डफरिन में शॉर्ट सर्किट से वेंटिलेटर में धमाका

हाईलेवल जांच रिपोर्ट में हादसे की संभावित वजह का खुलासा

तीन नवजातों की मौत, शिलर और एओवी को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश
अमरावती /दि.2– जिला महिला अस्पताल (डफरिन) के एनआईसीयू में 24 अगस्त को वेंटिलेटर में हुए विस्फोट और आग की घटना की संभावित वजह हाईलेवल जांच समिति की रिपोर्ट में सामने आई है. रिपोर्ट के अनुसार, वेंटिलेटर के अंदर इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी होगी. इसके बाद बंद हिस्से में जली और बिना जली गैसों का दबाव बढ़ने से विस्फोट होने की संभावना जताई गई है. इस हादसे में तीन नवजात बच्चों की मौत हुई थी.
हालांकि, घटना को एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद सरकार ने जांच समिति की रिपोर्ट आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं की है. इसलिए हादसे की अंतिम और आधिकारिक वजह अब भी स्पष्ट नहीं है. वेंटिलेटर की आपूर्ति करने वाली शिलर कंपनी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, इस बारे में भी सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है.
* दबाव बढ़ने के बाद हुआ विस्फोट
पूर्व पालकमंत्री डॉ. सुनील देशमुख ने दावा किया है कि उन्होंने जांच रिपोर्ट गोपनीय तरीके से प्राप्त कर मीडिया के सामने रखी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि वेंटिलेटर के भीतर इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट से आग लगने की संभावना है. जांच के मुताबिक, आग लगने के बाद वेंटिलेटर के अंदर मौजूद बंद जगह में जली और बिना जली गैसों का दबाव काफी बढ़ गया. इस दौरान दहन की प्रक्रिया शुरू हुई. जब अंदर का दबाव वेंटिलेटर की निर्धारित क्षमता से अधिक बढ़ गया, तो वेंटिलेटर में विस्फोट होने की संभावना जताई गई है. जांच समिति ने इस घटनाक्रम को हादसे की संभावित वजह के तौर पर दर्ज किया है. हालांकि, जब तक सरकार जांच रिपोर्ट को आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं करती, तब तक इसे अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता.
* शिलर और एओवी को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश
जांच रिपोर्ट में शिलर कंपनी के वेंटिलेटर की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2022 में भी शिलर कंपनी के एक वेंटिलेटर में आग लगने की घटना हुई थी. इसके आधार पर जांच समिति ने वेंटिलेटर के डिजाइन और सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है. इसके अलावा वेंटिलेटर मैपिंग की जिम्मेदारी संभालने वाली एओवी कंपनी की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं. समिति के अनुसार, एओवी अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रही. इसी आधार पर जांच समिति ने शिलर और एओवी दोनों कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश की है.
* रिपोर्ट पर सरकार के फैसले का इंतजार
जांच समिति की रिपोर्ट सरकार को सौंपे करीब एक माह हो चुका है. इसके बावजूद रिपोर्ट में की गई सिफारिशों पर सरकार ने क्या निर्णय लिया, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है. हादसे में तीन नवजातों की मौत के बाद अब जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने, जिम्मेदारी तय करने और संबंधित कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठ रही है.

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