अमरावती विवि में एआई कोर्स अनिवार्य
प्रदेश में प्रथम विद्यापीठ

* विद्यार्थियों का ही लाभ
अमरावती/दि.13 – संत गाडगेबाबा अमरावती विश्वविद्यालय ने स्नातक पूर्व कोर्सेस में कृत्रिम बुध्दिमत्ता अर्थात एआई के पाठ्यक्रम को शामिल कर राज्य में ऐसा कोर्स लानेवाली पहली विद्यापीठ बनी है. पांचवें सेमीस्टर में प्रत्येक स्नातक पढाई के साथ यह कोर्स करना अनिवार्य किया गया है. यह पाठ्यक्रम किए जाने से विद्यार्थियों का ही लाभ का दावा किया जा रहा है. जानकारों ने यह भी कहा कि आज के तकनीकी वाले युग में विद्यार्थियों को कौशल्य प्रदान करना आवश्यक है. अमरावती विवि ने प्रदेश में बाजी मार ली है. स्नातक पूर्व पढाई में एआई का पाठ्यक्रम शामिल करनेवाली पहली युनिवर्सिटी है.
विद्यापीठ के निर्णयानुसार सभी चार मुख्य कोर्सेस में एआई का समावेश किया गया है. विज्ञान और तकनीक, वाणिज्य प्रबंधन में एआई कोर्स की पढाई पांचवे सेमीस्टर में अनिवार्य की गई है. जानकारों ने बताया कि इस कोर्स से विद्यार्थियों का तकनीकी ज्ञान बढेगा. वे कृत्रिम बुध्दिमत्ता अर्थात एआई से भलीभांति परिचित होंगे. उन्हें करियर में यह कोर्स बडा उपयोगी और लाभदायी रहेगा. उनके लिए काम की बेहतर संभावनाएं बढायेगा.
विद्यापीठ ने कहा कि इस विषय की एक्जाम महाविद्यालय स्तर पर होगी. उपरांत वे विद्यापीठ को अंक और ग्रेड भेजेंगे. विद्यार्थी की अंतिम अंकसूची में इस ग्रेड के आधार पर संबंधित विषय के अंकों का उल्लेख होगा. जो उन्हें व्यवसायिक और शिक्षा के इतर उपलब्धि दिलायेगा. इसका उनके रोजगार में बडा उपयोग हो सकता है.
* क्या कहते हैं कुलगुरू
कुलगुरू डॉ. मिलिंद बारहाते ने कहा कि तकनीक बहुत तीव्र गति से अपना क्षेत्र विस्तार कर रही है. ऐसाआई के दौर में भविष्य में महत्वपूर्ण तकनीकी में योगदान रहेगा. विद्यार्थियों को स्नातक पूर्व एआई का ज्ञान देना उनके बेहतर भविष्य के लिए सहायक होगा. उनकी जानकारी और नॉलेज बढेगी. जो उन्हें किसी भी क्षेत्र में बडा काम आयेगी, आगे बढायेंगी, सफलता दिलायेगी. कुलगुरू ने कहा कि अमरावती विवि ने विद्यार्थी केन्द्रित उपक्रम अपनाए है. महाविद्यालयों ने भी गंभीरता से उपक्रमों, कोर्सेस को आगे बढाया है. अमरावती के छात्र-छात्राएं वैश्विक स्तर पर विश्वासपूर्वक आगे बढेंगे. ऐसा यह कोर्स है.





