शक्कर की दरवृध्दि के पीछे इथेनॉल नहीं

केन्द्र सरकार ने दावों को किया खारिज, शुल्क मुफ्त आयात को दी अनुमति

नई दिल्ली/दि.22 – इथेनॉल की निर्मिति हेतु गन्ने का प्रयोग किए जाने के चलते शक्कर की किल्लत पैदा होकर शक्कर की दरवृध्दि होने के संदर्भ में किए जा रहे दावों को केन्द्र सरकार ने गत रोज पूरी तरह से खारिज कर दिया. सरकार का इस संदर्भ में कहना रहा कि देशांतर्गत उत्पादन में आयी कमी, पर्व एवं त्यौहारों के सीजन से पहले मांग में हुई वृध्दि तथा शक्कर तथा बडे विक्रेताओं द्बारा शक्कर का बडे पैमाने पर संग्रहन किए जाने के चलते शक्कर के दामों में अकस्मात उछाल आया है. जिसके चलते शक्कर के दामों पर नियंत्रण रखने हेतु शक्कर का स्टॉक करने पर मर्यादा लगाते हुए शुल्क मुक्त आयात को अनुमति देने का निर्णय लिया गया है.
बता दें कि विगत 20 जुलाई को शक्कर के फूटकर दाम 48.18 रूपए प्रति किलो थे. जो, 20 अगस्त को 55.70 रूपए प्रति किलो के स्तर पर पहुंचने के बाद केन्द्र सरकार की आलोचना होने लगी और दावा किया जाने लगा कि इथेनॉल के उत्पादन हेतु गन्ने का प्रयोग बढने की वजह से शक्कर के दामों में इजाफा हो रहा है. सरकार ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि इथेनॉल के उत्पादन और शक्कर की दरवृध्दि का आपस में संबंध जोडना पूरी तरह से गलत है. क्योंकि अपेक्षा से कम शक्कर उत्पादन, त्यौहारी सीजन से पहले शक्कर की बढती मांग, मौसम की वजह से हुए नुकसान, वैैश्विक स्तर पर आपूर्ति में गिरावट तथा उद्योग क्षेत्र के कुछ घटकों द्बारा किए जाने वाले संग्रहन की वजह से शक्कर के दाम बढ रहे है. उपरोक्त जानकारी देने के साथ ही ग्राहक व्यवहार, अन्न व सार्वजनिक आपूर्ति मंत्रालय द्बारा स्पष्ट किया गया है कि शक्कर का स्टॉक करने की लिमिट तय करते हुए अब शुल्क मुक्त आयात को अनुमति देने का निर्णय दिया गया है.

* कारखानों व किसानों को कोई खास फायदा नहीं
महाराष्ट्र के वैद्यकीय शिक्षामंत्री हसन मुश्रीफ ने गत रोज मीडिया के साथ बातचीत में इस विषय को लेकर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यद्यपि शक्कर के दामों में अच्छा खासा इजाफा हुआ है. परंतु देश के शक्कर कारखाना संचालकों एवं किसानों को इसका कोई विशेष फायदा नहीं होने वाला है. क्योंकि हमारे पास बेचने के लिए शक्कर ही नहीं है. साथ ही शुल्क मुक्त आयात की नीति का भी शक्कर कारखानों को कोई विशेष लाभ नहीं होगा.

* शक्कर कारखाना संचालकों के लिए फायदेमंद है दरवृध्दि
स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के संस्थापक अध्यक्ष व पूर्व संसद राजू शेट्टी ने गत रोज इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि भाजपा सरकार में सक्रिय रहनेवाले कुछ चुनिंदा शक्कर कारखाना संचालकों एवं शक्कर के बडे व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए देश में कृत्रिम किल्लत फायदा करते हुए शक्कर के दाम बढाए जा रहे हैं. कुछ चुनिंदा शक्कर व्यापारियों एवं शक्कर कारखाना संचालकों के हितों के लिए देश की 150 करोड जनता व गन्ना उत्पादक किसानों के हितों से समझौता किया जा रहा है.

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