पोषण अभियान के तहत रसोइये भूखे, अप्रैल से नहीं मिला मानदेय

हर दिन छह घंटे काम, फिर भी महज 2,500 रुपये मानदेय

नवरात्रि से पहले भुगतान की उम्मीद
अमरावती/दि.6 – स्कूलों में प्रधानमंत्री पोषण अभियान के तहत लाखों विद्यार्थियों के लिए रोजाना भोजन तैयार करने वाले रसोइयों और सहायकों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. जिले के स्कूलों में काम करने वाले इन कर्मचारियों को अप्रैल-2026 से मानदेय नहीं मिलने की शिकायत है. पहले से ही बेहद कम मानदेय पर काम करने वाले इन कर्मचारियों को कई महीनों से भुगतान नहीं होने के कारण परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है. अब नवरात्रि शुरू होने वाली है और कर्मचारियों को उम्मीद है कि त्योहार से पहले उनका बकाया मानदेय मिल जाएगा.
* छह घंटे काम, मानदेय महज 2,500 रुपये
स्कूल पोषण आहार योजना में काम करने वाले रसोइयों और सहायकों को प्रतिदिन करीब 83 रुपये अथवा महीने में 2,500 रुपये मानदेय दिया जाता है. कर्मचारियों का कहना है कि इतनी कम राशि में परिवार का खर्च चलाना पहले ही मुश्किल है. ऊपर से कई महीनों तक मानदेय नहीं मिलने के कारण उन्हें कर्ज लेकर गुजारा करना पड़ रहा है. इन कर्मचारियों को स्कूल में प्रतिदिन करीब छह घंटे अलग-अलग जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं. भोजन तैयार करने से लेकर अन्य संबंधित कामों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है.
* अप्रैल, जून से सितंबर तक का भुगतान अटका
जानकारी के अनुसार, रसोइयों और सहायकों को अप्रैल, जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर का मानदेय नहीं मिला है. लगातार कई महीनों से भुगतान लंबित रहने के कारण कर्मचारियों में नाराजगी है. नवरात्रि जैसे महत्वपूर्ण त्योहार के समय भी यदि बकाया मानदेय नहीं मिला तो आर्थिक परेशानी और बढ़ने की आशंका है.
* 2,270 स्कूलों में 2.20 लाख विद्यार्थियों को भोजन
जिले के करीब 2,270 स्कूलों में 2,20,565 विद्यार्थियों को रोजाना पोषण आहार उपलब्ध कराया जाता है. इनमें कक्षा पहली से पांचवीं तक के करीब 1,37,375 विद्यार्थी तथा कक्षा छठी से आठवीं तक के करीब 83,190 विद्यार्थी शामिल हैं. इन विद्यार्थियों के लिए भोजन तैयार करने की जिम्मेदारी संभालने वाले हजारों रसोइये और सहायक योजना के महत्वपूर्ण आधार हैं.
* जिले में 4,229 रसोइये और सहायक
जिले की 14 तहसीलों के विभिन्न स्कूलों में करीब 4,229 रसोइये और सहायक कार्यरत हैं. इन कर्मचारियों में गरीब परिवारों की महिलाएं, विधवा, तलाकशुदा, अनुसूचित जाति, ओबीसी, अल्पसंख्यक तथा अन्य जरूरतमंद लोग शामिल हैं. कम मानदेय के बावजूद वे नियमित रूप से विद्यार्थियों के लिए भोजन तैयार करने का काम कर रहे हैं.
* ‘स्पर्श’ प्रणाली में देरी बनी भुगतान में बाधा
सरकारी निर्देशों के अनुसार पोषण आहार कर्मचारियों के मानदेय के वितरण के लिए ‘स्पर्श’ डिजिटल प्रणाली लागू की गई है. बताया जा रहा है कि इस प्रणाली के तहत कर्मचारियों की आवश्यक जानकारी दर्ज करने और पूरी प्रक्रिया पूरी करने में देरी हुई. इसी कारण मानदेय का भुगतान अटक गया है. ‘स्पर्श’ प्रणाली का उद्देश्य केंद्र और राज्य प्रायोजित योजनाओं के तहत मिलने वाली राशि के वितरण में पारदर्शिता लाना है. इसके लिए संबंधित कर्मचारियों की आवश्यक जानकारी सिस्टम में दर्ज करना अनिवार्य है.
* ‘बच्चों का पेट भरने वाले खुद भूखे’
पोषण आहार कर्मचारी संगठन के जिला अध्यक्ष हिम्मत गवई ने कहा कि चार महीने से अधिक समय से मानदेय नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो गया है. उन्होंने सरकार से बकाया मानदेय तत्काल जारी करने की मांग की है. अब नवरात्रि से पहले इन कर्मचारियों को उनका बकाया मानदेय मिलता है या नहीं, इस पर जिले के हजारों रसोइयों और सहायकों की नजरें टिकी हैं.

 

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