प्रवीण पोटे ने फिर इतिहास रचा
अमरावती विधान परिषद चुनाव में प्रवीण पोटे पाटील की प्रचंड जीत

* निकाय क्षेत्र से लगातार तीसरी बार चुनाव जीतने का कीर्तिमान
* लगातार दूसरी बार ‘क्लीन स्वीप’ करते हुए जीता चुनाव
* 421 वैध वोटों में से रिकॉर्ड 390 वोट किए हासिल
* वंचित प्रत्याशी नीलेश विश्वकर्मा को मिले 31 वोट
* कांग्रेस प्रत्याशी हर्षजीत देशमुख को एक भी वोट नहीं मिला
* 6 वोट अवैध करार देकर किए गये खारिज
अमरावती/दि.22 – अमरावती के स्थानीय स्वायत्त निकाय निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद की सीट हेतु विगत 18 जून को कराए गये चुनाव एवं मतदान की मतगणना आज 22 जून को स्थानीय जिलाधीश कार्यालय के नियोजन भवन में हुई. मतगणना के बाद घोषित किए गये चुनावी नतीजे के मुताबिक भाजपा प्रत्याशी प्रवीण पोटे पाटिल ने कुल वैध 421 वोटो में से 390 वोट हासिल करते हुए पूरी तरह से एकतरफा जीत दर्ज की. इसके साथ ही भाजपा प्रत्याशी प्रवीण पोटे पाटिल ने अमरावती के स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र से लगातार तीसरी बार विधायक विधान परिषद सदस्य निर्वाचित होने में सफलता प्राप्त की. साथ ही साथ लगातार दूसरी बार ‘क्लीन स्वीप’ करते हुए चुनाव जीतने का कीर्तिमान भी रचा.
बता दे कि विगत 18 जून को विधान परिषद के चुनाव हेतु कराए गये मतदान की प्रक्रिया में जिले के कुल 451 में से 427 मतदाता सदस्यों द्बारा हिस्सा लिया गया था. जिनके द्बारा मतपत्रिका पर दर्ज किए गये मतों को कडी सुरक्षा व्यवस्था के बीच स्थानीय जिलाधीश कार्यालय में बने स्ट्रांग रूम में लाकर रखा गया था और जहां से आज सुबह 8 बजे सभी मतपेटियों को तमाम नियमों का पालन करते हुए बाहर निकाला गया तथा नियोजन भवन में बनाए गए मतगणना स्थल पर सभी मतपेटियों को लाकर उनमें से सभी मतपत्रिकाएं बाहर निकाली गई तथा 25-25 मतपत्रिका के गठ्ठे बनाने के उपरांत वोटों की गिनती करनी शुरू की गई. इस समय सबसे पहले वैध एवं अवैध वोटों की गिनती करते हुए 427 में से 6 वोटों को अवैध करार देकर खारिज किया गया तथा कुल 421 वोटों को वैध मानते हुए उनकी गिनती करनी शुरू की गई.
बता दे कि निकाय निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में विधान परिषद के लिए मतदाता सदस्यों को मतपत्रिका पर विशेष रंग की स्याही वाली पेन से उम्मीदवार के नाम के सामने पसंदक्रम को दर्ज करना था. क्योकि मतपत्रिका पर केवल 3 ही नाम थे. जिनके नामों के सामने अंकों में पहली, दूसरी व तीसरी पसंद का क्रमांक लिखना था. चूकि इस चुनाव में पडे कुल 427 वोटों में से 421 वोट वैध पाए गये थे. इसके चलते किसी भी प्रत्याशी की जीत हेतु पहली पसंद के 211 वोटों का कोटा तय किया गया था. जिसकी ऐवज में भाजपा प्रत्याशी प्रवीण पोटे पाटिल द्बारा पहली पसंद के रिकॉर्ड 390 वोट हासिल किए गये. जबकि उनके निकटतम प्रतिद्बंदी एवं वंचित बहुजन आघाडी के प्रत्याशी डॉ. नीलेश विश्वकर्मा ने पहली पसंद के 31 वोट प्राप्त किए. खास बात यह रही कि चुनावी मैदान में रहनेवाले कांग्रेस प्रत्याशी हर्षजीत देशमुख को एक भी वोट नहीं मिला.
मतगणना प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद निर्वाचन निर्णय अधिकारी एवं जिलाधिकारी आशिष येरेकर ने प्रवीण पोटे पाटील को विजयी होने का आधिकारिक प्रमाणपत्र प्रदान किया. जिलाधिकारी कार्यालय स्थित नियोजन भवन में संपन्न हुई मतगणना प्रक्रिया के दौरान चुनाव पर्यवेक्षक एवं कामगार आयुक्त डॉ. ह. पि. तुम्मोड उपस्थित रहे. इस अवसर पर विभागीय आयुक्त नयना गुंडे, अतिरिक्त जिलाधिकारी गोविंदा दानेज, निवासी उपजिलाधिकारी संतोष काकड़े, उपजिला निर्वाचन अधिकारी शिवाजी शिंदे, उपजिलाधिकारी विवेक जाधव, ज्ञानेश्वर घ्यार, प्रसेनजित चव्हाण, उपविभागीय अधिकारी अनिल भटकर तथा दादासाहेब दराडे सहित अनेक अधिकारी मौजूद थे.
भाजपा प्रत्याशी प्रवीण पोटे पाटील की इस एकतरफा जीत को अमरावती जिले की स्थानीय स्वशासन संस्थाओं में भाजपा की मजबूत पकड़ का संकेत माना जा रहा है. चुनाव परिणाम ने विपक्षी दलों के लिए भी कई राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं, विशेषकर कांग्रेस उम्मीदवार को एक भी मत न मिलने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है.
बता दें कि अमरावती स्थानीय स्वायत्त निकाय निर्वाचन क्षेत्र मेें विधान परिषद के चुनाव हेतु कुल 453 मतदाता संख्या थी. जिसमें से दर्यापुर नगर परिषद और धारणी नगर पंचायत के 1-1 नगरसेवक की निर्वाचन काल के दौरान मृत्यु हो जाने के चलते मतदाता संख्या 451 ग्राह्य मानी गई. इसमें से भाजपा के पास अपने खुद के 150 मतदाता सदस्य थे. वहीं महायुति में शामिल अजीत पवार गुट वाली कांग्रेस के 33, युवा स्वाभिमान पार्टी के 26, प्रहार पार्टी के 21 एवं शिंदे गुट वाली शिवसेना के 18 सदस्यों को जोडने पर महायुति के पास कुल 248 वोट हो रहे थे. जो जीत के लिहाज से काफी थे. वहीं दूसरी ओर प्रमुख प्रतिद्बंदी दल रहनेवाली कांग्रेस के पास 120 मतदाता सदस्य थे. जबकि कांग्रेस के साथ मविआ में शामिल सेना उबाठा के पास 22 व शरद पवार गुट वाली राकांपा के पास 11 सदस्य थे. इसके अलावा एमआयएम के पास 16 सदस्य रहने के साथ ही जिले में बसपा, समाजवादी पार्टी, वंचित बहुजन आघाडी के सदस्य एवं निर्दलीय सदस्यों की संख्या 36 रही. यानी भाजपा विरोधी वोटों की कुल संख्या 205 थे. इसे देखते हुए भी भाजपा प्रत्याशी की जीत तय मानी जा रही थी. हालांकि अब चुनावी नतीजों को देखते हुए यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा विरोधी दलों के भी कई सदस्यों ने भाजपा प्रत्याशी प्रवीण पोटे पाटिल के पक्ष में ही अपनी पहली पसंद का वोट डाला है. जिसके चलते भाजपा प्रत्याशी प्रवीण पोटे पाटिल को मिले पहली पसंद के वोटों की संख्या 390 पर जा पहुंची और वे लगातार दूसरी बार क्लीन स्वीप करते हुए चुनाव जीतने में सफल रहने के साथ ही लगातार तीसरी बार अमरावती के निकाय निर्वाचन क्षेत्र से विधान परिषद के लिए निर्वाचित हुए है.

* हर्षजीत ने बनाया ‘डक आउट’ का अनूठा रिकॉर्ड
अमरावती निकाय निर्वाचन क्षेत्र से इस बार हुए विधान परिषद के चुनाव में खास बात यह रही कि कांग्रेस प्रत्याशी हर्षजीत देशमुख को एक भी कांग्रेसी नगरसेवक का वोट नहीं मिला. जिसके चलते कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर हर्षजीत देशमुख ने भी विधान परिषद के चुनाव में ‘शून्य’ वोट हासिल करने का कीर्तिमान रचा. उल्लेखनीय है कि यह पहलीबार हुआ है, जब विधान परिषद के किसी चुनाव में कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी के प्रत्याशी को एक भी मतदाता का वोट हासिल नहीं हुआ. हालांकि इससे यह तो जरूर स्पष्ट हो गया कि शहर सहित जिला कांग्रेस के नेताओं व पदाधिकारियों की अपने नगरसेवकों पर अब भी पकड काफी हद तक मजबूत है. वहीं अब हर कोई यह जानना चाह रहा है कि आखिर कांग्रेसी नगरसेवकों द्बारा किसके पक्ष में अपनी पहली पसंद के वोट डाले गये.

* ‘वंचित’ के विश्वकर्मा को मिले 31 वोट किसके ?
खास बात यह भी है कि विधान परिषद के चुनाव में भाजपा विरोधी दलों में से किसी भी दल ने किसी भी प्रत्याशी के लिए अपना समर्थन घोषित नहीं किया था तथा किसी प्रत्याशी के पक्ष में वोट डालने के लिए व्हीप भी जारी नहीं किया था. बल्कि कांग्रेस को छोडकर शेष दलों ने अपने मतदाता सदस्यों से अपनी अंतरात्मा की आवाज पर वोट डालने हेतु कहा था. खास बात यह रही कि जहां एक ओर विधान परिषद के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी प्रवीण पोटे की दावेदारी को शुरू से मजबूत माना जा रहा था. वहीं दूसरी ओर ‘हर्षजीत एपीसोड’ केवल सभी की निगाहें इस बात की ओर भी लगी हुई थी कि अब चुनावी मैदान में रहनेवाले वंचित बहुजन आघाडी के प्रत्याशी डॉ. नीलेश विश्वकर्मा द्बारा भाजपा विरोधी वोटों में से कितने वोट हासिल किए जाते है. क्योंकि अमरावती जिले में वंचित बहुजन आघाडी के खुद के वोटों की संख्या काफी हद तक नगण्य कही जा सकती है. लेकिन हैरत अंगेज तरीके से डॉ. नीलेश् विश्वकर्मा ने 31 वोट हासिल किए है. जिसके चलते अब सभी की दिलचस्पी इस बात को लेकर है कि नीलेश विश्वकर्मा को किन पार्टियों के नगरसेवकों की ओर से अपनी पहली पसंद के वोट दिए गये.
* कांग्रेस ने तटस्थ रहकर अपने ही प्रत्याशी का किया था ‘बायकॉट’
– पार्टी के अधिकांश पार्षदों ने किया निर्देश का ‘फिफ्टी-फिफ्टी’ पालन
यहां यह भी विशेष उल्लेखनीय है कि अमरावती निकाय निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी द्बारा नागपुर निवासी हर्षजीत देशमुख को अपना प्रत्याशी बनाया गया था तथा हर्षजीत देशमुख ने कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर अपना नामांकन भी दाखिल किया था. परंतु नामांकन वापसी का समय समाप्त होते ही हर्षजीत देशमुख अचानक ही चुनावी परिदृश्य से गायब हो गये थे. जिसके बाद जानकारी सामने आयी थी कि वे बीमार होकर नागपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज हेतु भर्ती है. इसके साथ ही कांग्रेस प्रत्याशी हर्षजीत देशमुख ने एक तरह से खुद को विधान परिषद के चुनाव से अलग कर लिया था. जिसके चलते कांग्रेस में स्थानीय स्तर पर अच्छा खासा हडकंप मचा था और कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने हर्षजीत देशमुख पर प्रतिस्पर्धी प्रत्याशी के दवाब में आकर चुनावी मैदान से हटने का आरोप भी लगाया था. साथ ही साथ चुनावी मैदान में अपना प्रत्याशी नहीं रहने की बात को ग्राह्य मानते हुए शहर सहित जिला कांग्रेस ने अपने सदस्य मतदाताओं को विधान परिषद के चुनाव में तटस्थ रहने का निर्देश दिया था. जिसके तहत शहर कांग्रेस कमेटी ने अमरावती मनपा के सदस्यों हेतु बाकायदा व्हीप भी जारी किया था. हालांकि कांग्रेस की ओर से जारी व्हीप एवं निर्देश का शहर सहित जिले में कांग्रेसी नगरसेवकों द्बारा जमकर उल्लंघन भी किया गया. जहां एक ओर अमरावती मनपा के 17 में से 6 कांग्रेसी पार्षदों तथा कांग्रेस के गुट में शामिल वंचित आघाडी के एक पार्षद द्बारा मतदान में हिस्सा लिया गया.् वहीं दूसरी ओर जिले की 10 नगर परिषदों व 4 नगर पंचायतों में भी कांग्रेस के कई नगरसेवकों ने मतदान की प्रक्रिया में हिस्सा लिया था. लेकिन इसमें से एक भी नगरसेवक का वोट कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में नही पडा. जिसके चलते यह स्पष्ट हो गया कि पार्टी के निर्देश की अवहेलना करते हुए वोटिंग में हिस्सा लेने के बावजूद कांग्रेस के नगरसेवकों ने हर्षजीत देशमुंख को वोट नहीं देते हुए पार्टी के निर्देश का ‘फिफ्टी-फिफ्टी’ पालन जरूर किया.





