तीव्र रक्तक्षय से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के उपचार में तेजी

राज्य में 91 प्रतिशत पात्र माताओं को आयरन सुक्रोज-फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज के इंजेक्शन दिए गए

मुंबई /दि.29- गर्भावस्था के दौरान रक्तक्षय (एनीमिया) मां और गर्भस्थ शिशु दोनों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है. इसे देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने गर्भवती महिलाओं में तीव्र रक्तक्षय की पहचान और उपचार को प्राथमिकता दी है. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग द्वारा सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में मुफ्त उपचार की सुविधा को प्रभावी बनाया जा रहा है.
एचएमआईएस रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026-27 में जुलाई के अंत तक जांच के दौरान राज्य में 23,524 गर्भवती महिलाओं में तीव्र रक्तक्षय की पहचान की गई. इनमें से 21,337 महिलाओं को आयरन सुक्रोज अथवा फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज (एफसीएम) इंजेक्शन के माध्यम से उपचार दिया जा चुका है. इस तरह उपचार का प्रमाण 91 प्रतिशत तक पहुंच गया है. भारत में करीब 52 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं में रक्तक्षय पाया जाता है. गंभीर रक्तक्षय होने पर प्रसव के दौरान या उसके बाद मां के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है. इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य के ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों तक भी उपचार सुविधा पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है.
* ‘फोर टी स्ट्रैटेजी’ से हो रही निगरानी
गर्भावस्था के दौरान तीव्र रक्तक्षय का समय पर पता लगाने और उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग ने ‘टेस्ट, टॉक, ट्रीट और ट्रैक’ यानी जांच, परामर्श, उपचार और फॉलोअप की रणनीति अपनाई है. इसके तहत उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का लगातार फॉलोअप तथा उपचार के बाद दोबारा जांच पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. वर्ष 2018-19 से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उससे ऊपर की सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में चिकित्सकीय अधिकारियों की निगरानी में आयरन सुक्रोज इंजेक्शन के माध्यम से उपचार किया जा रहा है. वहीं वर्ष 2024-25 से राज्य की सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थाओं में आयरन सुक्रोज के साथ फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज इंजेक्शन भी उपलब्ध कराया गया है.
* कई जिलों में 100 प्रतिशत उपचार
राज्य के अहिल्यानगर, लातूर, बीड, चंद्रपुर, वर्धा, रत्नागिरी, वाशिम और बुलढाणा जिलों में तीव्र रक्तक्षय से पीड़ित 100 प्रतिशत पात्र गर्भवती महिलाओं को उपचार दिया गया है. वहीं नागपुर, सिंधुदुर्ग, गोंदिया, छत्रपति संभाजीनगर, पुणे, हिंगोली, जालना, धाराशिव और ठाणे जिलों में उपचार का प्रमाण 95 से 100 प्रतिशत के बीच रहा. महानगरपालिका क्षेत्रों में भी लातूर, नाशिक, भिवंडी, कोल्हापुर, उल्हासनगर, नांदेड-वाघाला, नवी मुंबई, सोलापुर, चंद्रपुर, परभणी तथा सांगली-मिरज-कुपवाड में 100 प्रतिशत उपचार कवरेज दर्ज किया गया है.
* कम कवरेज वाले जिलों पर विशेष ध्यान
नंदुरबार, सोलापुर, गडचिरोली, पालघर, नाशिक और भंडारा जिलों में उपचार का प्रमाण अपेक्षाकृत कम है. इन जिलों के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है. आशा कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य सेविकाओं, चिकित्सा अधिकारियों और जिला स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से पात्र महिलाओं तक उपचार पहुंचाने और कवरेज बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा. गर्भावस्था की शुरुआत में ही प्रत्येक महिला की हिमोग्लोबिन जांच, आयरन-फोलिक एसिड की नियमित खुराक लेने के लिए परामर्श, पौष्टिक एवं आयरनयुक्त आहार की जानकारी तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास रेफर करने की व्यवस्था की गई है.
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक आयरन सुक्रोज और फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज उपचार से हिमोग्लोबिन तथा शरीर में आयरन का स्तर बढ़ाने में मदद मिलती है. इससे कमजोरी और थकान कम करने में सहायता मिल सकती है. हालांकि गर्भवती महिलाओं में इन इंजेक्शनों का उपयोग चिकित्सकीय अधिकारी की निगरानी में ही किया जाना चाहिए. सरकार का उद्देश्य तीव्र रक्तक्षय से पीड़ित प्रत्येक गर्भवती महिला की समय पर पहचान कर उसका उपचार और नियमित फॉलोअप सुनिश्चित करना है, ताकि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सके.

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