केंद्र की मदद का इंतजार नहीं, किसानों को तत्काल राहत देगी सरकार
कई जिलों में सूखे जैसे हालात पर बोले सीएम फडणवीस

* सप्ताहभर में प्राथमिक आकलन, 5 अक्टूबर के बाद पंचनामे
* चारा, पेयजल और अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था
नागपुर/दि.19- महाराष्ट्र के कई जिलों में बारिश के लंबे अंतराल से खरीफ फसलों पर संकट गहराने और उत्पादन में भारी कमी की आशंका के बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किसानों को तत्काल राहत देने का आश्वासन दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र से राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की सहायता मिलने का इंतजार किए बिना राज्य सरकार अपने संसाधनों से किसानों को आर्थिक और अन्य आवश्यक मदद देगी. अगले सप्ताह तक सूखे जैसे हालात का प्राथमिक आकलन किया जाएगा. इसके बाद प्रभावित क्षेत्रों में पंचनामे कराकर राहत की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी.
सीएम फडणवीस ने नागपुर में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बारिश में लंबे अंतराल के कारण कई क्षेत्रों में खरीफ फसलें खराब हो रही हैं और कई जगह उत्पादन काफी कम रहने की स्थिति है. मंत्रिमंडल की बैठक में इस स्थिति पर चर्चा की गई है. सभी मंत्रियों को अपने-अपने जिलों में जाकर स्थिति का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं. सप्ताहभर में प्राथमिक रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ से सहायता प्राप्त करने के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार 5 अक्टूबर के बाद प्रत्यक्ष पंचनामे करना आवश्यक है. पंचनामों के आधार पर केंद्र सरकार को सहायता का प्रस्ताव भेजा जाएगा और निर्धारित प्रक्रिया के तहत केंद्रीय दल भी स्थिति का जायजा ले सकता है.
हालांकि, मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि केंद्र की प्रक्रिया पूरी होने तक राज्य सरकार किसानों को राहत देने से नहीं रुकेगी. राज्य अपने स्तर पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराएगा. उन्होंने कहा कि अकाल संबंधी सरकारी नियम और जीआर पहले से निर्धारित हैं तथा एनडीआरएफ की सहायता के लिए उनका पालन करना जरूरी है. मुख्यमंत्री फडणवीस के अनुसार, किसानों के लिए पेयजल और चारे की व्यवस्था की गई है. अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए पहले से ही वैरण विकास कार्यक्रम के तहत चारे की लागवड़ की गई थी. जिन क्षेत्रों में चारे की कमी होगी, वहां इसकी आपूर्ति की जाएगी. जिन किसानों के कुओं में पानी उपलब्ध है, उनकी फसलें बचाने के लिए शाम के समय अतिरिक्त बिजली देने की व्यवस्था की गई है. सिंगल फेज के कारण जिन क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बंद थी, वहां भी बिजली उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं. पानी उपलब्ध रहने वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त बिजली के जरिए फसलों को बचाने का प्रयास किया जाएगा.
मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि किसानों की कर्जमाफी के तहत अब तक तीन सूचियां तैयार की जा चुकी हैं. शेष पात्र किसानों की सूचियां तेजी से पूरी करने के निर्देश संबंधित विभागों को दिए गए हैं. उन्होंने बताया कि राज्य के बड़े बांधों में फिलहाल संतोषजनक जलसाठा है, लेकिन मराठवाड़ा के छोटे बांधों में पानी कम है. भविष्य में पेयजल संकट उत्पन्न न हो, इसलिए उपलब्ध पानी को सुरक्षित रखा जा रहा है. अगले बारिश के आकलन के बाद जल उपयोग के संबंध में आगे का निर्णय लिया जाएगा. जहां पर्याप्त पानी उपलब्ध है, वहां आगामी रबी मौसम की योजना भी बनाई जाएगी.

* सूखा समीक्षा बैठक में काजू-बादाम परोसने पर विवाद
जहां एक ओर राज्य सरकार द्वारा सूखा प्रभावित किसानों को राहत देने की तैयारियां कर रही है, वही दूसरी ओर नांदेड में आयोजित सूखा समीक्षा बैठक के दौरान जनप्रतिनिधियों को काजू-बादाम परोसे जाने का मामला चर्चा में आ गया. नांदेड के जिलाधिकारी कार्यालय स्थित नियोजन भवन में कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे की अध्यक्षता में सूखा-सदृश स्थिति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी. बैठक में मंत्री, सांसद, विधायक और अधिकारी मौजूद थे. बैठक के दौरान काजू-बादाम सहित ड्रायफ्रूट परोसे जाने के दृश्य सामने आए. कुछ जनप्रतिनिधि इन्हें खाते भी दिखाई दिए. वीडियो सामने आने के बाद इस व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे. रिपोर्ट के अनुसार, राज्यमंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकर द्वारा ध्यान दिलाए जाने के बाद प्लेटें हटा दी गईं.
नांदेड की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने प्रशासन को संवेदनशीलता बरतने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि सरकारी बैठकों में प्रशासन की ओर से काजू-बादाम जैसे खाद्य पदार्थ परोसने की एक सामान्य पद्धति रही है, लेकिन सूखे और किसानों की गंभीर समस्याओं पर चर्चा वाली बैठक में ऐसी व्यवस्था से बचना चाहिए. सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने भी इस मामले पर अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारियों को यह समझना चाहिए कि बैठक किस विषय पर हो रही है और उसी के अनुरूप व्यवस्थाएं करनी चाहिए. एक ओर राज्य सरकार किसानों के लिए पंचनामे, राहत, चारा, पेयजल और अतिरिक्त बिजली की तैयारियों का दावा कर रही है, वहीं नांदेड की समीक्षा बैठक में ड्रायफ्रूट परोसे जाने की घटना ने सरकारी संवेदनशीलता को लेकर चर्चा छेड़ दी है.





