हे भगवान! हिंदी में 100 में से 23 विद्यार्थी फेल

संस्कृत ने सभी विषयों को पछाडा

* कक्षा दसवीं के बोर्ड नतीजे का विश्लेषण
* विद्यार्थियों का भाषा के प्रति रुझान सीमित
अमरावती/दि.8 – समस्त भारत में श्रीनगर से लेकर रामेश्वरम तक सहज संवाद के लिए आज भी हिंदी भाषा का सर्वाधिक उपयोग होता है. फिर भी हम सभी की उपेक्षा के कारण हिंदी भाषा विषय के रुप में पिछडती जा रही है. रोजमर्रा के संवाद में भी हिंदी का प्रयोग, उपयोग सीमित हो गया है. जिसके कारण अमरावती बोर्ड के आज घोषित कक्षा दसवीं के परिणाम भी इसी उपेक्षा को अधोरेखित कर रहे हैं. कक्षा दसवीं के 10 प्रतिशत विद्यार्थी परीक्षा में नाकाम रहे है. उनमें भी हिंदी प्रथम भाषा विषय में केवल 77 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण रहे. यह हकीकत हिंदी प्रेमियों के लिए चिंता का विषय हो सकती है.
* संस्कृत ने मारी बाजी
विषयों की बात करें तो पहले अंग्रेजी और गणित विद्यार्थियों का रिजल्ट खराब करते थे. अब भाषा के सब्जेक्ट भी विद्यार्थियों को प्रभावित कर रहे है. केवल गुजराती का अपवाद रहा. ऐसे ही संस्कृत विषय में प्राप्तांक बेहतर रहे है. संस्कृत को पिछले कुछ दशकों से स्कोरिंग विषय का सर्वनाम मिला हुआ है. इस बार भी संस्कृत में उत्तीर्ण विद्यार्थियों का प्रतिशत हिंदी, अंग्रेजी और मराठी से अधिक रहा. 98.94 रिजल्ट संस्कृत में रहा है. संस्कृत और अन्य क्षेत्रीय भाषा का तालमेल भी बेहतर अंक जुटा गया है. मराठी-संस्कृत का परीक्षाफल 94, हिंदी-संस्कृत का परीक्षाफल 98.57 प्रतिशत रहा.
* बेहतर हुए अंग्रेजी के नतीजे
भाषा विषय में पहले अंग्रेजी विदर्भ के विद्यार्थियों की कमर तोड देती थी, अब अंग्रेजी भाषा में सभी विषय सीखने की जुगत में विद्यार्थियों पर अच्छी अंग्रेजी का दबाव बढा है. जिससे अंग्रेजी विषय के रुप में अच्छा स्कोर विद्यार्थी कर रहे है. अमरावती संभाग में 99 प्रतिशत रिजल्ट अंग्रेजी भाषा विषय का रहा. इस बारे में अमरावती मंडल ने शहर के विद्यालयों के प्रधानाचार्यो से चर्चा की तो उन्होंने बहुत स्पष्ट कहा कि, विषय कोई भी हो, उनके यहां सभी की तैयारी बराबर और भरपूर कराई जाती है.
* 620 शालाओं का शत-प्रतिशत रिजल्ट
इस बीच अमरावती बोर्ड द्वारा दिए गए आंकडों के मुताबिक संभाग में 620 शालाओं का कक्षा दसवीं का रिजल्ट 100 प्रतिशत रहा है. अर्थात इन शालाओं में एक भी विद्यार्थी फेल नहीं हुआ. अमरावती जिले में ऐसी 158, बुलढाणा में 164, यवतमाल में 129, अकोला में 107 और वाशिम में 62 शालाएं रही. उसी प्रकार 90 प्रतिशत से अधिक रिजल्ट वाली 952 स्कूल रहने की जानकारी देते हुए बताया गया कि, झिरो प्रतिशत रिजल्ट की केवल 13 स्कूल रही है. उनमें अमरावती के सर्वाधिक 7 विद्यालयों का समावेश है.

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