डॉक्टरों की हड़ताल स्थगित, आईएमए ने आंदोलन वापस लेकर सेवाएं बहाल कीं

उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद मरीजों को मिली बड़ी राहत

* 13 और 14 अगस्त को होगी बीएचएमएस-सीसीएमपी डॉक्टरों के पंजीकरण विवाद पर सुनवाई
नागपुर/दि.7 – महाराष्ट्र में पिछले कई दिनों से चल रहा डॉक्टरों का आंदोलन आखिरकार मुंबई उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद स्थगित कर दिया गया है. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने गुरुवार को आंदोलन वापस लेने की घोषणा करते हुए सभी चिकित्सकों से तत्काल अपनी सेवाएं पुनः शुरू करने का आह्वान किया. इस निर्णय के बाद राज्यभर के सरकारी और निजी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है. यह आंदोलन राज्य सरकार द्वारा सीसीएमपी (सर्टिफिकेट कोर्स इन मॉडर्न फार्माकोलॉजी) पूरा कर चुके बीएचएमएस चिकित्सकों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण देने के निर्णय के विरोध में शुरू किया गया था.
बता दे कि, महाराष्ट्र सरकार ने 3 अगस्त को जारी एक शासन निर्णय (जीआर) के माध्यम से सीसीएमपी पाठ्यक्रम पूरा कर चुके बीएचएमएस चिकित्सकों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण का रास्ता खोल दिया था. सरकार के इस फैसले का आईएमए, रेजिडेंट डॉक्टर संगठनों तथा एलोपैथिक चिकित्सकों के विभिन्न संगठनों ने विरोध किया. डॉक्टरों का कहना था कि इस निर्णय से चिकित्सा क्षेत्र में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है और मरीजों की सुरक्षा से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़े हो सकते हैं. इसी विरोध में राज्यभर में आंदोलन शुरू किया गया था. आंदोलन के कारण महाराष्ट्र के कई सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई थीं. कई नियोजित शल्यक्रियाएं स्थगित करनी पड़ीं, जबकि बाह्यरोगी विभाग (ओपीडी) की सेवाओं पर भी असर पड़ा. इससे हजारों मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा. विशेष रूप से सरकारी अस्पतालों में उपचार के लिए आने वाले गरीब और ग्रामीण मरीजों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई उच्च न्यायालय ने इस विषय पर स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) लिया. सुनवाई के दौरान प्रभारी मुख्य न्यायाधीश ने सभी पक्षों से संयम बरतने और मरीजों के हितों को प्राथमिकता देने की अपील की. न्यायालय ने राज्य सरकार के 3 अगस्त के शासन निर्णय को उसके मूल उद्देश्य के अनुरूप लागू करने के निर्देश दिए. साथ ही बीएचएमएस-सीसीएमपी चिकित्सकों के पंजीकरण की प्रक्रिया तय करने के लिए एक मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) तैयार करने का आदेश भी दिया.
उच्च न्यायालय ने इस विषय पर व्यापक विचार-विमर्श के लिए एक समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं. इस समिति में आईएमए, रेजिडेंट डॉक्टर संगठनों, चिकित्सा विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों को शामिल किया जाएगा. समिति का उद्देश्य पंजीकरण प्रक्रिया, कार्यक्षेत्र और चिकित्सा सेवाओं से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करना होगा.
न्यायालय के हस्तक्षेप तथा प्रभारी मुख्य न्यायाधीश के आग्रह का सम्मान करते हुए संगठन ने आंदोलन स्थगित करने का निर्णय लिया है. इसके साथ ही सभी चिकित्सकों को तत्काल काम पर लौटने और मरीजों की सेवा शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं. महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में होम्योपैथी स्नातकों के पंजीकरण से जुड़ी लंबित याचिकाओं पर मुंबई उच्च न्यायालय 13 और 14 अगस्त को लगातार सुनवाई करेगा.
डॉक्टरों के आंदोलन स्थगित होने के बाद राज्यभर में स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य होने का मार्ग प्रशस्त हो गया है. अस्पतालों में लंबित सर्जरी, ओपीडी सेवाएं और अन्य उपचार संबंधी कार्य अब पुनः नियमित रूप से शुरू होने की संभावना है.

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