दशहरा-दिवाली का आनंद लें, खाने का तेल भी हो सकता है सस्ता

त्योहारों के मौसम में गृहिणियों को राहत की उम्मीद

* कच्चे सोयाबीन-पाम तेल की कस्टम ड्यूटी 10 से घटकर 5 फीसदी
अमरावती /दि.9- त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले ही रसोई के बजट को लेकर चिंतित गृहिणियों के लिए राहत की खबर सामने आई है. खाने के तेल की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने 24 सितंबर से प्रमुख खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में कटौती की है. कच्चे सोयाबीन और पाम तेल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दी गई है, जबकि कच्चे सूरजमुखी तेल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी शून्य कर दी गई है. इससे आने वाले नवरात्रि, दशहरा और दिवाली के दौरान खाद्य तेल की खुदरा कीमतों में कमी आने की संभावना जताई जा रही है.
फिलहाल बाजार में सोयाबीन, सूरजमुखी और पाम तेल के दाम पिछले साल की तुलना में ऊंचे स्तर पर हैं. सितंबर से अक्टूबर की शुरुआत के बीच सोयाबीन तेल की कीमत में करीब 1.3 फीसदी और पाम तेल की कीमत में करीब 2.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. अमरावती के बाजार में इस समय सोयाबीन खाद्य तेल करीब 170 रुपए प्रति लीटर तक बिक रहा है. लगातार बढ़ती कीमतों के कारण घरेलू बजट पर इसका सीधा असर पड़ रहा है.

* आयात लागत घटेगी तो ग्राहकों को मिल सकता है फायदा
भारत अपनी खाद्य तेल की जरूरत का करीब 50 से 60 फीसदी हिस्सा आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों के साथ-साथ आयात शुल्क का भी घरेलू बाजार में तेल की कीमतों पर असर पड़ता है. सरकार द्वारा आयात शुल्क घटाए जाने से आयात की लागत कम होने की उम्मीद है. यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें स्थिर रहती हैं और आयातित तेल की आवक बढ़ती है, तो इसका असर धीरे-धीरे खुदरा बाजार में भी दिखाई दे सकता है.

* त्योहारों में बढ़ेगी मांग
नवरात्रि, दशहरा और दिवाली के दौरान घरों में खाद्य तेल की खपत बढ़ जाती है. मिठाई, नमकीन, फरसाण और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग भी बढ़ती है. ऐसे में तेल की कीमत में कमी आती है तो घरेलू ग्राहकों के साथ होटल, रेस्टोरेंट और खाद्य व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी राहत मिल सकती है.

* सरकार ने कंपनियों को दिया निर्देश
केंद्र सरकार ने खाद्य तेल उद्योग को आयात शुल्क में कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने और डिस्ट्रीब्यूटर कीमत तथा अधिकतम खुदरा मूल्य को उसी के अनुरूप समायोजित करने के निर्देश दिए हैं. अब उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर है कि आयात शुल्क में कमी का वास्तविक लाभ खुदरा बाजार में कब और कितना दिखाई देता है.

* लेकिन सवाल-वास्तव में कितना सस्ता होगा तेल?
आयात शुल्क में कमी से कीमतों में गिरावट की संभावना जरूर बनी है, लेकिन खुदरा कीमतों में वास्तविक कमी कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करेगी. अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों के दाम, डॉलर-रुपये की विनिमय दर, आयात की लागत, घरेलू मांग और बाजार में उपलब्ध स्टॉक जैसे कारक कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं. इसके अलावा यह भी देखना होगा कि आयात शुल्क में कमी से मिलने वाला लाभ कंपनियों और व्यापारियों के स्तर से आगे बढ़कर वास्तव में उपभोक्ताओं तक पहुंचता है या नहीं.

* कितनी हुई शुल्क में कटौती?
– कच्चा सोयाबीन तेल: 10% से घटकर 5%
– कच्चा पाम तेल: 10% से घटकर 5%
– कच्चा सूरजमुखी तेल: बेसिक कस्टम ड्यूटी शून्य

* गृहिणियों को राहत की उम्मीद
खाद्य तेल की कीमतों में कमी आती है तो त्योहारों के दौरान बढ़ने वाले घरेलू खर्च को कुछ हद तक नियंत्रित करने में मदद मिलेगी. नवरात्रि से लेकर दिवाली तक घरों में पकवान और मिठाइयां बनाने के कारण तेल की खपत बढ़ती है. इसलिए गृहिणियां अब बाजार में कीमतों में होने वाली संभावित गिरावट पर नजर रख रही हैं. एक गृहिणी, ने कहा कि खाद्य तेल की कीमत लगातार बढ़ने से घरेलू बजट प्रभावित हुआ है. त्योहारों के मौसम में तेल सस्ता होता है तो परिवारों को निश्चित रूप से राहत मिलेगी. सरकार द्वारा शुल्क में कमी का पूरा लाभ ग्राहकों तक पहुंचना चाहिए. दुकानदार के मुताबिक आयात शुल्क में कमी से बाजार में तेल की आवक और आपूर्ति बढ़ने की संभावना है. हालांकि, खुदरा कीमतों पर इसका वास्तविक असर अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों और घरेलू बाजार में उपलब्धता पर भी निर्भर करेगा.

* अब नजर बाजार पर
सरकार ने आयात शुल्क में कटौती कर खाद्य तेल की कीमतों पर दबाव कम करने की कोशिश की है. अब त्योहारों के मौसम में मांग बढ़ने के बीच बाजार में तेल की आवक, कंपनियों की कीमत नीति और अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझान यह तय करेंगे कि दशहरा-दिवाली तक आम उपभोक्ता को तेल की कीमत में कितनी राहत मिलती है.

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