जब तक संगीत प्रभु को विनियोग न हो वह किसी काम का नहीं

पू.गो.पा. हरिराय जी महोदय श्री के वचनामृत

* अष्टसखा कथा महोत्सव का पंचम दिवस : श्री गोविंद स्वामी
अमरावती /दि.6- अष्टसखा चरित्रामृत कथा महोत्सव के पंचम दिवस पर प.पू. गोवास्मी 108 श्री हरिरायजी महोदयश्री ने हरिचंद मंगलम तापडिया मॉल के सामने स्थित ब्रजधाम में अष्टसखा श्री गोविंद स्वामीजी के जीवन चरित्र पर वचनामृत किया. 108 प.पू. गोस्वामी श्री पुरूषोत्तमलालजी की आज्ञा नुसार आयोजित इस महोत्सव के पंचम दिवस के महाप्रसाद उत्सवी श्रीमती शकुंतला गोपीकिसनजी सादाणी परिवार से सुरेशकुमार सादानी व विपुलभाई प्रभुदासभाई नदियाना परिवार बडनेरा तथा उत्सव मनोरथी श्रीमती शांताबाई गोपीकिसनजी बाहेती परिवार भी ओर से डॉ. घनश्याम बाहेती, राधा बाहेती तथा श्री भीमजियानी परिवार के सदस्यों ने प.पू. 108 आचार्य पीठाधीश हरिरायजी महोदयश्री का पारिवारिक स्वागत किया. इससे पूर्व प.पू. जे.जे. ने आचार्य वल्लभाचार्य जी को अभिवादन कर पूजन किया. श्री गोवर्धननाथ हवेली के मुखियाजी व प्रबंधक पांडेजी ने गोस्वामीजी को पुष्पमालार्पण कर आशीर्वाद लिया.
प्रतिदिन के अनुसार दिपाली करवा ने प्रस्तावना देते हुए विगत चार दिनों की कथा का पुनरावलोकन करवाया. मनोरथीयों को दीपाली आशीष करवा ने सम्मान, पुष्पमालार्पण हेतु मंच पर आमंत्रित किया. सोरठिया समाज वर्धा से पधारे वैष्णवों ने भी क्रम को आगे बढाया. गोविंद स्वामी ने 252 पदों की रचना की थी. उन पदों के को बहूत ढूंढा गया किंतु प्रगट नहीं हो सके. वे पद भूतल पर प्रकट होने नहीं थे. अंत: उन्हें श्री यमुनाजी में पधरा दिए गए, ऐसा वर्णन आता है. वि.क्र. 1562 में गोविंद स्वामी का जन्म हुआ था. गोविंद स्वामीजी की बहन कनिका श्री गुंसाईजी की सेविका थी. वल्लभ का एकरूप सदा प्रभु की सेवा में रहता है. आपने आगे कहा कि जो ज्ञानशून्य हो उसको भी ज्ञान की प्रति करा दे, उसे विठ्ठल कहते हैं. गोविंद स्वामी श्री गोवर्धनजी के पास गोकुल में लंबे समय तक रहे. गोविंद स्वामीने अपने जीवन में बहुत परिश्रम किए थे. यमुनाजी में पैर नहीं रखते थे. यह पद गाया.
श्यामसंग श्याम बह रही श्री यमुने
एक वैष्णव दूसरे वैष्णव से ही जयश्रीकृष्ण कर सकता है. जिसके हदय में कृष्ण ही नहीं बसता उससे कृष्ण के नाम का बखान कैसे कर सकते हैं. आपने बताया कि श्री यमुनाजी का एक नाम कृष्ण रूपा है.
गोविंद स्वामी को पाग बांधने की कला प्राप्त थी. सबके लिए धर्म की परिभाषा अलग है. परिस्थितिनुसार सेवाधर्म बदल जाता है. जिसने अपने संसार का अंतकर दिया वहीं संत कहलाया है. हम संत नहीं है, हम आचार्य है. हम बैरागी नहीं है. गोविंदस्वामी का जीवन परीक्षामय रहा.
मंगला का पद -यशोदाजी कहती है-
हो बल थल जाहूँ कलेवु लाल की जै
जब तक संगीत प्रभु को विनियोग न हो वह किसी काम का नहीं रहता. तानसेन का उदाहरण देते हुए आपने समझाया. इतिहास में वर्णन है कि तानसेन को भी श्रीगुंसाईजी ने कंठी पहनाई थी. ब्रम्हसंबंध नहीं दिया था.
हमें कीर्तन करना आए न आए भाव महत्व रखता है. आपने आगे बताया कि अष्ठाक्षर मंत्र श्रीकृष्ण शरणं मम: कहीं भी मंत्रजाप कर सकते हैं. परिस्थितिनुसार आवाज रहे. होली के प्रसंग पर गाया पद-
‘श्री गोवर्धनराय लाला, तेरे चंचल नयन विशाला’
श्री गुंसाईजी को गोविंद स्वामी ने वरदान मांगा. मुझे दिव्य देह देना, नित्य रास के दर्शन करू. श्री गोविंद स्वामी ने गिरिराजजी से यह मांग कि, श्री गुंसाईजी और प्रभु कभी बिछडे नहीं. यह पद गाया-
‘ऐसी प्रीति कबहू नहीं देखी’
इसके बाद भी गोविंद स्वामी लीला में पधार गए.
सैकडों की संख्या में बडनेरा रोड पर स्थित हरिचंद मंगलम कथा स्थल पर वैष्णव बंधु-भगिनी उपस्थित है. बल्कि उनके आनंद उत्साह का पारावार नहीं है. वंदना नदियाना, संगीता नदियाना, दक्षा भीमजीयाणी, लक्ष्मी भिमजीयाणी, प्रीती भिमजीयाणी, अरूणा भिमजीयाणी, लिना भिमजीयाणी, नीना नाग्रेया, कविता लढ्ढा, गंगाबाई पनपालिया, मोहनी राठी, राजकुमारी पनपालिया, सपना पनपालिया, वंदना दम्मानी, भक्ती लढ्ढा, वैदही लढ्ढा, राशी दम्मानी, किरण गगलानी, राधा बाहेती, रेखा डागा, मंगल राठी, राधीका दम्मानी, गायत्री पुरोहित, राधा घनश्याम, स्नेहा दवाणी, पल्लवी गगलानी, रीटा गगलानी, हर्षा मनकार, अमीषा वखारीया, भावना वखारिया, प्रिती मलकान, दिपा वडनगरा, निता धाबलिया, मनीषा धाबलिया, छाया धाबलिया, हिना थ्रव, गीता धाबलिया, संध्या वडनगरा, प्रिती वखारिया, रजन लोटिया, रसीला काटकोरिया, वीणा माडविया, श्वेता राजा, हिना राजा, दीना चावडा, प्रिती अदीमा, रश्मी रायचुरा, अलका श्रॉफ, संगीता श्रॉफ, रूपाली श्रॉफ, सीमा श्रॉफ, संध्या श्रॉफ, ज्योती भैय्या,अनीता भैय्या, अरूणा भैय्या, पन्ना आडतिया, अरविंद आडतिया, उमा धीरन पूना, दिप्ती पलेजा, भुमीका गादोया, डॉली गगलाणी, जमनाबाई टावरी, शोभा गुप्ता, पल्लवी रायचुरा, संगीता रायचुरा, कविता दासाणी, जसुमती गौहिब, तारा चावडा, नम्रता गोहिल, ज्योती श्रॉफ, वृंदा श्रॉफ, पुनीता श्रॉॅफ, स्नेहल श्रॉफ, सुधा तारकस, रचना शाह, ज्योत्स्ना शाह, राधा टापर, भावना आनंदपरा, डींपल आनंदपरा, संगीता गोटी, रिना संतोषिया, कल्पना संतोषिया, प्रिती शाह, ज्योती अग्रवाल, अर्चना काकु, मयुरी गाडेल, जयश्री सोनी, नीता पंडया, वर्षा कारीया, प्रीती शाह, रंजना पटेल, छाया लोटिया, रेखा बसनानी, शिल्पा शाह, रूपाली श्रॉफ, विजया श्रॉफ, जयंतीभाई कारिया, अशोक जाजू, सुरेश साबू, गोपाल नगदिया, कामेश लोहाणा, धर्मेश गगलानी, भावना गगलानी, दिपक राजा, सुरेश राजा, हितेश आडतीया, सुर्यकांत पारेख, अजय आडतीया, जनिश रायचुरा, आशिष रायचुरा, मुकेश महाजन, जुगलकिशोर लढ्ढा, जीतेंद्र सेठ, भुपेंद्र आडतीया, रमेश कारीया, संजय गांधी, राजेश गांधी, सतीश मकवाना, विजय धाना, कपिल राजा, हरिषभाई राजा, रोहीतभाई श्रॉफ सहित अनेकानेक की उपस्थिति रही.
(प्रस्तुति – श्याम दम्मानी नीलेश)

 

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