जिला न्यायालय से ही चोरी हो गई केस फाइलें!

चंद्रपुर जिला एवं सत्र न्यायालय में सनसनीखेज मामला

* फाइल लौटाने के लिए मांगी गई 50 हजार रुपये की रकम
चंद्रपुर/दि.14- चोरी की घटनाएं आमतौर पर घरों, दुकानों या वाहनों से जुड़ी होती हैं, लेकिन चंद्रपुर जिला एवं सत्र न्यायालय में सामने आया एक मामला पूरे न्यायिक तंत्र को झकझोर देने वाला है. यहां एक महत्वपूर्ण आपराधिक अपील की फाइल कथित रूप से गायब हो गई और उसे वापस करने के बदले 50 हजार रुपये की मांग किए जाने का आरोप सामने आया है. मामले में पुलिस ने न्यायालय में संविदा आधार पर कार्यरत एक डाटा एंट्री ऑपरेटर को गिरफ्तार किया है.
जानकारी के अनुसार, जिला न्यायालय में वरिष्ठ लिपिक सतीश उगले के पास सुरक्षित रखी गई फौजदारी अपील क्रमांक 3/25 (रामराज बनाम सरकार) की फाइल गायब पाई गई. फाइल नहीं मिलने पर न्यायालय प्रशासन ने वरिष्ठ लिपिक को विभागीय जांच संबंधी नोटिस जारी किया. बताया जाता है कि नोटिस मिलने के उसी दिन प्रदीप लांडगे (निवासी विसापुर) ने कथित रूप से सतीश उगले को फोन कर कहा कि गायब हुई केस फाइल उसके पास है और यदि वह फाइल वापस चाहिए तो 50 हजार रुपये देने होंगे. लांडगे बाहरी एजेंसी के माध्यम से जिला न्यायालय में डाटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में कार्यरत था.
शिकायत के अनुसार, 10 अगस्त को उगले और लांडगे की एक होटल में मुलाकात हुई. इस दौरान एक अन्य व्यक्ति भी मौजूद था. बातचीत के दौरान उगले ने लांडगे को 25 हजार रुपये नकद दिए और फाइल लौटाने की मांग की. आरोप है कि लांडगे ने अपनी मोटरसाइकिल की डिक्की में रखी फाइल दिखाकर यह भरोसा दिलाया कि दस्तावेज उसके पास हैं, लेकिन उसने फाइल वापस नहीं की. उसने शेष 25 हजार रुपये मिलने के बाद पूरी फाइल लौटाने की बात कही और वहां से चला गया. इसके बाद वरिष्ठ लिपिक ने रामनगर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई.
शिकायत के आधार पर रामनगर पुलिस ने जांच शुरू की और प्रदीप लांडगे को गिरफ्तार कर लिया. उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (इछड) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. आरोपी को न्यायालय में पेश किए जाने के बाद पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है. पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फाइलें किस प्रकार गायब हुईं, क्या इसमें अन्य लोगों की भी भूमिका है और क्या यह एक संगठित साजिश का हिस्सा था.
* तीन अन्य मामलों की फाइलें भी लापता
जांच के दौरान एक और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. सूत्रों के अनुसार केवल एक ही नहीं, बल्कि तीन अन्य महत्वपूर्ण मामलों की फाइलें भी गायब बताई जा रही हैं. इनमें विशेष पॉक्सो केस क्रमांक 193/25 (सरकार बनाम विनय), दिवानी अपील क्रमांक 31/24 (सुषमा बनाम विनोद), नियमित दिवानी मुकदमा क्रमांक 216/25 (सुषमा बनाम विनोद) जैसे मामले शामिल हैं. इन फाइलों के गायब होने से न्यायालय में रखे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
* न्यायिक दस्तावेजों की सुरक्षा पर उठे प्रश्न
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायालय की फाइलें किसी भी मामले का मूल आधार होती हैं. यदि ऐसे दस्तावेज गायब हो जाएं या उनके साथ छेड़छाड़ हो, तो न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है. ऐसे में यह मामला केवल चोरी का नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था की सुरक्षा और विश्वसनीयता से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है. फिलहाल पुलिस और न्यायालय प्रशासन दोनों स्तरों पर जांच जारी है. यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि फाइलें कब और कैसे गायब हुईं तथा इस पूरे प्रकरण में और कौन-कौन शामिल हो सकते हैं. मामले ने न्यायालय परिसर में भी चिंता का माहौल पैदा कर दिया है.

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