कर्जमाफी के बावजूद एक सप्ताह में 11 किसानों ने की आत्महत्या

शासन निर्णय से किसान परेशान

अमरावती /दि.9– राज्य सरकार द्वारा 55.72 लाख किसानों के 36,585 करोड़ रुपये के फसल ऋण माफ करने की घोषणा के बावजूद विदर्भ में किसानों की आत्महत्याओं का सिलसिला नहीं थमा है. 1 से 7 जून के बीच क्षेत्र में 11 किसानों ने कथित रूप से कर्ज और आर्थिक संकट के कारण आत्महत्या कर ली. इनमें सबसे अधिक मामले यवतमाल जिले से सामने आए हैं.
कृषि विशेषज्ञों और किसान संगठनों का कहना है कि आत्महत्याओं का मूल कारण किसानों की कमजोर आर्थिक स्थिति, फसलों को उचित मूल्य न मिलना और बढ़ती उत्पादन लागत है. कपास, सोयाबीन, धान, अरहर तथा संतरा उत्पादक किसान लगातार आर्थिक दबाव झेल रहे हैं. किसान संगठनों ने मांग की है कि कर्जमाफी के साथ-साथ किसानों को खरीफ सीजन के लिए प्रति एकड़ 15 हजार रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि वे बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री खरीद सकें. उनका कहना है कि केवल कर्जमाफी से समस्या का समाधान संभव नहीं है, बल्कि किसानों को फसलों का लाभकारी मूल्य और आर्थिक सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी होगी. आत्महत्या करने वाले किसानों में नागपुर, चंद्रपुर, भंडारा, गोंदिया, अमरावती, यवतमाल और बुलढाणा जिलों के किसान शामिल हैं. किसान संगठनों ने सरकार से कृषि संकट पर ठोस और दीर्घकालिक नीति लागू करने की मांग की है.

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