सई परांजपे को विष्णुदास भावे गौरव पदक घोषित

5 नवंबर को रंगभूमि दिवस पर होगा सम्मान

* 30 हजार रुपये नकद और स्मृतिचिह्न भी मिलेगा
सांगली /दि.9- वरिष्ठ नाटककार, लेखिका और निर्देशिका सई परांजपे को वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित विष्णुदास भावे गौरव पदक प्रदान किया जाएगा. पांच नवंबर को रंगभूमि दिवस पर नाट्य सम्मेलन के अध्यक्ष मोहन जोशी के हाथों उन्हें सम्मानित किया जाएगा. अखिल महाराष्ट्र नाट्य विद्यामंदिर समिति के अध्यक्ष डॉ. शरद कराले ने शुक्रवार को पत्रकार परिषद में यह जानकारी दी. पुरस्कार के स्वरूप में गौरव पदक, 30 हजार रुपये नकद, स्मृतिचिह्न, शाल और श्रीफल शामिल हैं.
बता दे कि, सई परांजपे ने बाल नाटकों, प्रौढ़ रंगमंच, नाट्यलेखन, निर्देशन और अनुवाद के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है. आठ वर्ष की उम्र में उनकी पहली पुस्तक ‘मुलांचा मेवा’ प्रकाशित हुई थी. बच्चों के लिए लिखे उनके नौ नाटकों में ‘पक्ष्यांचे कवीसंमेलन’, ‘पत्ते नगरीत’, ‘झाली काय गंमत’, ‘जादूचा शंख’ और ‘शेपटीचा शाप’ प्रमुख हैं. ‘झाली काय गंमत’ और ‘शेपटीचा शाप’ को राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ पुस्तक के पुरस्कार मिले. प्रौढ़ रंगभूमि पर ‘नांदा सौख्यभरे’, ‘सख्खे शेजारी’, ‘जास्वंदी’, ‘सोयरीक’, ‘माझा खेळ मांडू दे’ और ‘मोगरा फुलला’ जैसे नाटकों से उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई. ‘जास्वंदी’ को 1978 में महाराष्ट्र सरकार का उत्कृष्ट नाट्यनिर्मिति पुरस्कार मिला, जबकि ‘सोयरीक’ को भी उत्कृष्ट निर्माण के लिए सम्मानित किया गया.
महाराष्ट्र की लोककला तमाशा को हिंदी रंगमंच तक पहुंचाने में भी सई परांजपे की अहम भूमिका रही. दिल्ली में उन्होंने ‘एक तमाशा अच्छा खासा’ और ‘धिक् ताम’ जैसे नाटकों का लेखन व निर्माण किया. पति अरुण जोगलेकर के साथ ‘नाट्यद्वयी’ संस्था के माध्यम से उन्होंने नाट्यनिर्माण किया. उन्होंने विदेशी नाटकों के मराठी रूपांतरण भी किए, जिनमें नोएल कॉवर्ड के ‘ब्लाइथ स्पिरिट’ का ‘इडा पिडा टळो’ और नील साइमन के ‘द ऑड कपल’ का ‘तुझी माझी जोडी जमली रे’ शामिल हैं. विजय तेंडुलकर के ‘गिधाडे’ के हिंदी रूपांतरण ‘गिद्ध’ का निर्देशन भी उन्होंने किया. कला क्षेत्र में योगदान के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2006 में सई परांजपे को पद्मभूषण से सम्मानित किया था. वर्ष 2025 में उन्हें ‘झी नाट्य गौरव पुरस्कार’ मिला. विष्णुदास भावे गौरव पदक उनके दीर्घकालीन नाट्य योगदान का एक और सम्मान है.

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