महाराष्ट्र में हिंदी का आक्रमण बर्दाश्त नहीं करेंगे
मनसे नेता संदीप देशपांडे की धमकी

मुंबई/दि 6- महाराष्ट्र के अधिकारियों को हिंदी भाषा क्यों सीखनी चाहिए, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए. उन्हें मराठी भाषा आना अपेक्षित है. पर्दे के पीछे से हिंदी भाषा थोपने की कोशिश सरकार कर रही है, इसका हम विरोध करते हैं, ऐसा मनसे के मुंबई शहराध्यक्ष संदीप देशपांडे ने कहा है. सरकार ने यह परीक्षा रद्द करनी चाहिए, अन्यथा परीक्षा केंद्र के बाहर जो हंगामा होगा उसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी, ऐसी चेतावनी देशपांडे ने दी है.
संदीप देशपांडे ने कहा कि महाराष्ट्र में जो लोग रहते हैं, उन्होंने मराठी सीखनी चाहिए और अधिकारियों से मराठी में बात करनी चाहिए. अधिकारियों को हिंदी भाषा सीखकर उनसे हिंदी में बात करने की अपेक्षा नहीं है. दिल्ली में बैठे भैय्यों को खुश करने की कोशिश राज्य सरकार की ओर से की जा रही है.
* हिंदी भाषा की परीक्षा क्यों?
संदीप देशपांडे ने कहा कि राज्य सरकार ने राजपत्रित और अराजपत्रित अधिकारियों के लिए हिंदी भाषा की परीक्षा 28 जून को रखी है. इसके लिए 20 मई तक आवेदन पत्र भरना है. एक तरफ हम लोगों से कह रहे हैं कि मराठी भाषा आनी चाहिए और दूसरी तरफ प्रशासनिक अधिकारियों के लिए हिंदी भाषा की परीक्षा क्यों रखी जा रही है? इससे क्या हासिल होगा? महाराष्ट्र की राजभाषा मराठी ही है, यहां अधिकारियों को हिंदी भाषा आना जरूरी नहीं है. जिनका अधिकारियों के पास काम है, उन्हें मराठी आना जरूरी है.
* हिंदी भाषा न थोपी जाए
संदीप देशपांडे ने कहा कि हिंदी भाषा की परीक्षा हमारे अधिकारियों पर थोपकर हिंदी भाषा का प्रचार और प्रसार करने की कोशिश अगर सरकार कर रही है तो उसका हम तीव्र शब्दों में विरोध करते हैं. हमारी सरकार से विनती है कि ऐसी परीक्षा अधिकारियों के लिए अनिवार्य न की जाए और अगर की गई तो 28 जून को हिंदी भाषा की परीक्षा केंद्र पर तमाशा होगा, उसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी. महाराष्ट्र के अधिकारियों को हिंदी भाषा की जरूरत क्या है? क्या उन्हें उत्तर प्रदेश या बिहार भेजा जाएगा? ऐसा सवाल देशपांडे ने किया है.





