महावितरण की बड़ी उपलब्धि, राष्ट्रीय ऊर्जा परिषद में सात पुरस्कारों से सम्मानित

हरित ऊर्जा और तकनीकी नवाचार में देश में प्रथम स्थान

भविष्य की चुनौतियों से निपटने की रणनीति को मिली सराहना
मुंबई /दि.16- महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (महावितरण) ने नई दिल्ली में आयोजित 20वीं राष्ट्रीय ऊर्जा परिषद में सात पुरस्कार हासिल कर उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है. भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर काम करने वाली बिजली वितरण कंपनियों की श्रेणी ‘फ्यूचरिस्टिक डिस्कॉम’ में महावितरण को राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान मिला. इसके अलावा हरित ऊर्जा और कार्य प्रदर्शन में सुधार की श्रेणियों में भी कंपनी ने पहला स्थान हासिल किया.
इंडियन चेंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से 13 और 14 अक्टूबर को आयोजित इस परिषद में महावितरण को सेवाओं की गुणवत्ता एवं ग्राहक सशक्तीकरण में दूसरा, जबकि कार्यकुशल संचालन और तकनीक के उपयोग में तीसरा स्थान मिला. प्रभावशाली नवाचार के लिए भी कंपनी को विशेष सम्मान प्रदान किया गया. महावितरण के संचालक (संचालन) धनंजय औंढेकर ने 14 अक्टूबर को पुरस्कार स्वीकार किए. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन और ऊर्जा विभाग की अपर मुख्य सचिव आभा शुक्ला के नेतृत्व में राज्य के बिजली क्षेत्र में विभिन्न सुधार किए जा रहे हैं.
महावितरण के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक लोकेश चंद्र के नेतृत्व में कंपनी ने स्मार्ट मीटरिंग, डिजिटल तकनीक, ग्राहक सेवाओं और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है. राज्य की रिसोर्स अडेक्वेसी योजना के तहत 38 हजार मेगावाट से अधिक हरित ऊर्जा क्षमता जोड़ने की योजना है. इससे वर्ष 2030 तक महावितरण की हरित ऊर्जा हिस्सेदारी 13 प्रतिशत से बढ़कर 52 प्रतिशत होने की उम्मीद है. कंपनी के अनुसार, हरित ऊर्जा के कारण 2025 से 2030 की अवधि के लिए बहुवर्षीय बिजली दरों में 26 प्रतिशत तक कटौती घोषित की गई है.
मुख्यमंत्री सौर कृषि वाहिनी योजना 2.0 के तहत 16 हजार मेगावाट विकेंद्रित सौर ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है. अब तक 6,600 मेगावाट क्षमता की सौर परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं, जिससे 18 लाख से अधिक किसानों को दिन में बिजली मिल रही है. वहीं, ‘मागेल त्याला सौर पंप योजना’ के तहत 11 लाख 86 हजार ऑफ-ग्रिड सौर पंप स्थापित किए गए हैं. प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत भी राज्य में 13 लाख 12 हजार घरों पर कुल 3,115 मेगावाट क्षमता के सौर संयंत्र लगाए गए हैं.
महावितरण ने एआई आधारित बिजली मांग पूर्वानुमान प्रणाली के माध्यम से बिजली खरीद में 1,200 करोड़ रुपये से अधिक की बचत की है. इसके अलावा, नए बिजली कनेक्शन, लोड में बदलाव और बिल पर नाम बदलने जैसी सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदनों को स्वचालित मंजूरी दी जा रही है. बिजली चोरी के खिलाफ कार्रवाई में अप्रैल से सितंबर तक 133 करोड़ 32 लाख रुपये की बिजली चोरी उजागर की गई, जिसमें से 65 करोड़ 56 लाख रुपये की वसूली की गई है. इन उपलब्धियों के लिए महावितरण को राष्ट्रीय ऊर्जा परिषद में सात पुरस्कारों से सम्मानित किया गया.

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