पुराने फंड बचे तो 16वें वित्त आयोग का फंड होगा बंद

केंद्र की सख्त नीति, ‘काम दिखाओ, फंड पाओ’

ग्राम पंचायतों से लेकर जिला परिषद तक खर्च पर कड़ा नियंत्रण
अमरावती/दि.8 – ग्राम पंचायतों से लेकर पंचायत समिति और जिला परिषद तक स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं को मिलने वाले फंड के इस्तेमाल पर अब केंद्र सरकार ने सख्त नियंत्रण लागू किया है. ‘काम दिखाओ, फंड पाओ’ की नीति के तहत 16वें वित्त आयोग के नए नियमों के अनुसार अनुदान का वितरण और उपयोग किया जाएगा. पुराने वित्त आयोग के फंड का पर्याप्त उपयोग नहीं होने पर अगले चरण का फंड भी प्रभावित होगा.
16वें वित्त आयोग के तहत वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं को करोड़ों रुपये का अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा. इसमें अधिकांश हिस्सा बेसिक ग्रांट का होगा, जबकि कुछ हिस्सा प्रदर्शन के आधार पर दिया जाएगा.

* पहले साल ग्राम पंचायतों को 80 फीसदी फंड
वर्ष 2026-27 में उपलब्ध फंड का 80 फीसदी हिस्सा सीधे ग्राम पंचायतों को दिया जाएगा. शेष 20 फीसदी में से 10 फीसदी पंचायत समितियों और 10 फीसदी जिला परिषदों को मिलेगा. 2011 की जनगणना के आधार पर उपलब्ध राशि का 90 फीसदी वितरण आबादी के अनुपात में और 10 फीसदी क्षेत्रफल के आधार पर किया जाएगा.

* आय बढ़ाने पर ही मिलेगा परफॉर्मेंस ग्रांट
16वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाले परफॉर्मेंस ग्रांट के लिए ग्राम पंचायतों को अपनी आय बढ़ाने का प्रदर्शन करना होगा. इसके लिए पंचायतों को अपने राजस्व में कम से कम 2.5 फीसदी की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर हासिल करनी होगी या प्रत्येक परिवार से सालाना 1,200 रुपये की आय दर्शानी होगी. इस शर्त को पूरा करने वाली ग्राम पंचायतों को ही प्रदर्शन आधारित अनुदान का लाभ मिल सकेगा.

* ग्रामसभा का प्रस्ताव अनिवार्य
ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर पर किए जाने वाले सभी कार्यों के लिए संबंधित संस्था का प्रस्ताव पारित करना अनिवार्य होगा. इसके साथ ही वार्षिक विकास योजना और किए गए खर्च का पूरा विवरण ‘ई-ग्रामस्वराज’ पोर्टल पर अपलोड करना होगा.

* 15वें वित्त आयोग की राशि बची तो 2028-29 से फंड पर रोक
नए नियमों में पुराने फंड के इस्तेमाल पर भी विशेष जोर दिया गया है. यदि 15वें वित्त आयोग की 10 फीसदी से अधिक राशि खर्च किए बिना बची रहती है, तो वर्ष 2028-29 से 16वें वित्त आयोग का फंड रोक दिया जाएगा. इससे स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं को उपलब्ध राशि समय पर खर्च करने और विकास कार्यों को गति देने की चुनौती होगी.

* सड़क निर्माण पर खर्च की सीमा
बेसिक ग्रांट की राशि में से 50 फीसदी हिस्सा स्वच्छता, ठोस कचरा प्रबंधन और पेयजल आपूर्ति जैसे कार्यों पर खर्च करना अनिवार्य होगा. शेष राशि का उपयोग स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार किया जा सकेगा. हालांकि, कुल बेसिक ग्रांट में से 20 फीसदी से अधिक राशि सड़क निर्माण या सड़क मरम्मत पर खर्च नहीं की जा सकेगी. नए नियमों के कारण ग्राम पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों को उपलब्ध फंड के नियोजन, खर्च और उसकी ऑनलाइन जानकारी दर्ज करने पर विशेष ध्यान देना होगा. केंद्र की इस व्यवस्था से विकास कार्यों के साथ-साथ स्थानीय संस्थाओं की अपनी आय बढ़ाने और उपलब्ध निधि का समय पर उपयोग करने पर भी जोर रहेगा.

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