वाहन फिटनेस प्रमाणपत्र घोटाले में 300 आरटीओ अधिकारियों को नोटिस
735 अधिकारी-निरीक्षक जांच के दायरे में

* नमूना 38 और 38ए जारी करने में नियमों की अनदेखी का मामला
मुंबई /दि.2- महाराष्ट्र में वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद परिवहन विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है. परिवहन आयुक्त राजेश नार्वेकर ने राज्य के करीब 300 आरटीओ अधिकारियों और कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं. वहीं, इस पूरे मामले में 735 अधिकारी एवं मोटर वाहन निरीक्षक जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं. यह मामला वाहनों के लिए जारी किए जाने वाले नमूना 38 और नमूना 38ए से जुड़ा है. इन प्रमाणपत्रों को जारी करने में नियमों के उल्लंघन की शिकायतें मिलने के बाद सरकार के निर्देश पर जांच समिति गठित की गई थी.
* 2024 से 2026 तक के प्रमाणपत्रों की जांच
जांच समिति ने 1 सितंबर 2024 से 5 मार्च 2026 तक राज्य के विभिन्न परिवहन कार्यालयों तथा निजी अधिकृत परीक्षण केंद्रों द्वारा जारी किए गए नमूना 38 और नमूना 38ए प्रमाणपत्रों की जांच की. समिति ने अपनी रिपोर्ट 3 जून 2026 को प्रशासन विभाग को सौंप दी. जांच में नियमों के उल्लंघन के पांच प्रमुख प्रकार सामने आने की जानकारी दी गई है.
* इन मामलों में मिली अनियमितताएं
नमूना 38ए जारी होने के बाद निर्धारित 14 दिनों के भीतर मूल पंजीयन प्राधिकरण द्वारा नमूना 38 जारी नहीं किए गए, बल्कि विलंब से प्रमाणपत्र जारी किए गए. महाराष्ट्र में मूल पंजीयन प्राधिकरण से नमूना 38 जारी किए बिना दूसरे परिवहन कार्यालय से वाहनों को प्रमाणित किया गया, जबकि दूसरे राज्य से नमूना 38ए जारी किया जा चुका था. राष्ट्रीय स्तर पर लाइसेंस प्राप्त कुछ मालवाहक वाहनों में वीएलटीडी नहीं होने के बावजूद नमूना 38 जारी किए गए. 1 जनवरी 2019 के बाद निर्मित कुछ यात्री वाहनों में वीएलटीडी नहीं होने के बावजूद प्रमाणपत्र जारी किए गए. परिवहन वाहनों में स्पीड लिमिटींग डिवाईस नहीं होने के बावजूद नमूना 38 जारी किए गए.
* लापरवाही के लिए मांगा जवाब
जारी किए गए नोटिस में कहा गया है कि प्रथमदृष्टया संबंधित अधिकारियों द्वारा अपने कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरते जाने और केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के साथ केंद्र व राज्य सरकार तथा परिवहन आयुक्त कार्यालय के निर्देशों का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आती है. संबंधित अधिकारियों से तत्काल जवाब मांगा गया है. उनसे यह भी स्पष्ट करने को कहा गया है कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव सरकार को क्यों न भेजा जाए. जांच और नोटिस की कार्रवाई के बाद अब संबंधित अधिकारियों के जवाब के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई तय होने की संभावना है.





