थिलीशरण गुप्त के काव्य में भारतीय जीवन-मूल्यों पर विशेष व्याख्यान आयोजित

वर्धा /दि.5- महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के साहित्य पर केंद्रित ‘मैथिलीशरण गुप्त के काव्य में भारतीय जीवन-मूल्य एवं राष्ट्रीय भावना’ विषयक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में वक्ताओं ने गुप्त के साहित्य को भारतीय संस्कृति, राष्ट्रप्रेम और लोकमंगल की भावना का सशक्त प्रतीक बताया.
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू), नई दिल्ली के हिंदी संकाय के प्रो. नरेंद्र मिश्र ने कहा कि मैथिलीशरण गुप्त के काव्य में मातृभूमि के प्रति प्रेम, लोकमंगल और भारतीय जीवन-मूल्यों का सशक्त चित्रण मिलता है. उन्होंने कहा कि भारत-भारती जैसे काव्य में नारी सम्मान, स्वदेशी, किसानों की पीड़ा और राष्ट्रीय स्वाभिमान को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया गया है. यह व्याख्यान भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के छह वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित अखिल भारतीय शिक्षा समागम-2026 के अंतर्गत साहित्य विद्यापीठ द्वारा आयोजित किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने की. अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रा. कुमुद शर्मा ने कहा कि मैथिलीशरण गुप्त के साहित्य में भारतीय ज्ञान परंपरा, रामायण, महाभारत, उपनिषद और पौराणिक प्रसंगों के माध्यम से राष्ट्रप्रेम, कर्तव्यबोध और भारतीयता का संदेश मिलता है. उनका साहित्य आज भी समाज को प्रेरणा देने और समकालीन चुनौतियों का सामना करने का साहस प्रदान करता है.
कार्यक्रम में साहित्य विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रा. अवधेश कुमार ने स्वागत एवं प्रस्तावना प्रस्तुत की. डॉ. रामानुज अस्थाना ने गुप्त के काव्य पर आधारित कविता प्रस्तुत की. संचालन डॉ. रूपेश कुमार सिंह ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन प्रो. प्रीति सागर ने किया. कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के चित्र पर माल्यार्पण और कुलगीत के साथ हुआ. इस अवसर पर बड़ी संख्या में शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे.

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