दर्यापुर कोर्ट में साल भर से नहीं हुई गवाही

नियमित सरकारी वकील ही उपलब्ध नहीं

* खंडपीठ ने जताई नाराजगी, स्वयं लिया संज्ञान
* जनहित याचिका की प्रक्रिया करें शुरु – कोर्ट
नागपुर /दि.14- संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आरोपी को मिले ‘शीघ्र सुनवाई के अधिकार’ की गारंटी केवल कागजों तक सीमित न रह जाए. बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने इस पर गंभीर चिंता जताई है. अमरावती जिले के दर्यापुर न्यायालय में नियमित सहायक सरकारी वकील (एपीपी) उपलब्ध नहीं होने के कारण पिछले एक साल से सुनवाई प्रभावित हो रही है. इस पर कडा रुख अपनाते हुए न्यायमूर्ति एम. एम. नेर्लिकर ने न्यायिक रजिस्ट्रार को स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज करने की प्रक्रिया शुरु करने का निर्देश दिया है.
* यह है प्रकरण
यह मामला प्रज्वल उर्फ चिट्टूया सुरेश हिवराले की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया. कोर्ट ने पाया कि, केस दर्यापुर स्थानांतरित होने के बाद पिछले एक साल में सरकारी वकील की अनुपलब्धता के कारण एक भी गवाह की गवाही दर्ज नहीं हो सकी. अदालत ने स्पष्ट किया कि, न्याय प्रणाली अभियोजन, बचाव पक्ष और न्यायालय, इन तीनों स्तंभों पर टिकी है. इनमें से किसी एक की भी विफलता मुकदमों में अनावश्यक देरी का कारण बनती है.
* सरकारी वकीलों की संख्या कम, हजारों मामले लंबित
वर्धा : 17 एपीपी, 2,597 मामले लंबित.
चंद्रपुर : 5 एपीपी, 3,077 मामले लंबित.
वरोरा : 1 एपीपी, 1,990 मामले लंबित.
* एपीपी पर ज्यादा बोझ से बढते हैं स्थगन
हाईकोर्ट ने सरकार द्वारा प्रस्तुत विभिन्न जिलों में सहायक सरकारी वकीलों की संख्या और लंबित मामलों के आंकडों का अवलोकन किया. कोर्ट के अनुसार सरकारी वकीलों और लंबित मामलों का अनुपात बेहद असंतुलित है. एक-एक अभियोजक पर अत्याधिक मुकदमों का बोझ होने से वे प्रभावी ढंग से पैरवी नहीं कर पाते, जिससे बार-बार स्थगन की स्थिति बनती है. पर्याप्त संख्या में वकीलों की नियुक्ति के बिना मुकदमों की शीघ्र सुनवाई संभव नहीं है.
* अनुच्छेद 21 के अधिकार का दिया हवाला
हाईकोर्ट ने ‘हुसैनारा खातून’, ‘अब्दुल रहमान अंतुले’ और ‘करतार सिंह’ मामलों में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि, शीघ्र सुनवाई अनुच्छेद 21 के तहत आरोपी का मौलिक अधिकार है. आरोपी को अनिश्चितकाल तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता. प्रक्रियात्मक बाधाओं के कारण इस अधिकार का वास्तविक उद्देश्य प्रभावित हो रहा है. इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए मामले का नोट नागपुर खंडपीठ के वरिष्ठतम प्रशासनिक न्यायमूर्ति के समक्ष रखने के निर्देश दिए गए हैं.

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