शिक्षाधिकारी की उदासीनता पर हाईकोर्ट के खडे बोल
अमरावती मामले में कडी कार्रवाई करने के सचिव को दिए निर्देश

अमरावती/दि.9 – शालेय कर्मचारियों की शिकायतों का निराकरण करने के संदर्भ में शिक्षाधिकारी द्बारा उदासीन व लापरवाह रवैया अपनाए जाने के चलते मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने गत रोज हुई सुनवाई के दौरान अपनी नाराजगी जताते हुए जमकर खडे बोल सुनाए्. साथ ही कहा कि ऐसे मामले बार-बार सामने आ रहे हैं. शिक्षाधिकारी की उदासीनता ही अदालत में बडे पैमाने पर दाखिल होनेवाली याचिकाओं की सबसे बडी वजह है. कामकाज में सुधार होने की उम्मीद के चलते समय-समय पर आवश्यक निर्देश दिए गये है. लेकिन दुर्भाग्य से शिक्षाधिकारी के व्यवहार में कोई फर्क नहीं पडा, ऐसा भी अदालत का कहना रहा.
इस मामले पर न्यायमूर्ति अनिल पानसरे व न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की दो सदस्यीय खंडपीठ के सामने सुनवाई हुई. अदालत द्बारा 19 जनवरी 2026 को दिए गये आदेशानुसार अमरावती के शालेय कर्मचारी उज्वल भोंडवे को एक प्रस्ताव में रहनेवाली त्रृटियां दूर करने की परंतु सातपुडा कल्याण संस्था के अध्यक्ष तथा सातपुडा माध्यमिक विद्यालय के मुख्याध्यापक द्बारा उन्हें कोई जरूरी जानकारी ही नहीं दी गई. साथ ही अमरावती जिला परिषद के माध्यमिक शिक्षाधिकारी ने भी इस संदर्भ में हुई आवश्यक कार्रवाई नहीं की. जिसके चलते भोंडवे को एक बार फिर अदालत में गुहार लगानी पडी. जिनकी याचिका पर विचार करते हुए अदालत ने शिक्षाधिकारी की मनोवृत्ति पर अपनी तीव्र नाराजी जताई.
अदालत ने शिक्षाधिकारी की कार्यपध्दति में सुधार करने हेतु कडक रवैया अपनाते हुए अब सीधे शालेय शिक्षा विभाग के सचिव को याचिकाकर्ता की शिकायत में जांच पडताल करने तथा शिकायत का निराकरण करने में असफल रहनेवाले शिक्षाधिकारी के खिलाफ योग्य कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. साथ ही इस संदर्भ में आगामी 5 अगस्त तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए कहा है कि इसके बाद ऐसे अन्य मामलों में भी इसी तरह के निर्देश दिए जायेंगे.
… अन्यथा अध्यक्ष पर होगी कार्रवाई
शालेय शिक्षा विभाग के सचिव को दिए गये निर्देश में अदालत ने यह भी कहा कि सातपुडा कल्याण संस्था के अध्यक्ष तथा सातपुडा माध्यमिक विद्यालय के मुख्याध्यापक द्बारा इस मामले को लेकर निभाई गई भूमिका की जांच पडताल की जानी चाहिए और यदि जरूरत पडती है तो उनके खिलाफ भी जरूरी कार्रवाई की जाए.





