‘शंकर सुवन केसरी नंदन…’ के जयघोष से गुंजायमान हुआ चांगापुर
तुलसीदास जयंती पर संगीतमय सुंदरकांड का भव्य आयोजन, भक्ति रस में सराबोर हुए श्रद्धालु

* नरेडी परिवार एवं तुलसीदास जयंती समिति की पहल, पुणे के कलाकारों ने बांधा समां
अमरावती/दि.17 – रामचरितमानस के रचयिता, संत शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास महाराज की पावन जयंती के अवसर पर चांगापुर स्थित चांगापुर नरेश हनुमान मंदिर रविवार को भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन गया. मंदिर परिसर में आयोजित संगीतमय सुंदरकांड पाठ ने ऐसा आध्यात्मिक वातावरण निर्मित किया कि सैकड़ों श्रद्धालु घंटों तक भक्ति रस में डूबे रहे. अनिल अग्रवाल (नरेडी), हेमलता अग्रवाल (नरेडी) तथा तुलसीदास जयंती समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त संकटमोचन हनुमानजी की महिमा का गुणगान किया गया. ‘शंकर सुवन केसरी नंदन, तेज प्रताप महा जग वंदन’ जैसे चौपाइयों और भजनों की स्वर लहरियों ने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया.
* सुबह आरती से हुई शुरुआत, सुंदरकांड ने बांधा आध्यात्मिक समां
कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह चांगापुर नरेश हनुमानजी के विशेष श्रृंगार और महाआरती के साथ हुआ. इसके बाद संगीतमय सुंदरकांड पाठ का आरंभ हुआ, जिसमें पुणे के प्रसिद्ध जॉयफुल सुंदरकांड ग्रुप और आर्ट ऑफ लिविंग से जुड़े वरिष्ठ प्रशिक्षक सुनील पोद्दार, मीनू पोद्दार एवं संजय पारख ने अपनी मधुर वाणी से सुंदरकांड की प्रस्तुति दी. उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. चौपाइयों के बीच-बीच में गूंजते जय श्रीराम और बजरंगबली की जय के उद्घोष से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय ऊर्जा से भर उठा. कई श्रद्धालु भक्ति में तल्लीन होकर भजन गुनगुनाते रहे, जबकि अनेक श्रद्धालु ध्यानमग्न होकर प्रभु स्मरण में लीन दिखाई दिए.
* पांच वर्षों से जारी है यह आध्यात्मिक परंपरा
आयोजकों ने बताया कि यह आयोजन लगातार पांचवें वर्ष किया गया है. इससे पहले दो बार महेश भवन तथा दो बार चांगापुर में इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा चुका है. इस वर्ष भी चांगापुर नरेश के सान्निध्य में सुंदरकांड पाठ का आयोजन कर धार्मिक वातावरण को और अधिक सशक्त बनाने का प्रयास किया गया. आयोजकों का मानना है कि सुंदरकांड केवल धार्मिक पाठ नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और मानसिक शांति प्रदान करने वाला आध्यात्मिक साधन है.
* भक्ति और संगीत का अद्भुत संगम
कार्यक्रम के दौरान सुंदरकांड की चौपाइयों को संगीतबद्ध शैली में प्रस्तुत किया गया. भजनों और चौपाइयों की ऐसी मनमोहक प्रस्तुति हुई कि श्रद्धालु मानो आध्यात्मिक यात्रा पर निकल पड़े हों. मंदिर परिसर में उपस्थित हर व्यक्ति के चेहरे पर श्रद्धा, संतोष और आनंद की अनुभूति स्पष्ट दिखाई दे रही थी. विशेष रूप से हनुमानजी की महिमा का वर्णन करने वाली चौपाइयों पर श्रद्धालुओं ने तालियों और जयघोष के साथ अपनी भावनाएं व्यक्त कीं. कई श्रद्धालुओं ने इसे जीवन का अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बताया.
* पार्षद अनिल अग्रवाल सहित गणमान्यों तथा कलाकारों व सहयोगियों का हुआ सम्मान
इस अवसर पर उपस्थित मनपा पार्षद अनिल अग्रवाल सहित कई गणमान्य नागरिकों का भी आयोजकों द्वारा स्वागत एवं सत्कार किया गया. कार्यक्रम के समापन पर सुनील पोद्दार, मीनू पोद्दार और संजय पारख का नरेडी परिवार की ओर से दुपट्टा ओढ़ाकर एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया गया. सुंदरकांड पाठ में वाद्ययंत्रों के माध्यम से सहयोग देने वाले कलाकारों को भी सम्मानित किया गया.
* शहर के गणमान्य नागरिक रहे उपस्थित
कार्यक्रम में अनिल अग्रवाल (नरेडी), सुनील नरेडी, हेमलता नरेडी, रेखा नरेडी, सर्वेश नरेडी, कविता नरेडी, नमन नरेडी, मानव नरेडी सहित नरेडी परिवार के सदस्य, शहर के अनेक गणमान्य नागरिक, धर्मप्रेमी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे.
* भक्ति, संगीत और श्रद्धा का संगम बना यह आयोजन
तुलसीदास जयंती पर आयोजित यह संगीतमय सुंदरकांड केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना का एक अनूठा उत्सव बन गया. चांगापुर नरेश के दरबार में गूंजती चौपाइयों और भजनों ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि भक्ति की शक्ति आज भी लोगों को जोड़ने और आत्मिक शांति प्रदान करने का सबसे सशक्त माध्यम है.

* हनुमानजी की कृपा से ही संभव हो पाता है ऐसा आयोजन
कार्यक्रम के मुख्य आयोजक अनिल अग्रवाल (नरेडी) ने कहा कि उनकी संकटमोचन हनुमानजी में अटूट आस्था है. उन्होंने कहा कि, हनुमानजी का स्मरण मुझे आत्मिक शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है. उनकी कृपा से ही मैं हर वर्ष ऐसे धार्मिक आयोजन करने में सक्षम हो पाता हूं. यह सब प्रभु का आशीर्वाद है, जो समाज को धर्म और संस्कारों से जोड़ने की प्रेरणा देता है.





