10 वर्ष के बाद मिला मासून को इन्साफ, आरोपी को 10 वर्ष की सजा

जिला एवं सत्र न्यायालय का निर्णय, पीडिता को मुआवजा देने के भी दिए आदेश

मंगरुल दस्तगीर /दि.7 – करीब 10 वर्ष पुराने मासूम के साथ दुष्कर्म व पॉक्सो मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय क्रमांक-2 ने सोमवार 5 जुलाई को अंतिम सुनवाई कर आरोपी अमोल वसंतराव उरकुडे (36, पिंपलखुटा, धामणगांव रेलवे) को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है. जुर्माना अदा नहीं करने पर आरोपी को तीन माह का साधारण कारावास भुगतना होगा.
जानकारी के अनुसार यह मामला मंगरुल दस्तगीर पुलिस थाना क्षेत्र में वर्ष 2016 में दर्ज से संबंधित है. उस समय पीडिता की उम्र 16 वर्ष थी. वह अपने रिश्तेदार के विवाह समारोह में शामिल होने के लिए पिंपलखुटा आई थी. इस दौरान आरोपी ने उसकी छोटी बहन के साथ होने के बावजूद उसे जबरन एक झोपडी में ले जाकर उसकी इच्छा के खिलाफ दुष्कर्म किया और बाद में आरोपी ने उसके साथ दो से तीन बार और भी शारीरिक संबंध बनाए. जिससे वह गर्भवती हो गई. नाबालिग अवस्था में पीडिता ने एक बच्चे को जन्म दिया.
प्रसव के दौरान अस्पताल में मामला सामने आने पर पीडिता के बयान के आधार पर आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया. मामले की जांच तत्कालीन पीएसआई राजेंद्र होटे ने की. जांच के पर्याप्त सबूत मिलने के बाद अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया. सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष की ओर से अधिवक्ता एड. सोनाली क्षीरसागर ने कुल 15 गवाहों के बयान दर्ज कराए. दोनों पक्षों की दलिले सुनने के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश क्रमांक-2 ने आरोपी को आईपीसी की धारा 376 के तहत दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास एवं जुर्माने की सजा सुनाई.
अदालत ने आरोपी को पॉक्सो एक्ट के तहत भी दोषी माना, लेकिन पॉक्सो एक्ट की धारा 42 के प्रावधान के अनुसार एक ही अपराध के लिए अलग-अलग सजा न देते हुए आईपीसी की धारा के तहत ही सजा निर्धारित की गई. अदालत ने पीडिता को दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत उचित मुआवजा प्रदान करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को आवश्यक कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए है. इस मामले में सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील सोनाली क्षीरसागर ने सफलतापूर्वक पैरवी की. जबकि न्यायालयीन कार्यवाही में पुलिस हेडकांस्टेबल रोशन दुधे ने भी महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया.

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