श्रीमती नरसम्मा महाविद्यालय में भारतीय ज्ञान प्रणाली पर राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न
चार राज्यों के 198 प्राध्यापकों, शोधकर्ताओं और विद्वानों ने लिया हिस्सा

अमरावती/दि.9– संत गाडगेबाबा अमरावती विश्वविद्यालय, श्रीमती नरसम्मा कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय, जगद्गुरु श्री देवनाथ इंस्टीट्यूट ऑफ वैदिक साइंस एंड रिसर्च, नागपुर तथा कला, विज्ञान एवं वाणिज्य महाविद्यालय, चिखलदरा के संयुक्त तत्वावधान में 6 और 7 अक्टूबर को श्रीमती नरसम्मा महाविद्यालय में ‘भारतीय ज्ञान प्रणाली के वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक आयाम’ विषय पर द्वितीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया. इसमें चार राज्यों के 198 प्राध्यापकों, शोधकर्ताओं और विद्वानों ने सहभागिता की.
सम्मेलन का उद्घाटन रिद्धपुर स्थित मराठी भाषा विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. अविनाश आवलगावकर ने किया. उन्होंने संत साहित्य की ज्ञान परंपरा पर प्रकाश डाला. डॉ. यशोधन बोधनकर ने वेद-उपनिषद, गणित और खगोलशास्त्र सहित भारतीय ज्ञान की समृद्ध विरासत को आधुनिक शोध से जोड़ने की आवश्यकता बताई. युवा विचारक अंबरीश पुंडलिक ने ‘वंदे मातरम्’ के इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के वीरों के योगदान पर विचार रखे. दूसरे दिन डॉ. श्रेयस कुर्हेकर ने भारतीय ज्ञान प्रणाली को अध्ययन-अध्यापन और शोध में उपयोग करने के तरीकों पर मार्गदर्शन दिया, जबकि पवन गुप्ता ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता विषय पर व्याख्यान दिया. समापन सत्र में रायसोनी विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. विनायक देशपांडे ने पाठ्यक्रम में शामिल भारतीय ज्ञान प्रणाली के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया. महाविद्यालय में स्थापित भारतीय ज्ञान प्रणाली केंद्र के माध्यम से युवाओं को इस दिशा में प्रेरित करने की आवश्यकता भी व्यक्त की गई. सम्मेलन के समन्वयक प्रा. डॉ. संजय शामकुवर, प्राचार्य डॉ. राजेश चंदनपाट, प्रा. श्रीकांत कालीकर सहित विभिन्न गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे. सम्मेलन के दौरान भारतीय ज्ञान प्रणाली के विविध पहलुओं पर शोधपत्र प्रस्तुत किए गए और विद्वानों के बीच विचार-विमर्श हुआ.





