मसालों में मिलावट नहीं चलेगी
तुकाराम मुंढे ने जारी किए कड़े निर्देश

* हल्दी, जीरा, तिल और सरसों के मसालों में मिलावट पर एफडीए सख्त
* नियमों के उल्लंघन पर सात साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का दावा
मुंबई/दि.15 – दूध और डेयरी उत्पादों में मिलावट के खिलाफ कार्रवाई के बाद अब महाराष्ट्र का अन्न एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) मसालों और मसाला उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है. एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने मसाला उत्पादकों, विक्रेताओं, थोक व्यापारियों और होटल संचालकों के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं. इनका उद्देश्य मसालों में मिलावट, प्रतिबंधित रंगों के इस्तेमाल और पैकेट पर भ्रामक दावे करने जैसी अनियमितताओं पर रोक लगाना है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार, हल्दी, मिर्च, जीरा, दालचीनी, काली मिर्च, खसखस, तिल और सरसों सहित विभिन्न मसालों तथा मसाला उत्पादों की गुणवत्ता पर निगरानी रखी जाएगी. एफडीए ने स्पष्ट किया है कि खाद्य पदार्थों में मिलावट कर नागरिकों के स्वास्थ्य को खतरे में डालने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
* मिलावट और कृत्रिम रंगों पर रोक
निर्देशों के तहत मसालों को आकर्षक रंग देने के लिए प्रतिबंधित कृत्रिम या औद्योगिक रंगों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा. मसालों में घटिया गुणवत्ता वाले अथवा अर्क निकालने के बाद बचे पदार्थों की मिलावट पर भी रोक लगाने पर जोर दिया गया है. मसालों की गुणवत्ता और शुद्धता बनाए रखने के लिए उत्पादकों तथा विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन करना होगा. मसालों के प्रसंस्करण और भंडारण के दौरान स्वच्छता बनाए रखना भी आवश्यक होगा. भंडारण स्थल साफ और सूखा रखने के साथ ही उत्पादों को दूषित होने से बचाने की व्यवस्था करनी होगी. मसालों के निर्जंतुकीकरण में इस्तेमाल होने वाले एथिलीन ऑक्साइड जैसे रसायन को लेकर भी खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होगा.
* पैकेट पर सही जानकारी देना जरूरी
मसालों के पैकेट पर उत्पादन और पैकिंग की तारीख सहित आवश्यक जानकारी स्पष्ट रूप से दर्ज करनी होगी. उत्पाद की गुणवत्ता, शुद्धता या विशेषताओं के बारे में झूठे अथवा उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाले दावे नहीं किए जा सकेंगे. वैध खाद्य लाइसेंस और लागू नियमों के अनुरूप कारोबार करना भी संबंधित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए जरूरी होगा. निर्देशों के दायरे में मसाला बनाने वाली इकाइयों के साथ ही विक्रेता, थोक व्यापारी और खाद्य पदार्थों में मसालों का इस्तेमाल करने वाले होटल व्यवसायी भी आएंगे. नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है.
* सात साल तक कारावास और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का उल्लेख
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत खाद्य पदार्थों में मिलावट और अन्य उल्लंघनों के लिए अपराध की प्रकृति तथा गंभीरता के अनुसार अलग-अलग दंड का प्रावधान है. संबंधित समाचार में दोषी पाए जाने पर एक से सात वर्ष तक कारावास और एक लाख से 10 लाख रुपये तक जुर्माने का उल्लेख किया गया है. हालांकि, प्रत्येक उल्लंघन पर यही दंड लागू होगा, ऐसा मानना उचित नहीं है. वास्तविक सजा संबंधित अपराध और लागू कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगी.




