कर्ज लो, अब अलग से एनए परमिशन की जरूरत नहीं
कलेक्टर से गैर-कृषि अनुमति लेने की शर्त खत्म

बिल्डिंग प्लान मंजूर होते ही बैंक नहीं मांग सकेंगे अलग ‘एनए’ दस्तावेज
अमरावती/दि.8 – जमीन विकास और निर्माण कार्य से जुड़े नागरिकों के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण फैसला लिया है. अब जमीन के विकास, ले-आऊट अथवा निर्माण के लिए जिलाधिकारी से अलग से गैर कृषि अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी. संबंधित टाउन प्लानिंग विभाग, नगरपालिका या स्थानीय प्राधिकरण से निर्माण नक्शा मंजूर होने के बाद बैंक और वित्तीय संस्थाएं अलग से ‘छ-’ प्रमाणपत्र की मांग नहीं कर सकेंगी.
सरकार के इस निर्णय से जमीन मालिकों, घर बनाने वाले नागरिकों और डेवलपर्स को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. खासकर होम लोन और कमर्शियल लोन लेने की प्रक्रिया में होने वाली अनावश्यक कागजी कार्रवाई और देरी कम होगी.
* कर्ज और फाइनेंसिंग की प्रक्रिया होगी आसान
अब तक कई मामलों में निर्माण योजना को स्थानीय प्राधिकरण से मंजूरी मिलने के बावजूद बैंक अलग से एनए प्रमाणपत्र अथवा संबंधित दस्तावेज मांगते थे. इससे कर्ज मंजूर होने की प्रक्रिया लंबी हो जाती थी. नई व्यवस्था के बाद निर्माण योजना की वैधानिक मंजूरी उपलब्ध होने पर अलग से एनए दस्तावेज की मांग नहीं की जा सकेगी. इससे होम कर्ज, कमर्शियल लोन तथा निर्माण संबंधी वित्तीय सहायता की प्रक्रिया अधिक सरल और तेज होने की संभावना है.
* राजस्व विभाग के चक्कर से मिलेगी राहत
पहले कृषि भूमि को गैर-कृषि उपयोग में लेने के लिए नागरिकों को राजस्व विभाग में आवेदन कर अलग से एनए अनुमति प्राप्त करनी पड़ती थी. इस प्रक्रिया में समय लगने के साथ ही नागरिकों को विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे. सरकार के नए निर्णय का उद्देश्य इसी अतिरिक्त प्रक्रिया को खत्म कर निर्माण क्षेत्र में तेजी लाना और नागरिकों को सरल एवं समयबद्ध सेवा उपलब्ध कराना है.
* महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता में संशोधन
राज्य सरकार ने महाराष्ट्र भूमि राजस्व संहिता, 1966 में आवश्यक संशोधन किया है. इसके तहत भूमि के विकास और गैर-कृषि उपयोग के लिए पहले लागू अलग अनुमति प्रक्रिया को सरल किया गया है. अब भूमि विकास, भूमि का उपविभाजन यानी ले-आउट अथवा निर्माण के लिए संबंधित टाउन प्लानिंग विभाग, नगरपालिका या स्थानीय प्राधिकरण से आवश्यक मंजूरी लेना पर्याप्त होगा.
* बैंक अब अलग ‘एनए’ सर्टिफिकेट नहीं मांग सकेंगे
टाउन प्लानिंग अथवा स्थानीय निकाय से निर्माण नक्शा मंजूर होने के बाद भी कई बार बैंक और वित्तीय संस्थाएं अलग से एनए प्रमाणपत्र तथा एनओसी मांगती थीं. इससे कर्ज लेने वालों को अतिरिक्त दस्तावेज जुटाने पड़ते थे. नए प्रावधान के बाद सिर्फ अलग एनए प्रमाणपत्र के अभाव में ऋण प्रक्रिया रोकने की स्थिति नहीं रहेगी, क्योंकि निर्माण की अनुमति देने वाली सक्षम स्थानीय संस्था की मंजूरी को आधार माना जाएगा.
* स्थानीय प्राधिकरण की मंजूरी ही पर्याप्त
भूमि विकास, ले-आउट तैयार करने अथवा निर्माण के लिए अब संबंधित टाउन प्लानिंग विभाग, नगरपालिका या स्थानीय प्राधिकरण के पास आवेदन करना होगा. वहां से निर्माण योजना को मंजूरी मिलने के बाद अलग से जिलाधिकारी कार्यालय में एनए अनुमति के लिए जाने की आवश्यकता नहीं रहेगी.
* एकमुश्त लिया जाएगा कन्वर्जन सरचार्ज
सरकारी नियमों के अनुसार देय कन्वर्जन सरचार्ज संबंधित स्थानीय प्राधिकरण द्वारा निर्माण योजना को मंजूरी देते समय ही एकमुश्त लिया जाएगा. इससे नागरिकों को अलग-अलग स्तर पर शुल्क और अनुमति की प्रक्रिया से गुजरने की जरूरत कम होगी. सरकार के इस फैसले से एक ओर जहां नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर निर्माण क्षेत्र में मंजूरी और वित्तीय प्रक्रिया तेज होने से आवासीय तथा व्यावसायिक निर्माण को भी गति मिलने की संभावना है.





