को एक बार फिर इंतजार करना पड़ेगा. अब 21 सितंबर को अंतिम सुनवाई निर्धारित की गई है. इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नया ठेका लागू होगा या मौजूदा व्यवस्था को लेकर अदालत क्या निर्देश देती है.
* पुराने ठेकेदार की फिर हो सकती है वापसी!
नए ठेके पर न्यायालयीन रोक और सुनवाई लंबित रहने के कारण मनपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने दैनिक कामकाज के लिए आवश्यक मनुष्यबल उपलब्ध कराना है. ऐसे में पुराने ठेकेदार के माध्यम से ही मनुष्यबल की आपूर्ति जारी रखने का विकल्प सामने आया है. यदि पुराने ठेकेदार के माध्यम से सेवाएं जारी रखी जाती हैं तो मनपा के कामकाज में तत्काल कोई बड़ा व्यवधान आने से बचा जा सकता है. हालांकि, इससे ठेके को लेकर चल रहा मूल विवाद समाप्त नहीं होगा और अंतिम निर्णय के लिए सभी को 21 सितंबर तक प्रतीक्षा करनी होगी.
* मनपा के कामकाज पर भी पड़ सकता है असर
मनुष्यबल का यह ठेका केवल निविदा और ठेकेदार के बीच का विवाद नहीं रह गया है. इसका सीधा असर मनपा के विभिन्न विभागों के रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ सकता है. सफाई, कार्यालयीन कामकाज, तकनीकी सेवाओं, विभिन्न विभागों में सहायक कार्य और अन्य आवश्यक सेवाओं के लिए ठेका कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है. ऐसे में यदि ठेके को लेकर स्थिति लंबे समय तक स्पष्ट नहीं होती है, तो मनपा प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ सकती है. दूसरी ओर, लंबे समय तक कानूनी विवाद जारी रहने से मनपा पर आर्थिक और प्रशासनिक दबाव भी बढ़ने की संभावना है.
* करोड़ों के ठेके पर फैसले का इंतजार
मनुष्यबल ठेके को लेकर पहले निविदा प्रक्रिया, फिर हाईकोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा विवाद अमरावती मनपा में लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है. करोड़ों रुपये के इस ठेके में पारदर्शिता, निविदा की शर्तों, दरों और पात्रता को लेकर उठे सवालों का अंतिम समाधान अब सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से ही होने की उम्मीद है. फिलहाल मंगलवार की सुनवाई टलने के बाद 21 सितंबर की तारीख महत्वपूर्ण बन गई है. मनपा प्रशासन, ठेका कंपनियों और बड़ी संख्या में मनुष्यबल कर्मचारियों की नजर अब इसी सुनवाई पर टिकी हुई है. तब तक पुराने ठेकेदार के माध्यम से व्यवस्था संभालने का विकल्प ही मनपा के सामने सबसे व्यावहारिक रास्ता दिखाई दे रहा है.

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