अनिल अग्रवाल को दि इंस्टीटयूशन ऑफ इंजीनियर्स सर्वोत्तम सम्मान से नवाजा
मेहनत और ग्राहक के विश्वास और टीम के भरोसे लिखी सफलता की कहानी

*100 वर्गफीट की दुकान से कारोबार के शिखर तक पहुंचने का सफर
होनहार बिरवान के होत चिकने पात-यह कहावत उन लोगों पर बिल्कुल सटीक बैठती है, जिनमें आगे बढने की क्षमता और कुछ अलग करने का जज्बा शुरूआत से ही दिखाई देता है. अमरावती के प्रतिष्ठित उद्यमी अनिलकुमार रतनलाल अग्रवाल की कारोबारी यात्रा भी इसी जिद, मेहनत, अनुशासन और दूरदृष्टि की कहानी है. हाल ही में दी इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजिनियर्स , अमरावती ने उन्हें सर्वोत्तम उद्यमी सम्मान से सम्मानित किया. विदर्भ के चार जिलों से इस सम्मान के लिए चुने गए उद्यमियों में वे एकमात्र चयनित उद्यमी रहे. यह सम्मान केवल उनके वर्तमान कारोबारी विस्तार की उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्षो की मेहनत, प्रयोगधर्मिता, व्यावसायिक नैतिकता और ग्राहकों के विश्वास से तैयार हुई लंबी यात्रा की पहचान है.
येवदा से अमरावती तक का सफर : 2 फरवारी 1965 को अमरावती जिले के येवदा गांव में सामान्य परिवार में जन्मे अनिल अग्रवाल चार भाइयों और दो बहनों में सबसे बडे है. प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा येवदा में पूरी करने के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए अमरावती आए. सादगी और मितव्ययिता के साथ इंजीनियरींग की पढाई पूरी करते हुए उन्होंने 70 प्रतिशत अंकों के साथ प्रथम श्रेणी हासिल की.योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी के अवसर सामने थे. लेकिन उन्होंने सुरक्षित नौकरी के बजाय व्यवसाय को चुना. परिवार से चर्चा के बाद उन्होंने अपने मामाजी के उद्योग में काम शुरू किया.
100 वर्गफीट की दुकान बनी सफलता की पहली सीढी: जब उन्होंने स्वतंत्र रूप से कारोबार शुरू किया, तब उनके पास कोई बडा आर्थिक आधार नहीं था. इसके बावजूद आत्मविश्वास और जोखिम उठाने के साहस के साथ उन्होंने अमरावती के मुख्य व्यापारिक क्षेत्र से अलग लगभग 100 वर्गफीट की किराए की दुकान से गृह उपयोगी वस्तुओं का कारोबार शुरू किया.ब्लैक एंड व्हाइट टीवी से शुरू हुआ सफर रंगीन टीवी,एलसीडी, एलईडी और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों तक पहुंचा.आज अमरावती में घरेलू इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के क्षेत्र में पूनम इलेक्ट्रॉनिक्स एक परिचित नाम है.
इलेक्ट्रॉनिक्स से फर्नीचर कारोबार तक विस्तार : बाजार में बदलाव को स्वीकार करना उनकी कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा. ग्राहकों की बदलती पसंद और जरूरतों को समझते हुए उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स के बाद फर्नीचर क्षेत्र में प्रवेश किया. इसी सोच के काउच पफी फर्नीचर व्यवसाय ने आकार लिया. करीब 100 वर्गफीट की दुकान से शुरू हुई यात्रा आज एक लाख वर्गफीट से अधिक के फर्नीचर मॉल तक पहुंच चुकी है. मध्य भारत के काउच पफी ने फर्नीचर क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है.?
महिलाओं के लिए केआईकेआई की कई पहल : व्यवसाय में एक अवसर तलाशने की उनकी सोच ने करीब चार वर्ष पहले एक और नए उपक्रम को जन्म दिया. महिलाओं की बदलती जीवनशैली और फैशन की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए केआईकेआई किया गया. यहां महिलाओं के लिए आधुनिक और डिजाइनर परिधान उपलब्ध है. ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार परिधान खरीदने के साथ ही उन्हें निर्धारित अवधि के लिए किराये पर भी ले सकती है. इस उपक्रम की जिम्मेदारी उनकी पुत्री ईशिका संभाल रही है.
कर्मचारियों को दिया परिवार जैसा भरोसा: किसी भी व्यवसाय की सफलता केवल उनके आकार से नहीं ,बल्कि उससे जुडे लोगों के विश्वास से तय होता है.अनिल अग्रवाल के विभिन्न कारोबारों से 100 से अधिक कर्मचारी जुडे है. उनके साथ संबंध केवल मालिक-कर्मचारी तक सीमित नहीं रहे.कर्मचारियों के सुख-दुख में व्यक्तिगत रूचि लेना और जरूरत के समय सहयोग करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा है. यहीं कारण है कि कई कर्मचारी 20 से 25 वर्षो से उनके साथ जुडे हुए है.
कारोबार से दूर रहकर भी चलता रहा काम : अनिल अग्रवाल की कार्यशैली एक खास पहलू यह भी है कि वे कई बार लंबे समय तक यात्राओं पर रहते है. कभी 40, कभी 60 और कभी 70 दिनों तक व्यवसाय से दूर रहने के बावजूद करोबार सुचारू रूप से चलता रहा है.
संगीत, उत्सव और अध्यात्म से जुडाव : व्यवसाय के साथ अनिल अग्रवाल के व्यक्तित्व में संगीत उत्सव और अध्यात्म के लिए भी विशेष स्थान है,उन्हें गीत-संगीत सुनना पसंद है और परिवार व मित्रों के साथ विभिन्न उत्सवों में शामिल होकर आनंद लेना उनकी उत्सवप्रियता को दशार्ता है.
सम्मान ने संघर्ष की यात्रा को दी गई पहचान: दी इंस्टीटयूशन ऑफ इंजीनियर्स, अमरावती की ओर से मिला सर्वोत्त उद्यमी सम्मान अनिल अग्रवाल के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है. विदर्भ के चार जिलों में इस सम्मान के लिए चयनित एकमात्र उद्यमी के रूप में उन्हें मिली यह पहचान उनके लंबे कारोबारी सफर को सम्मानित करती है. 100 वर्गफीट की किराए की दुकान से शुरू हुई यात्रा आज इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार ,एक लाख वर्गफीट से अधिक के फर्नीचर मॉल और नए व्यावसायिक उपक्रमों तक पहुंच चुकी है.अनिल अग्रवाल की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सीमित संसाधनों से शुरू किया गया सफर भी दूरदृष्टि ,अनुशासन, परिश्रम ,जोखिम उठाने के साहस और लोगों के विश्वास से सहारे बडी सफलता में बदल सकता है. अमरावती के उद्यमिता क्षेत्र में उनकी यह यात्रा निश्चित रूप से नई पीढी के लिए प्रेरक अध्याय है.





