डफरिन में तीन करोड़ का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट एक साल से बंद
अस्पताल का गंदा पानी ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाने की व्यवस्था अधूरी

* रोजाना दो लाख लीटर अपशिष्ट जल उपचार की क्षमता
अमरावती /दि.21– जिला महिला अस्पताल (डफरिन) में रोजाना सैकड़ों मरीजों का उपचार किया जाता है, लेकिन अस्पताल के अपशिष्ट जल के उपचार के लिए करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पिछले एक साल से बंद पड़ा है. करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद प्लांट शुरू नहीं हो पाने से अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं.
अस्पताल से निकलने वाला अपशिष्ट जल सामान्य घरेलू गंदे पानी की तुलना में अधिक संवेदनशील माना जाता है. इसमें विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीव, जैविक पदार्थ, दवाओं और एंटीबायोटिक के अवशेष तथा रासायनिक तत्व हो सकते हैं. ऐसे पानी का उचित उपचार किए बिना निस्तारण करने से पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है. इसी उद्देश्य से जिला महिला अस्पताल में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया है. प्लांट की प्रतिदिन दो लाख लीटर अपशिष्ट जल उपचार करने की क्षमता है. इसमें विभिन्न चरणों के माध्यम से गंदे पानी को शुद्ध करने की व्यवस्था की गई है. हालांकि, वर्तमान में अस्पताल का गंदा पानी प्लांट तक पहुंच ही नहीं पा रहा है.
* प्लांट तक सीवेज पहुंचाने की व्यवस्था अधूरी
अस्पताल के अपशिष्ट जल को ट्रीटमेंट प्लांट तक ले जाने के लिए आवश्यक व्यवस्था का काम अभी पूरा नहीं हुआ है. इसी कारण करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया गया प्लांट उपयोग में नहीं आ रहा है. अस्पताल प्रशासन के अनुसार, अपशिष्ट जल को प्लांट तक पहुंचाने की व्यवस्था का काम पूरा होने के बाद इसे शुरू किया जाएगा.
* अस्पताल के गंदे पानी में कई हानिकारक तत्व
अस्पताल के सीवेज में माइक्रोऑर्गेनिज्म, जैविक पदार्थ, दवाओं के अवशेष और विभिन्न रासायनिक तत्व मौजूद हो सकते हैं. इसलिए इसका वैज्ञानिक पद्धति से उपचार करना आवश्यक है. अस्पताल के गंदे पानी को वाटर प्यूरिफिकेशन प्लांट तक पहुंचाने की सुविधा तैयार की जा रही है. यह काम पूरा होते ही प्लांट शुरू कर दिया जाएगा.
– डॉ. विनोद पवार, सिविल सर्जन, अमरावती





