नेकॉफ के कारण बॉयोमायनिंग ठप
अमरावती मनपा पर बडा आर्थिक संकट

* मुआवजा बढने की आशंका
* सुप्रीम कोर्ट की कडी नाराजगी, अंतिम सुनवाई की ओर मामला
अमरावती/दि.17 – अमरावती महानगरपालिका विरुद्ध गणेश दादाराव अनासाने और अन्य सिविल अपील क्रमांक 4020 केस की आज सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई हुई तो कोर्ट ने कचरा प्रबंधन में गंभीर लापरवाही पर कडी नाराजगी व्यक्त की. न्या. पी. एस. नरसिम्हा और न्या. आलोक की पीठ ने स्पष्ट कहा कि, पर्याप्त समय दिये जाने के बावजूद अपेक्षित अनुपालन नहीं हुआ है. सबसे गंभीर मुद्दा नेकॉफ से जुडा है. नई ठेका कंपनी रहने के बावजूद अब तक सुकली स्थत कंपोस्ट डिपो में बायोमायनिंग कार्य में बडी देरी हो रही है.
उल्लेखनीय है कि, महापालिका ने भोपाल की कंपनी नेकॉफ को बायोमायनिंग का ठेका दे रखा है. उस पर कुछ पक्षों ने आक्षेप लिये है. जिससे बायोमायनिंग का काम प्रलंबित हुआ है. इस देरी के कारण पुराने कचरे लिगेसी वेस्ट का वैज्ञानिक निस्तारण प्रभावित हुआ है. फलस्वरुप पर्यावरण जोखिम बढ गया है.
सूत्रों के अनुसार, इस प्रकरण में लगभग 47 करोड 23 लाख 45 हजार की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगने की संभावना है. विशेष रुप से न्यायालय द्वारा एमएसडब्ल्यू नियम 2026 के तहत मुआवजा निर्धारित करने के निर्देश दिये जाने के कारण यह राशि बढ भी सकती है. जिससे महापालिका पर आर्थिक बोझ बढने की आशंका है.
कोर्ट ने स्वतंत्र समीक्षा हेतु अमायकस क्यूरी अर्थात कोर्ट मित्र की निुयक्ति करते हुए जिम्मेदारी तय कर उचित मुआवजा निर्धारित करने का निर्देश दे रखा है. परियोजना में बफर झोन का अभाव, लीचेट संग्रह प्रणाली की कमी, आरडीएफ एवं कचरा भंडारण हेतु शेड का अभाव, ्रग्रीन बेल्ट का विकास न होना जैसी गंभीर खामिया सामने आयी है. घनकचरा प्रबंधन नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है. प्रतिवादी क्र.1 गणेश अनासाने द्वारा नेकॉफ के कारण हो रही देरी और अन्य त्रृटियों को समय-समय पर न्यायालय एवं प्रशासन के सामने उठाया गया था.
इस बीच न्यायालय ने आज संकेत दिये कि, अगली सुनवाई में केस का अंतिम निपटारा कर दिया जाएगा. अमरावती के कचरा प्रबंधन से जुडा यह प्रकरण अब निर्णायक मोड पर आ गया है. अगली सुनवाई 12 मई को रखे जाने की जानकारी विधि सूत्रों ने दी.





