महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक महिलाओं के श्रम और अधिकारों का वास्तविक सम्मान

विधायक सुलभा खोडके ने महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक-2026 पर रखे विचार

* विधानसभा में उठाई विधेयक हेतु आसान प्रक्रिया और प्रभावी क्रियान्वयन की मांग
मुंबई/ दि. 3- महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में प्रस्तुत ’महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक-2026’ पर चर्चा करते हुए अमरावती की विधायक सुलभा संजय खोडके ने कहा कि यह विधेयक महिलाओं के श्रम, समर्पण और अधिकारों को वास्तविक सम्मान देने वाला ऐतिहासिक एवं क्रांतिकारी कदम है. उन्होंने कहा कि वर्षों से खेती में पुरुषों के बराबर मेहनत करने वाली महिलाओं को किसान के रूप में कानूनी पहचान नहीं मिल पाई थी, लेकिन यह विधेयक उस ऐतिहासिक अन्याय को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है.
विधायक सुलभा खोडके ने कहा कि राज्य सरकार ने महिला सशक्तिकरण के लिए अनेक योजनाएं और कानून बनाए हैं, जिनसे महिलाओं को आर्थिक मजबूती मिली है. इसके बावजूद खेतों में बुवाई से लेकर कटाई, पशुपालन, दुग्ध व्यवसाय, मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन और कृषि उपज को बाजार तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली महिलाओं को किसान का दर्जा नहीं मिला. उन्होंने कहा कि किसान परिवार की असली रीढ़ महिला ही होती है, लेकिन उनके श्रम को कभी उचित पहचान नहीं मिली. उन्होंने विदर्भ में किसान आत्महत्याओं के कठिन दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय महिलाओं ने परिवारों को संभालने और खेती को आगे बढ़ाने का काम किया. आज भी बड़ी संख्या में महिलाएं प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा दे रही हैं, पारंपरिक बीजों का संरक्षण कर रही हैं और टिकाऊ कृषि व्यवस्था को मजबूत बना रही हैं.
विधायक सुलभा खोडके ने कहा कि इस विधेयक के तहत जिन महिलाओं के नाम पर कृषि भूमि नहीं है, लेकिन वे खेती या उससे जुड़े कार्यों में सक्रिय हैं, उन्हें भी ’महिला किसान’ के रूप में कानूनी मान्यता और प्रमाणपत्र दिया जाएगा. उन्होंने सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हुए सुझाव दिया कि ग्राम पंचायत स्तर पर प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी हो तथा अनावश्यक दस्तावेजों की बाध्यता न रखी जाए. उन्होंने यह भी मांग की कि महिला किसानों को सीधे बैंक ऋण, कृषि अनुदान, बीज, उर्वरक, फसल बीमा, सरकारी योजनाओं और बाजार सुविधाओं का लाभ प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराया जाए. इसके लिए प्रत्येक जिले में महिला कृषि सलाह केंद्र स्थापित कर प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन की व्यवस्था की जानी चाहिए. साथ ही आधुनिक कृषि तकनीक एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित खेती के लिए विशेष कौशल विकास प्रशिक्षण भी महिलाओं को दिया जाए.
विधायक सुलभा खोडके ने आदिवासी, एकल, लघु एवं सीमांत महिला किसानों के लिए अलग प्रावधान करने, स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा, वृद्धावस्था पेंशन तथा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने की भी मांग की. उन्होंने कहा कि जो महिलाएं शहर में रहती हैं लेकिन गांव जाकर खेती करती हैं, उन्हें भी महिला किसान प्रमाणपत्र प्राप्त करने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि विधेयक में महिला किसानों तक ऋण, तकनीक, बाजार, परिवहन, भंडारण तथा अन्य कृषि सेवाएं पहुंचाने के लिए डिजिटल व्यवस्था विकसित करने का प्रावधान किया गया है. इसकी प्रभावी निगरानी के लिए सरकार हर वर्ष विधानसभा में क्रियान्वयन रिपोर्ट प्रस्तुत करे, ताकि कमियों को समय रहते दूर किया जा सके.
अपने संबोधन के अंत में विधायक सुलभा खोडके ने विश्वास व्यक्त किया कि महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तिकरण विधेयक-2026 राज्य में महिला सशक्तिकरण के नए युग की शुरुआत करेगा और महिलाओं को कृषि क्षेत्र की निर्णय प्रक्रिया में सम्मानजनक स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. उन्होंने इस ऐतिहासिक विधेयक के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री अजित पवार तथा कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे को बधाई भी दी.

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