‘ढगाळ बिबट्या’ को बचाने के लिए केंद्र का बड़ा मास्टर प्लान
विलुप्ति के कगार पर पहुंची दुर्लभ प्रजाति के संरक्षण हेतु पहली राष्ट्रीय कार्ययोजना लागू

वर्धा/दि.14 – भारत के सबसे दुर्लभ और रहस्यमय वन्यजीवों में शामिल ढगाळ बिबट्या (क्लाउडेड लेपर्ड) के संरक्षण के लिए केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक पहल की है. तेजी से घटती संख्या और सिकुड़ते प्राकृतिक आवास को देखते हुए केंद्र ने देश की पहली ‘क्लाउडेड लेपर्ड कंजर्वेशन एक्शन प्लान’ लागू करने की घोषणा की है. वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
* पूर्वोत्तर भारत तक सीमित है अस्तित्व
क्लाउडेड लेपर्ड मुख्य रूप से असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और मणिपुर के घने जंगलों में पाया जाता है. यह अत्यंत शर्मीला और निशाचर जीव है, जो अधिकांश समय पेड़ों पर बिताता है. इसके शरीर पर बादलों जैसी आकृतियों वाले धब्बे होने के कारण इसे क्लाउडेड लेपर्ड कहा जाता है. वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रजाति मानव गतिविधियों, जंगलों के विनाश और अवैध शिकार के कारण लगातार संकट में है. यही वजह है कि इसके संरक्षण के लिए विशेष योजना तैयार की गई है.
* 14 वन क्षेत्रों पर रहेगा विशेष फोकस
नई कार्ययोजना के तहत पूर्वोत्तर भारत के 14 प्रमुख वन क्षेत्रों को संरक्षण अभियान के केंद्र में रखा जाएगा. इन्हीं क्षेत्रों में इस दुर्लभ प्रजाति का मुख्य आवास माना जाता है. सरकार का उद्देश्य प्राकृतिक आवास को सुरक्षित करना और प्रजाति की संख्या बढ़ाना है.
* तीन प्रमुख बिंदुओं पर होगा काम
केंद्र सरकार की इस योजना में तीन प्रमुख पहलुओं पर विशेष जोर दिया गया है.
1. आवास संरक्षण
जंगलों के क्षरण को रोकना, प्राकृतिक वन क्षेत्रों का पुनर्जीवन करना और क्लाउडेड लेपर्ड के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करना.
2. आधुनिक तकनीक से निगरानी
कैमरा ट्रैप, डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम और अन्य आधुनिक उपकरणों की सहायता से इस प्रजाति की गतिविधियों और संख्या पर वैज्ञानिक निगरानी रखी जाएगी.
3. शिकार विरोधी सख्त कार्रवाई
वन क्षेत्रों में गश्त बढ़ाई जाएगी, स्थानीय खुफिया तंत्र को मजबूत किया जाएगा तथा अवैध शिकार करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
* क्यों है इतना खास क्लाउडेड लेपर्ड?
वन्यजीव विशेषज्ञ इसे दुनिया के सबसे रहस्यमय बड़े मार्जारों में गिनते हैं. यह बाघ और तेंदुए की तुलना में कम दिखाई देता है. इसकी लंबी और मजबूत पूंछ पेड़ों पर संतुलन बनाए रखने में मदद करती है. यह तेज दहाड़ने के बजाय बिल्ली जैसी गुर्राहट करता है और घने जंगलों में एकांत जीवन जीना पसंद करता है.
* जैव विविधता संरक्षण को मिलेगा बल
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि क्लाउडेड लेपर्ड केवल एक दुर्लभ प्रजाति नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत की वन पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके संरक्षण से पूरे क्षेत्र की जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन को मजबूती मिलेगी. केंद्र सरकार की यह पहल ऐसे समय में आई है, जब दुनिया भर में दुर्लभ वन्यजीवों के संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ रही है. उम्मीद की जा रही है कि इस विशेष कार्ययोजना से क्लाउडेड लेपर्ड की घटती आबादी को बचाने और उसके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण सफलता मिलेगी.





