अन्य आरक्षित वर्गो को भी 6 माह की मोहलत का लाभ क्यों नही?
जाती वैध प्रमाणपत्र पर हाईकोर्ट का सरकार से सवाल

नागपुर/दि.27- राज्य सरकार ने यदि एसबीसी और ओबीसी विद्यार्थियों को प्रवेश के 6 महिने के भीतर जाती और जाती वैधता प्रमाणपत्र जमा करने की मोहलत दे दी, तो अन्य आरक्षित वर्ग के विद्यार्थियों को भी यह मोहलत क्यों नहीं मिलनी चाहिए? यह सवाल मुंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने उठाया है.
कोर्ट में अनुसूचित जनजाती का दावा करने वाले विद्यार्थी को बीना जाती वैधता प्रमाणपत्र के बीटेक में अस्थायी प्रवेश देने का निर्देश दिया है. न्यायमुर्ती उर्मिला जोशी-फालके और न्यायमुर्ति राजु वाकोडे की खंडपीठ ने तन्मय नागोसे की याचिका पर यह आदेश दिया. तन्मय का अनुसूचित जनजाती (माना) के रूप में जाती दावा सत्यापन के लिए 16 अक्तुंबर 2025 को जात समिति के पास भेजा गया था. लेकिन उस पर अब तक निर्णय नहीं हुआ था. इस बीच उसने एमएचटी-सीईटी और जेईई- 2026 उत्तीर्ण कर बीटेक में प्रवेश हासिल किया. 14 अगस्त को कॉलेज आवंटित होने के बाद जब उससे जाती प्रमाणपत्र मांगा गया तो उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.
* तीन महिने में निर्णय लेने का निर्देश
सुनवाई में सरकारी वकील ने आश्वासन दिया कि, जाती जांच समिति तीन महिने में तन्मय के जाती दावे पर निर्णय करेंगी.कोर्ट ने सीईटी सेल को निर्देश दिया कि, तन्मय अन्य पात्रता पूरी करता है तो जाती वैधता प्रमाणपत्र पर जोर दिए बिना उसे प्रथम वर्ष बीटेक कम्प्युटर इंजिनिअरींग में स्थायी प्रवेश दिया जाए यह प्रवेश जांच समिति के जाती दावे पर लिए जानेवाली अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगा.





